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मुस्लिम विधि में शिया स्कूल और सुन्नी स्कूल के बीच प्रमुख अंतर

मुस्लिम विधि में शिया स्कूल और सुन्नी स्कूल के बीच प्रमुख अंतर


1. भूमिका (Introduction)

मुस्लिम विधि (Muslim Law) इस्लाम धर्म पर आधारित एक व्यापक एवं सुव्यवस्थित विधिक प्रणाली है, जो मुसलमानों के व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक जीवन के अनेक पहलुओं को नियंत्रित करती है। यद्यपि मुस्लिम विधि के मूल स्रोत—क़ुरआन, सुन्नत, इज्मा और क़ियास—सभी मुसलमानों के लिए समान हैं, फिर भी उनकी व्याख्या और अनुप्रयोग में विद्वानों के बीच मतभेद उत्पन्न हुए। इन मतभेदों के परिणामस्वरूप मुस्लिम विधि के विभिन्न स्कूल (Schools of Thought) विकसित हुए।

मुस्लिम समुदाय मुख्यतः दो बड़े वर्गों में विभाजित है—

  1. सुन्नी (Sunni)
  2. शिया (Shia)

इन दोनों वर्गों के भीतर विधिक सिद्धांतों, परंपराओं और व्याख्याओं में महत्वपूर्ण अंतर पाए जाते हैं। यही कारण है कि सुन्नी और शिया स्कूलों के नियम कई मामलों में एक-दूसरे से भिन्न हैं।

इस उत्तर में शिया स्कूल और सुन्नी स्कूलों के बीच प्रमुख अंतरों का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत किया जा रहा है।


2. सुन्नी और शिया स्कूल : संक्षिप्त परिचय

(क) सुन्नी स्कूल

सुन्नी मुसलमान पैग़म्बर मोहम्मद साहब की सुन्नत (परंपराओं) का अनुसरण करते हैं और यह मानते हैं कि पैग़म्बर के बाद नेतृत्व समुदाय की सहमति से चुना जाना चाहिए। सुन्नी विधि के अंतर्गत चार प्रमुख स्कूल हैं—हनफ़ी, मालिकी, शाफ़ई और हंबली।

(ख) शिया स्कूल

शिया मुसलमानों का विश्वास है कि पैग़म्बर मोहम्मद साहब के बाद नेतृत्व का अधिकार उनके परिवार (अहले-बैत) को था और यह उत्तराधिकार इमामों के माध्यम से चलता है। शिया विधि के प्रमुख स्कूल हैं—इथना अशरी (Twelvers), इस्माइली और ज़ैदी।


3. नेतृत्व और धार्मिक अधिकार के सिद्धांत में अंतर

(क) सुन्नी दृष्टिकोण

सुन्नी मत के अनुसार पैग़म्बर के बाद कोई दैवी रूप से नियुक्त उत्तराधिकारी नहीं था। समुदाय की सहमति से खलीफ़ा का चयन किया गया। इस कारण सुन्नी विधि में धार्मिक और विधिक अधिकार मुख्यतः विद्वानों (Jurists) के पास केंद्रित हैं।

(ख) शिया दृष्टिकोण

शिया मत के अनुसार पैग़म्बर के बाद नेतृत्व का अधिकार अली और उनके वंशजों (इमामों) को प्राप्त था। इमामों को न केवल राजनीतिक बल्कि धार्मिक और विधिक मार्गदर्शक भी माना जाता है।

अंतर का प्रभाव

  • सुन्नी विधि में विद्वानों की भूमिका अधिक प्रमुख है।
  • शिया विधि में इमामों की शिक्षाओं को विशेष महत्व दिया जाता है।

4. विधि के स्रोतों के प्रयोग में अंतर

(क) सुन्नी स्कूल

सुन्नी स्कूल क़ुरआन, सुन्नत, इज्मा और क़ियास—चारों स्रोतों को व्यापक रूप से स्वीकार करते हैं।

(ख) शिया स्कूल

शिया स्कूल क़ुरआन और सुन्नत को तो स्वीकार करते हैं, परंतु इज्मा और क़ियास के प्रयोग में अधिक सावधानी बरतते हैं। शिया विधि में तर्क (Aql) और इमामों की शिक्षाओं को अधिक महत्व दिया जाता है।

निष्कर्ष

  • सुन्नी विधि अधिक व्यावहारिक और लचीली मानी जाती है।
  • शिया विधि अपेक्षाकृत अधिक सैद्धांतिक है।

5. विवाह की अवधारणा में अंतर

(क) सुन्नी स्कूल

सुन्नी विधि में विवाह एक नागरिक अनुबंध (Civil Contract) है। विवाह स्थायी होता है और अस्थायी विवाह की अवधारणा स्वीकार नहीं की जाती।

(ख) शिया स्कूल

शिया विधि में विवाह दो प्रकार का होता है—

  1. स्थायी विवाह
  2. मुतआ विवाह (अस्थायी विवाह)

मुतआ विवाह एक निश्चित अवधि के लिए किया जाता है।

अंतर

  • सुन्नी स्कूल मुतआ विवाह को अमान्य मानते हैं।
  • शिया स्कूल मुतआ विवाह को वैध मानते हैं।

6. तलाक की प्रक्रिया में अंतर

(क) सुन्नी स्कूल

सुन्नी विधि में तलाक के कई प्रकार हैं—तलाक-ए-अहसन, तलाक-ए-हसन और तलाक-ए-बिद्दत।

(ख) शिया स्कूल

शिया विधि में तलाक को अधिक औपचारिक प्रक्रिया माना गया है। तलाक गवाहों की उपस्थिति में और निर्धारित शब्दों में ही वैध होता है।

अंतर

  • सुन्नी विधि में तलाक अपेक्षाकृत सरल है।
  • शिया विधि में तलाक अधिक नियंत्रित और औपचारिक है।

7. बहुविवाह (Polygamy) में अंतर

(क) सुन्नी स्कूल

सुन्नी विधि पुरुष को चार पत्नियाँ रखने की अनुमति देती है।

(ख) शिया स्कूल

शिया विधि में भी चार पत्नियों तक की अनुमति है, परंतु मुतआ विवाह के कारण व्यावहारिक स्थिति भिन्न हो जाती है।


8. मेहर (Dower) के नियमों में अंतर

(क) सुन्नी स्कूल

मेहर विवाह का अनिवार्य तत्व है और विवाह के समय निर्धारित किया जा सकता है।

(ख) शिया स्कूल

शिया विधि में मेहर को विवाह का अनिवार्य अंग माना जाता है। मेहर के बिना विवाह को अपूर्ण माना जाता है।


9. उत्तराधिकार (Inheritance) में अंतर

(क) सुन्नी स्कूल

सुन्नी विधि में उत्तराधिकार के नियम अत्यंत विस्तृत हैं। पुरुष और महिला वारिसों के हिस्से निर्धारित हैं।

(ख) शिया स्कूल

शिया विधि में उत्तराधिकार के नियम कुछ मामलों में भिन्न हैं, विशेषकर माता-पिता और संतान के हिस्सों में।

अंतर

  • सुन्नी विधि में दूर के रिश्तेदारों को भी हिस्सा मिल सकता है।
  • शिया विधि में निकट संबंधियों को प्राथमिकता दी जाती है।

10. वसीयत (Will) में अंतर

(क) सुन्नी स्कूल

कोई मुसलमान अपनी संपत्ति का अधिकतम एक-तिहाई भाग वसीयत कर सकता है।

(ख) शिया स्कूल

शिया विधि में वसीयत के नियम अपेक्षाकृत उदार हैं और कुछ मामलों में वारिस के पक्ष में भी वसीयत संभव है।


11. दत्तक ग्रहण (Adoption) में अंतर

(क) सुन्नी स्कूल

दत्तक ग्रहण को मान्यता नहीं है, केवल संरक्षकता स्वीकार की जाती है।

(ख) शिया स्कूल

शिया विधि भी दत्तक ग्रहण को पारंपरिक अर्थों में स्वीकार नहीं करती, परंतु व्यावहारिक रूप से संरक्षकता को अधिक विस्तार से मान्यता देती है।


12. संरक्षकता (Guardianship) में अंतर

(क) सुन्नी स्कूल

पिता और उसके बाद पितृ पक्ष के पुरुष रिश्तेदारों को प्राथमिकता।

(ख) शिया स्कूल

माता को संरक्षकता में अधिक अधिकार दिए गए हैं।


13. न्यायिक दृष्टिकोण में अंतर

सुन्नी विधि में न्यायालय क़ियास और प्रथाओं का व्यापक प्रयोग करते हैं, जबकि शिया विधि में इमामों की शिक्षाओं को प्राथमिकता दी जाती है।


14. सामाजिक प्रभाव

सुन्नी विधि अधिक व्यापक और व्यावहारिक होने के कारण अनेक देशों में लागू है। शिया विधि मुख्यतः उन क्षेत्रों में लागू है जहाँ शिया जनसंख्या अधिक है।


15. आलोचनात्मक दृष्टिकोण

कुछ विद्वानों का मत है कि इन अंतरों के कारण मुस्लिम विधि में एकरूपता का अभाव है। वहीं अन्य विद्वान इसे मुस्लिम विधि की समृद्धि और विविधता का प्रतीक मानते हैं।


16. निष्कर्ष (Conclusion)

शिया और सुन्नी स्कूल मुस्लिम विधि की दो महत्वपूर्ण धाराएँ हैं। दोनों का उद्देश्य इस्लामी सिद्धांतों के अनुसार जीवन को व्यवस्थित करना है, परंतु उनकी व्याख्या और अनुप्रयोग की पद्धति भिन्न है।

सुन्नी विधि व्यावहारिकता और लचीलेपन पर बल देती है, जबकि शिया विधि इमामों की शिक्षाओं और सैद्धांतिक शुद्धता पर अधिक जोर देती है।

अतः कहा जा सकता है कि शिया और सुन्नी स्कूलों के बीच अंतर होते हुए भी दोनों मिलकर मुस्लिम विधि को एक समृद्ध, व्यापक और जीवंत विधिक व्यवस्था बनाते हैं।