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भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA), 2023 की धारा 5: सुसंगतता के सिद्धांत और न्यायिक दृष्टिकोण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA), 2023 की धारा 5: सुसंगतता के सिद्धांत और न्यायिक दृष्टिकोण

प्रस्तावना

       कानूनी प्रक्रिया केवल यह तय नहीं करती कि “क्या सच हुआ”, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि “क्या साबित किया जा सकता है”। अक्सर न्यायालय के सामने प्रस्तुत तथ्यों और घटनाओं का टूट-फूट या बिखराव होता है। ऐसे में न्यायालय को किसी घटना की पूरी सच्चाई तक पहुँचने के लिए उन बिखरे हुए तथ्यों को जोड़कर एक सुसंगत और पूर्ण चित्र प्रस्तुत करने की आवश्यकता होती है।

      भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (BSA, 2023) की धारा 5 इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है। यह धारा मुख्य घटना से संबंधित तथ्यों को एक श्रृंखला में जोड़कर “Res Gestae” सिद्धांत के अंतर्गत साक्ष्य के रूप में स्वीकार करने का प्रावधान देती है।


1. धारा 5 का उद्देश्य और मूल अवधारणा

BSA की धारा 5 का शीर्षक है:

“एक ही संव्यवहार के भाग होने वाले तथ्यों की सुसंगतता” (Relevancy of facts forming part of same transaction)

कानूनी दृष्टि से इसे “Res Gestae” या ‘किया गया कार्य’ के सिद्धांत के रूप में जाना जाता है। इसका उद्देश्य केवल मुख्य घटना को प्रमाणित करना नहीं, बल्कि मुख्य घटना से जुड़े अन्य तथ्यों को भी सुसंगत रूप में अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना है।

इस धारा के अनुसार, यदि कोई तथ्य मुख्य विवाद का हिस्सा नहीं है, परंतु घटना के साथ इतना जुड़ा है कि उसे उसी ‘संव्यवहार’ का हिस्सा माना जा सके, तो वह साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य होगा।


2. “एक ही संव्यवहार” का अर्थ

धारा 5 में प्रयुक्त शब्द “Same Transaction” का मतलब है घटनाओं का ऐसा समूह जो आपस में इस तरह जुड़ा हो कि उन्हें अलग-अलग नहीं किया जा सके। न्यायालय इसे समझने के लिए तीन महत्वपूर्ण मापदंड अपनाता है:

  1. निकटता (Proximity):
    घटनाओं का समय और स्थान मुख्य घटना के पास होना आवश्यक है। उदाहरणतः हत्या के तुरंत पहले हुई मारपीट या धक्कामुक्की मुख्य घटना से जुड़ी मानी जा सकती है।
  2. निरंतरता (Continuity):
    घटनाओं के बीच कोई तारतम्य या अटूट कड़ी होनी चाहिए। एक घटना का परिणाम अगली घटना में स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए।
  3. उद्देश्य की एकता (Unity of Purpose):
    घटनाओं का लक्ष्य या मकसद समान होना चाहिए। यदि विभिन्न घटनाओं का उद्देश्य अलग-अलग है, तो उन्हें ‘एक ही संव्यवहार’ का हिस्सा नहीं माना जाएगा।

इन मापदंडों के आधार पर न्यायालय यह तय करता है कि कौन-सा तथ्य सीधे मुख्य घटना से जुड़ा हुआ है और कौन-सा नहीं।


3. धारा 5 के व्यावहारिक उदाहरण

क) मारपीट और हत्या

मान लीजिए किसी व्यक्ति पर हत्या का आरोप है। हत्या से पहले आरोपी ने पीड़ित के साथ मारपीट की और उसी दौरान गवाही देने वाले लोगों के सामने कुछ बातें कही। यह मारपीट सीधे हत्या का हिस्सा नहीं है, परंतु धारा 5 के अनुसार इसे सुसंगत साक्ष्य माना जाएगा क्योंकि यह घटना की श्रृंखला में शामिल है और मुख्य घटना को समझने में मदद करती है।

ख) सशस्त्र विद्रोह और दंगे

यदि किसी व्यक्ति ने अलग-अलग समय और स्थान पर हिंसा की, संपत्ति नष्ट की या भीड़ जुटाई, तो न्यायालय इन घटनाओं को ‘एक ही संव्यवहार’ का हिस्सा मान सकता है। यह निर्णय उन घटनाओं के समान उद्देश्य और समय/स्थान की निकटता पर आधारित होगा।

ग) लगातार भेजे गए अपमानजनक पत्र

मानहानि के मामले में यदि आरोपी ने लगातार पत्र भेजे, तो केवल एक पत्र पर मुकदमा चलने के बावजूद, अन्य पत्र भी धारा 5 के तहत सुसंगत साक्ष्य माने जाएंगे। इसका कारण यह है कि सभी पत्र एक ही प्रक्रिया और उद्देश्य का हिस्सा हैं।


4. धारा 5 और Res Gestae सिद्धांत

धारा 5 मुख्य रूप से Res Gestae सिद्धांत पर आधारित है। Res Gestae का अर्थ है “किया गया कार्य”। यह सिद्धांत न्यायालयों में निम्नलिखित रूप से लागू होता है:

  1. तात्कालिकता (Immediacy):
    घटना के तुरंत पहले, दौरान या बाद में हुई घटनाएँ अधिक विश्वसनीय मानी जाती हैं। उदाहरणतः घटना के समय गवाह का चिल्लाना—“उसने गोली मारी!”—साक्ष्य के रूप में मजबूत होगा।
  2. मनोवैज्ञानिक जुड़ाव (Psychological Connection):
    घटना से जुड़ी घटनाओं का मानव मनोविज्ञान के हिसाब से न्यायालय में अधिक विश्वसनीय महत्व होता है।

इस सिद्धांत का उद्देश्य है कि न्यायालय मुख्य घटना और उससे जुड़े तथ्यों का संपूर्ण चित्र देख सके।


5. BSA की धारा 5 बनाम पुराने कानून की धारा 6

पुराने इंडियन एविडेंस एक्ट, 1872 में यही प्रावधान धारा 6 के तहत था। BSA 2023 ने इसे धारा 5 के रूप में स्थानांतरित किया और इसके दायरे को व्यापक तथा स्पष्ट किया।

तुलना पुराना कानून (Sec 6) नया कानून (BSA Sec 5)
सिद्धांत Res Gestae Res Gestae
महत्व सीमित तकनीकी व्याख्या व्यापक, आधुनिक संदर्भों के साथ सुसंगत तथ्यों पर ध्यान
विशेषता केवल तत्काल घटनाओं तक सीमित मुख्य घटना से जुड़ी सभी सुसंगत घटनाएँ शामिल, चाहे समय या स्थान में थोड़ी दूरी हो

नए कानून में यह स्पष्ट किया गया कि सुसंगतता का आधार मुख्य घटना और संबंधित तथ्यों का तारतम्य और उद्देश्य है, जिससे न्याय की खोज में अधिक पारदर्शिता आती है।


6. न्यायालयीन दृष्टिकोण और सीमाएं

न्यायालय धारा 5 के साक्ष्यों को स्वीकार करते समय सतर्क रहता है। इसके लिए कुछ शर्तें अनिवार्य मानी जाती हैं:

  1. तथ्य मुख्य घटना से सीधे जुड़े होने चाहिए।
  2. घटनाओं के बीच समय का अंतर इतना कम होना चाहिए कि मनगढ़ंत कहानी बनाने की संभावना न्यूनतम हो।
  3. यदि कोई गवाह कई घंटों या दिनों बाद घटना बताता है, तो यह धारा 5 के तहत नहीं बल्कि अन्य धाराओं के तहत आ सकता है।
  4. तथ्य और घटना की श्रृंखला सुसंगत और एकीकृत होनी चाहिए।

न्यायालय यह भी देखता है कि तथ्यों की प्रस्तुति घटना की पूरी कहानी को समझाने में किस हद तक सहायक है


7. धारा 5 का महत्व और न्यायिक प्रभाव

धारा 5 का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि:

  • कोई अपराधी सिर्फ प्रत्यक्ष साक्ष्य की कमी के कारण बच न जाए।
  • अदालत के सामने एक सुसंगत और पूर्ण घटना चित्र प्रस्तुत हो।
  • बिखरे हुए तथ्यों और घटनाओं को सुसंगत रूप से जोड़कर अपराध की वास्तविकता को साबित किया जा सके।

न्यायिक प्रथा में इसे अक्सर गंभीर मामलों में लागू किया जाता है, जैसे:

  • हत्या, बलात्कार, और हिंसा के मामले
  • संपत्ति और व्यापारिक विवाद
  • मानहानि और आपराधिक धमकी

धारा 5 अदालतों को यह सुविधा देती है कि वे केवल मुख्य घटना के बजाय संपूर्ण घटनाक्रम को ध्यान में रखते हुए निर्णय लें।


8. व्यावहारिक सलाह और कानूनी निहितार्थ

वकीलों और न्यायिक अधिकारियों के लिए धारा 5 की समझ महत्वपूर्ण है:

  1. साक्ष्य की तैयारी: वकील को घटना से जुड़े सभी तथ्यों को समय और स्थान के अनुसार व्यवस्थित करना चाहिए।
  2. गवाहों की तात्कालिकता: गवाह द्वारा दिए गए बयान घटना के तुरंत बाद होने चाहिए ताकि उनका साक्ष्य सुसंगत और विश्वसनीय हो।
  3. साक्ष्य की सीमाएं: धारा 5 का उपयोग तभी संभव है जब तथ्य मुख्य घटना से जुड़े हों; अति-दूरस्थ घटनाओं को अन्य धाराओं के तहत प्रस्तुत करना उचित होगा।

निष्कर्ष

        भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 5 न्यायिक प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण उपकरण है। यह न केवल मुख्य घटना को प्रमाणित करती है, बल्कि उसके साथ जुड़ी सुसंगत घटनाओं और तथ्यों को भी न्यायालय के समक्ष पेश करने में मदद करती है।

       धारा 5 का सही और विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करता है कि कोई अपराधी सिर्फ तकनीकी कमियों या प्रत्यक्ष साक्ष्य की कमी के कारण बच न पाए। न्यायालय इस धारा के तहत तथ्यों की तात्कालिकता, उद्देश्य की एकता और सुसंगतता को प्रमुखता देता है।

       इस प्रकार, धारा 5 न केवल न्यायिक निष्पक्षता सुनिश्चित करती है, बल्कि कानून की व्यावहारिकता और वास्तविक घटनाओं के प्रति संवेदनशीलता भी प्रदर्शित करती है।