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दिल्ली हाई कोर्ट ने ‘HIMALAYA’ ट्रेडमार्क के दुरुपयोग पर कसा शिकंजा: ग्रीनलैंड ट्रेडिंग को चिह्न के उपयोग से रोका, हिमालया वेलनेस के पक्ष में अंतरिम निषेधाज्ञा जारी 

दिल्ली हाई कोर्ट ने ‘HIMALAYA’ ट्रेडमार्क के दुरुपयोग पर कसा शिकंजा: ग्रीनलैंड ट्रेडिंग को चिह्न के उपयोग से रोका, हिमालया वेलनेस के पक्ष में अंतरिम निषेधाज्ञा जारी 


प्रस्तावना

         ट्रेडमार्क कानून का प्रमुख उद्देश्य उपभोक्ताओं को भ्रम से बचाना और किसी ब्रांड की प्रतिष्ठा एवं विशिष्ट पहचान की रक्षा करना है। इसी सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है, जिसमें Greenland Trading Company को “HIMALAYA” मार्क का उपयोग करने से तुरंत रोक दिया गया। कोर्ट ने पाया कि यह उपयोग—चाहे समान स्पेलिंग से हो या दृश्य रूप से मिलता-जुलता—Himalaya Wellness Company के लंबे समय से प्रचलित और उपभोक्ता समुदाय में स्थापित ट्रेडमार्क का उल्लंघन है। अदालत ने 12 मार्च 2026 तक के लिए अंतरिम निषेधाज्ञा (temporary injunction) जारी कर कंपनी को किसी भी रूप, शैली, या वर्ग में “Himalaya” या उससे धोखा देने वाली समानता रखते किसी भी शब्द/लोगो के उपयोग से रोका।

     यह आदेश ट्रेडमार्क अधिकारों, उपभोक्ता हितों, ब्रांड की विशिष्ट पहचान और भारतीय न्यायपालिका की बौद्धिक संपदा संरक्षण को लेकर गंभीरता का प्रत्यक्ष उदाहरण प्रस्तुत करता है। नीचे इस पूरे मामले का विस्तृत विश्लेषण, कानूनी आधार, कोर्ट के तर्क, और इसके व्यापक प्रभावों पर 1700 शब्दों में विस्तारपूर्वक चर्चा की जा रही है।


1. पृष्ठभूमि: “Himalaya” ब्रांड की प्रतिष्ठा व पहचान

       Himalaya Wellness Company, जो हर्बल और फार्मास्यूटिकल उत्पादों के क्षेत्र में एक अग्रणी नाम है, 1930 से अपनी विशिष्ट पहचान के साथ भारत और विश्व स्तर पर स्थापित है। “HIMALAYA” शब्द वर्षों से उपभोक्ताओं के बीच गुणवत्ता, प्रामाणिकता और आयुर्वेदा आधारित उत्पादों का पर्याय माना जाता है।

      कंपनी के पास “HIMALAYA”, “HIMALAYA WELLNESS”, “HIMALAYA HERBALS”, “H” लोगो आदि कई ट्रेडमार्क का पंजीकरण है। इनका कमर्शियल उपयोग कई दशक पुराना है, जिससे ये भारत में well-known trademarks की श्रेणी में आते हैं।

      जब बाजार में Greenland Trading द्वारा लगभग उसी नाम या उसके मिलते-जुलते संस्करण का उपयोग कर उत्पादों का व्यापार आरंभ हुआ, तो यह सीधे तौर पर Himalaya Wellness की प्रतिष्ठा, goodwill और distinctiveness पर आघात था।


2. विवाद कैसे पैदा हुआ?

       Greenland Trading कंपनी ने “Himalaya” नाम से मिलते-जुलते शब्दों के साथ स्किनकेयर और व्यक्तिगत उपयोग के उत्पादों का व्यापार करना शुरू किया। पैकेजिंग, मार्किंग, और विज्ञापन में प्रयुक्त शब्दावली उपभोक्ता को यह विश्वास दिलाने में सक्षम थी कि यह उत्पाद किसी न किसी रूप में Himalaya Wellness Company से जुड़ा है।

        Himalaya Wellness ने इसे अपने ट्रेडमार्क अधिकारों का गंभीर उल्लंघन करार देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में मुकदमा दायर किया और अस्थायी निषेधाज्ञा (interim injunction) की मांग की।


3. कानूनी प्रश्न

मुख्य रूप से कोर्ट के सामने तीन प्रमुख प्रश्न थे—

(1) क्या Greenland Trading द्वारा उपयोग किया गया चिह्न “HIMALAYA” या उसका मिलताजुलता संस्करण ट्रेडमार्क उल्लंघन (infringement) है?

(2) क्या यह उपभोक्ताओं के बीच भ्रम (confusion) या धोखे (deception) की संभावना पैदा करता है?

(3) क्या Himalaya Wellness अपनी long-standing reputation और prior use का अधिकार रखती है?


4. अदालत का विस्तृत विश्लेषण

दिल्ली हाई कोर्ट ने prima facie पाया कि—

(i) “Himalaya” एक अत्यंत प्रसिद्ध (well-known) मार्क है

Himalaya Wellness लगभग एक सदी से भारत में सक्रिय है। इसका ब्रांड मूल्य, बाजार उपस्थिति और ग्राहकों के बीच पहचान अत्यंत मजबूत है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा ब्रांड विशेष संरक्षण का पात्र है।

(ii) प्रतिवादी का चिह्न धोखा देने वाला समान (deceptively similar) है

दोनों निशानों की तुलना करते हुए कोर्ट ने माना:

  • उच्चारण (phonetic similarity)
  • दृश्य समानता (visual similarity)
  • उपभोक्ता की याद में बसने वाला प्रभाव (overall impression)

इन सभी कारकों के आधार पर प्रतिवादी का चिह्न औसत उपभोक्ता को गलतफ़हमी में डाल सकता है।

(iii) उपभोक्ता भ्रम की प्रबल संभावना

       जब कोई उपभोक्ता स्किनकेयर या हर्बल उत्पाद खरीदता है, तो वह ब्रांड नाम पर काफी निर्भर करता है। “Himalaya” शब्द देखकर वह स्वाभाविक रूप से इसे प्रसिद्ध हिमालया वेलनेस कंपनी का उत्पाद समझ सकता है। यही कारण है कि ट्रेडमार्क कानून deceptive similarity को सख्ती से रोकता है।

(iv) ट्रेडमार्क अधिनियम, 1999 की धारा 29

Court ने कहा कि ACT की धारा 29(1), 29(2) और 29(4) प्रतिवादी के विरुद्ध लागू होती है, क्योंकि:

  • plaintiffs का ट्रेडमार्क registered है,
  • प्रतिवादी समान श्रेणी के उत्पाद बेच रहा है,
  • similarity इतनी है कि confusion और dilution दोनों होंगे।

5. 12 मार्च 2026 तक अंतरिम आदेश—अदालत का तर्क

अदालत ने यह कहते हुए अंतरिम आदेश जारी किया:

  1. Plaintiffs (Himalaya Wellness) के अधिकार पुराने और मजबूत हैं।
  2. प्रतिवादी के उपयोग से brand dilution की आशंका है।
  3. उपभोक्ता deceptively mislead हो सकते हैं।
  4. यदि अभी injunction न दी गई तो plaintiffs की अपूरणीय क्षति (irreparable loss) होगी।

अदालत ने Greenland Trading को तुरंत प्रभाव से “Himalaya” या मिलते-जुलते शब्द मार्क के उपयोग से रोक दिया


6. न्यायालय द्वारा प्रतिवादी पर लगाए गए प्रतिबंध

अंतरिम निषेधाज्ञा के अनुसार Greenland Trading:

  • “Himalaya”, “Himalya”, “Himaliya”, “Himalay” या इसी से मिलते-जुलते किसी शब्द/लोगो का उपयोग नहीं कर सकती।
  • इनसे मिलते-जुलते पैकेजिंग डिज़ाइन/रंग संयोजन का उपयोग नहीं कर सकती।
  • उत्पादों, वेबसाइट, लेबल, बैनर या डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ऐसा कोई शब्द या चिह्न नहीं दिखा सकती।
  • मौजूदा स्टॉक को तुरंत बाजार से हटाना होगा।

7. इस मामले का व्यापक प्रभाव

(1) ब्रांड संरक्षण को मिला बड़ा समर्थन

यह आदेश कंपनियों को यह संदेश देता है कि भारत में बौद्धिक संपदा अधिकार सुरक्षित हैं और अदालतें बड़े ब्रांडों की प्रतिष्ठा की रक्षा करने में सजग हैं।

(2) छोटे व्यवसायों को मिली चेतावनी

यदि कोई नई कंपनी ऐसे नामों, रंगों, या लोगो का उपयोग करती है जो किसी प्रसिद्ध ब्रांड से मिलता-जुलता है, तो उसे कठोर कानूनी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

(3) उपभोक्ताओं की सुरक्षा

यह आदेश उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले उत्पादों के विरुद्ध एक सुरक्षा कवच प्रदान करता है।

(4) अंतरिम निषेधाज्ञा की शक्ति

कोर्ट ने दिखाया कि IP कानूनों के मामलों में interim injunction अत्यंत प्रभावी और त्वरित राहत है।


8. ट्रेडमार्क कानून के संदर्भ में यह मामला क्यों महत्वपूर्ण?

  • यह मामला deceptive similarity test को फिर से मजबूत करता है।
  • passing off और infringement के बीच अंतर को व्यावहारिक रूप से स्पष्ट करता है।
  • यह बताता है कि किसी प्रसिद्ध ट्रेडमार्क पर slight variation भी अवैध हो सकता है।
  • यह well-known trademarks की सुरक्षा को और अधिक मजबूती देता है।

9. निष्कर्ष

         दिल्ली हाई कोर्ट का यह आदेश भारतीय बौद्धिक संपदा (IPR) व्यवस्था को मजबूती प्रदान करता है। “Himalaya” जैसे प्रसिद्ध ट्रेडमार्क की सुरक्षा का महत्व न सिर्फ कंपनी के लिए, बल्कि उपभोक्ता हितों के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। अदालत ने उचित रूप से पाया कि Greenland Trading का चिह्न और ब्रांडिंग उपभोक्ताओं को भ्रमित करने की क्षमता रखती है। इस प्रकार अंतरिम निषेधाज्ञा जारी करना न्यायोचित था।

      यह फैसला भविष्य में ट्रेडमार्क विवादों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल (precedent) के रूप में देखा जाएगा और यह संदेश देगा कि प्रसिद्ध ब्रांड के नाम पर ‘फ्री-राइडिंग’ करने की किसी को अनुमति नहीं दी जाएगी।


संपादकीय एवं कानूनी समीक्षा

एडवोकेट पी.के. निगम (Adv. P.K. Nigam)

वरिष्ठ विधिक शोधकर्ता एवं मुख्य कानूनी संपादक • Indian Law Notes

भारतीय कानून (BNS, BNSS, BSA, IPC, CrPC), सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णयों का सरल हिंदी में प्रामाणिक विधिक विश्लेषण।