“Mediation Can’t Be Seen As A Threat To Judiciary: CJI Surya Kant ji ” Mediation को न्यायपालिका के लिए खतरा नहीं माना जा सकता: CJI सूर्यकांत ji
वर्तमान भारतीय न्याय व्यवस्था ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ पारंपरिक न्यायिक प्रक्रियाएँ, बढ़ते मुकदमों के बोझ और समय की लंबी खींचतान के बीच, नई राहें तलाश रही हैं। इसी संदर्भ में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत का यह कथन अत्यंत महत्वपूर्ण है कि “Mediation can’t be seen as a threat to the judiciary; rather, it strengthens the justice delivery system.”
यह वक्तव्य न केवल न्यायपालिका की दूरदर्शी सोच को प्रकट करता है, बल्कि भारत में वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) की बढ़ती प्रासंगिकता पर भी व्यापक विमर्श खोलता है।
1. प्रस्तावना: न्यायिक प्रणाली के समक्ष चुनौतियाँ
भारतीय न्यायपालिका आज जिस विशाल pendency से जूझ रही है, वह किसी से छिपी नहीं है। लाखों मुकदमे वर्षों तक लंबित रहते हैं, पक्षकार मानसिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से थक जाते हैं, और न्याय में विलंब न्याय के मूल्य को कम कर देता है।
इसी परिप्रेक्ष्य में ADR—विशेषकर mediation—एक “pressure-balancing mechanism” के रूप में उभर रहा है। CJI सूर्यकांत के अनुसार, mediation को कभी भी “parallel justice system” नहीं समझना चाहिए, बल्कि यह एक सहायक प्रणाली है जो न्यायपालिका का बोझ कम करती है और विवादों का amicable समाधान सुनिश्चित करती है।
2. Mediation का संवैधानिक एवं नीतिगत आधार
CJI सूर्यकांत ji विशेष रूप से रेखांकित करते हैं कि mediation मात्र एक सामाजिक अभ्यास नहीं, बल्कि संवैधानिक मूल्यों से प्रेरित न्याय प्रक्रिया है। संविधान के अनुच्छेद 39A में गरीबों को सस्ती और शीघ्र न्याय उपलब्ध कराने का निर्देश है। Mediation इसी उद्देश्य को साकार करने की दिशा में उपयुक्त साधन है।
भारत सरकार ने Mediation Act, 2023 लागू कर इस क्षेत्र को संस्थागत रूप दिया। यह कानून न केवल mediation को औपचारिक मान्यता देता है बल्कि:
- Pre-litigation mediation को बढ़ावा देता है,
- Mediated settlement agreements को enforceable बनाता है,
- Community mediation की अवधारणा प्रस्तुत करता है,
- और सरकारी विवादों में भी mediation का मार्ग खोलता है।
CJI सूर्यकांत ji का मत है कि यह कानून “judicial reforms” का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जो आने वाले वर्षों में न्याय वितरण की रफ्तार को निश्चित रूप से प्रभावित करेगा।
3. न्यायपालिका और Mediation: सहयोग का संबंध, प्रतिस्पर्धा नहीं
CJI ने जोर देकर कहा कि mediation को न्यायपालिका का विकल्प नहीं बल्कि पूरक (complementary) के रूप में देखा जाना चाहिए।
उनके अनुसार, न्यायपालिका का उद्देश्य केवल निर्णय (judgment) देना नहीं, बल्कि विवाद का समाधान (dispute resolution) करना है। यदि कोई विवाद बातचीत और समझौते से सुलझ सकता है, तो यह पक्षकारों के लिए सबसे संतोषजनक और समय-बचत करने वाला तरीका है।
वे तीन प्रमुख कारण गिनाते हैं कि क्यों mediation को खतरा नहीं मानना चाहिए:
1. Mediation न्यायिक हस्तक्षेप को कम नहीं करती, बल्कि सुविधाजनक बनाती है
मुकदमे की शुरुआत से पहले mediation कई विवादों को समाप्त कर देती है, जिससे अदालतें गंभीर और जटिल मामलों पर ध्यान केंद्रित कर पाती हैं।
2. Mediation अदालतों को विकल्प नहीं बल्कि सहयोग देती है
जिन मामलों में समाधान नहीं होता, वे पुनः अदालत के समक्ष आते हैं, जिससे न्यायपालिका की भूमिका समाप्त नहीं होती।
3. Mediation litigants की autonomy को सुदृढ़ करती है
Mediation में समाधान “court-imposed” नहीं बल्कि “party-accepted” होता है।
यह लोकतांत्रिक मूल्य—स्वतंत्रता, सम्मान, सहभागिता—को बढ़ावा देता है।
4. CJI सूर्यकांत ji की दृष्टि: न्यायिक संस्कृति का मानवीकरण
CJI का यह कथन विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि mediation न्यायिक संस्कृति में मानवीकरण (humanisation) लाता है।
उन्होंने कहा कि अदालत में निर्णय कानूनी सिद्धांतों पर आधारित होता है, परंतु mediation में समाधान मानवीय संबंधों, भावनाओं, सामाजिक संदर्भों और व्यावहारिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया जाता है।
उनके अनुसार:
- पारिवारिक विवाद
- संपत्ति के झगड़े
- व्यापारिक मतभेद
- पड़ोसी विवाद
- रोजगार संबंधी विवाद
इन सभी में mediation शत्रुता की जगह समझदारी और समझौते की भावना पैदा करती है।
5. न्यायिक आंकड़े और Mediation की सफलता
CJI सूर्यकांत ji ने कई मौकों पर बताया कि जहाँ भी mediation को संस्थागत रूप दिया गया है, वहाँ सफलता दर 50% से अधिक रही है।
दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद और अहमदाबाद जैसे महानगरों में लाखों विवाद mediation से समाप्त हुए हैं।
कुछ प्रमुख आँकड़े:
- दिल्ली में 2005–2024 तक 3 लाख से अधिक मामलों का समाधान mediation से हुआ।
- पारिवारिक मामलों में settlement rate 60–65% के बीच है।
- Commercial disputes में settlement rate 40–50% है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहनीय है।
CJI के अनुसार, यह आँकड़े दर्शाते हैं कि अगर Institutional Mediation को और मजबूत किया जाए तो अदालतों में लंबित मामलों का बड़ा हिस्सा कम किया जा सकता है।
6. वकीलों का योगदान और Mediation का भविष्य
कई बार Mediation को लेकर यह आशंका व्यक्त की जाती है कि यह वकीलों की भूमिका को कम कर देगा। CJI सूर्यकांत ने इस भ्रम को पूरी तरह दूर किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा:
“A lawyer’s role does not diminish in mediation; it becomes more specialised.”
वकील mediation में:
- सलाहकार (legal advisor),
- रणनीतिकार (strategist),
- वार्ताकार (negotiator),
- और संरक्षणकर्ता (protector of client’s interest)
की भूमिका निभाते हैं।
यह एक नई व्यावसायिक क्षमता (professional skill) है, जिससे वकीलों के लिए नए अवसर खुलते हैं।
7. Mediation और न्यायिक सुधार: व्यापक दृष्टिकोण
CJI सूर्यकांत ने mediation को Third Pillar of Justice Delivery बताते हुए कहा कि भविष्य में न्यायिक सुधारों के तीन प्रमुख स्तंभ होंगे:
- Courts – औपचारिक न्याय
- Arbitration – विशेषज्ञ न्याय
- Mediation – संवाद आधारित न्याय
उनके अनुसार, एक विकसित न्यायिक व्यवस्था वही है जो:
- Tiered dispute resolution system अपनाए
- वैकल्पिक साधनों को बढ़ावा दे
- न्यायिक बोझ कम करे
- litigants की संतुष्टि में वृद्धि करे
भारत में न्यायिक pendency की गंभीरता को देखते हुए mediation एक राष्ट्रीय आवश्यकता बन चुकी है।
8. CJI की चेतावनी: Mediation को “Soft Justice” न समझें
CJI सूर्यकांत ने यह भी कहा कि mediation को कभी भी “soft justice” या “compromise justice” नहीं समझना चाहिए।
मediation एक voluntary, structured, और strategically guided प्रक्रिया है, जिसकी सफलता mediator की निष्पक्षता, कौशल और समझ पर निर्भर करती है।
वे कहते हैं:
- Mediation में समझौता force से नहीं,
- बल्कि informed consent से होता है।
- Settlement agreement कानूनी रूप से binding और enforceable होता है।
- Mediation litigants के समय, धन, प्रतिष्ठा और संबंधों की रक्षा करता है।
9. Mediation Courts, Judges और Society को कैसे लाभ देता है?
CJI सूर्यकांत के अनुसार mediation के लाभ बहुआयामी हैं:
1. अदालतों का बोझ कम होता है
महत्वपूर्ण मामलों पर न्यायाधीश अधिक समय दे सकते हैं।
2. समाज में विवाद-निवारण की संस्कृति विकसित होती है
लोग मुकदमे करने की बजाय संवाद का रास्ता चुनते हैं।
3. न्याय में मानवीय दृष्टिकोण आता है
औपचारिक कानूनी लकीरों के बीच फँसे बिना, व्यवहारिक समाधान निकलते हैं।
4. Litigants के बीच स्थायी शांति बनती है
अदालती निर्णय के विपरीत, mediation समाधान दोनों पक्षों को संतुष्ट करता है।
5. आर्थिक वृद्धि और व्यापारिक स्थिरता बढ़ती है
Commercial mediation व्यापार जगत को अनिश्चित मुकदमों से बचाती है।
10. Mediation Act, 2023 और CJI की स्वीकार्यता
CJI सूर्यकांत ने इस अधिनियम को “landmark legislation” कहा है। उन्होंने बताया कि यह कानून भारत को विश्वस्तरीय mediation hub बनाने की दिशा में पहला कदम है।
कुछ प्रमुख विशेषताएँ:
- Pre-litigation mediation
- संधि-समझौते की वैधता
- Online mediation
- Community mediation
- Mediators’ accreditation
- Time-bound mediation
CJI के अनुसार, यह अधिनियम भविष्य के न्यायिक ढाँचे को पूरी तरह बदलने में सक्षम है।
11. निष्कर्ष: न्याय व्यवस्था का भविष्य संवाद में है, मुकाबले में नहीं
CJI सूर्यकांत ji का यह कथन—“Mediation is not a threat to the judiciary, it is a gift to the judiciary.”—भारत की न्यायिक सोच में गहरे परिवर्तन का संकेत है।
आज जब न्यायपालिका लाखों लंबित मामलों से जूझ रही है, mediation न्यायिक व्यवस्था का “balancing wheel” बनकर उभर रहा है।
मediation:
- न्याय का लोकतंत्रीकरण करता है,
- मुकदमों की संस्कृति को घटाता है,
- सामाजिक सौहार्द बढ़ाता है,
- आर्थिक गतिविधियों को सुचारु बनाता है,
- और सबसे महत्वपूर्ण—न्यायपालिका की प्रभावशीलता को मजबूत करता है।
निस्संदेह, भविष्य का भारत एक ऐसी न्यायिक प्रणाली की ओर बढ़ रहा है जहाँ अदालत और mediation एक-दूसरे के सहयोगी होंगे, प्रतिस्पर्धी नहीं।
एडवोकेट पी.के. निगम (Adv. P.K. Nigam)
वरिष्ठ विधिक शोधकर्ता एवं मुख्य कानूनी संपादक • Indian Law Notes
भारतीय कानून (BNS, BNSS, BSA, IPC, CrPC), सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णयों का सरल हिंदी में प्रामाणिक विधिक विश्लेषण।
यह आलेख केवल शैक्षणिक, विधिक जागरूकता और अध्ययन के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। इसे आधिकारिक कानूनी सलाह न माना जाए। किसी भी वास्तविक मामले में संबंधित न्यायालय या विशेषज्ञ अधिवक्ता से परामर्श लें।