न्यायपालिका की डिजिटल क्रांति की ओर एक बड़ा कदम: CJI बी. आर. गवई ने ई-फाइलिंग पोर्टल के नए संस्करण की शुरुआत की
भारत की न्यायिक व्यवस्था दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे जटिल न्यायिक प्रणालियों में से एक है। भारी लंबित मामलों, बढ़ते मुकदमों और तकनीकी सुधार की आवश्यकता ने लंबे समय से यह संकेत दिया है कि न्यायपालिका के सुचारू संचालन के लिए डिजिटल परिवर्तन अनिवार्य है। इसी दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बी. आर. गवई ने सुप्रीम कोर्ट में ई-फाइलिंग पोर्टल के नए और उन्नत संस्करण का शुभारंभ किया है। यह पहल न केवल न्यायिक प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी, तेज और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाएगी, बल्कि भारत को तकनीकी आधार पर वैश्विक न्यायिक मानकों की श्रेणी में भी स्थापित करेगी।
1. नए ई-फाइलिंग पोर्टल का महत्व: न्यायिक प्रशासन में तकनीक का सशक्त उपयोग
भारत में ई-फाइलिंग की शुरुआत कई वर्ष पहले हुई थी, परंतु पहले के संस्करणों में तकनीकी सीमाएँ, जटिल प्रक्रियाएँ और उपयोगकर्ताओं—विशेषकर अधिवक्ताओं—को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
नए संस्करण में यूज़र इंटरफेस, डेटा प्रबंधन, फ़ाइल अपलोड, केस ट्रैकिंग, पेमेंट सिस्टम, इंटीग्रेटेड सर्विसेज, AI-आधारित सुझाव और अन्य तकनीकी सुधार जोड़े गए हैं।
CJI गवई ने उद्घाटन समारोह में कहा कि यह पोर्टल “न्याय तक पहुंच को आसान बनाने, कार्यक्षमता बढ़ाने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।”
2. न्यायपालिका में डिजिटलीकरण क्यों ज़रूरी था?
भारत में 4 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, ट्रायल कोर्ट—सभी स्तरों पर केस संख्या तेजी से बढ़ रही है। दूसरे देशों की तुलना में भारत के पास न्यायाधीशों की संख्या कम है, जिसके कारण लोड और अधिक बढ़ जाता है।
इन परिस्थितियों में:
- भौतिक फाइलों पर निर्भरता
- कोर्ट परिसर तक यात्रा की आवश्यकता
- दस्तावेजों की सत्यापन प्रक्रिया
- समय और लागत की बर्बादी
—ये समस्याएँ व्यवस्था को और बोझिल बना रही थीं।
COVID-19 महामारी के बाद वर्चुअल कोर्ट, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और ई-फाइलिंग के उपयोग में भारी वृद्धि हुई, जिसने साबित किया कि तकनीक न्यायिक प्रणाली को अधिक प्रभावी बना सकती है।
नया पोर्टल इसी प्रक्रिया का उन्नत और भविष्यवादी रूप है।
3. ई-फाइलिंग पोर्टल के नए संस्करण की प्रमुख विशेषताएँ
(a) अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल इंटरफ़ेस
पूरे पोर्टल को पुनः डिजाइन किया गया है ताकि वकील, आम नागरिक, सरकारी अधिकारी, संस्थाएं—सभी आसानी से इसका उपयोग कर सकें।
इंटरफ़ेस अब:
- सरल
- मोबाइल-फ्रेंडली
- बहुभाषीय
- चरणबद्ध निर्देशों वाला
बनाया गया है।
(b) AI-आधारित दस्तावेज़ फ़ॉर्मेटिंग और सुझाव
नया सिस्टम AI की मदद से यह सुझाव देगा कि:
- कौन से दस्तावेज़ अनिवार्य हैं
- कौन सी कमी है
- याचिका किस श्रेणी में आएगी
- केस की फ़ाइलिंग में कोई त्रुटि तो नहीं
इससे फाइलिंग अस्वीकृति (defect) में कमी आएगी।
(c) वन-स्टॉप डिजिटल ज्यूडिशियल समाधान
ई-फाइलिंग, ई-पेमेंट, ई-सर्विस, केस ट्रैकिंग, जजमेंट डाउनलोड—सब एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर उपलब्ध होंगे।
मल्टी-स्टेप प्रक्रिया अब एकीकृत हो गई है।
(d) ई-पेमेंट इंटीग्रेशन
लंबे समय से वकील और याचिकाकर्ता कोर्ट फीस, दस्तावेज शुल्क, सेवा शुल्क आदि के भुगतान में बैंक चालन और लंबी कतारों से जूझते थे।
अब:
- UPI
- नेट बैंकिंग
- कार्ड पेमेंट
के माध्यम से सीधा ऑनलाइन भुगतान संभव है।
(e) केस ट्रैकिंग फीचर में बड़ा सुधार
नई प्रणाली में:
- वास्तविक समय की अपडेट
- नोटिस जनरेशन
- स्टेटस ट्रैकिंग
- अलर्ट और नोटिफिकेशन
जैसी सुविधाएँ जोड़ी गई हैं।
(f) उन्नत सुरक्षा और एन्क्रिप्शन
न्यायिक दस्तावेज अत्यंत संवेदनशील होते हैं।
नए पोर्टल में:
- एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन
- मल्टी-लेवल सुरक्षा
- डेटा लॉस प्रोटेक्शन
- बैकअप सिस्टम
जोड़े गए हैं।
(g) ई-सर्विस ऑफ नोटिसेज़
अब नोटिस की सेवा डिजिटल माध्यम से होगी, जिससे कार्यवाही तेजी से आगे बढ़ सकेगी।
यह प्रक्रिया पारदर्शिता को भी बढ़ाती है क्योंकि नोटिस का समय, तिथि और डिलीवरी की स्थिति ऑनलाइन दिखाई देगी।
4. नए पोर्टल से वकील समुदाय को मिलने वाला लाभ
भारत की न्यायपालिका का वास्तविक आधार वकील ही हैं। डिजिटल सिस्टम तभी सफल होगा जब यह अधिवक्ताओं के लिए सरल, तेज और अनुकूल बने।
नया पोर्टल:
- वकीलों के समय की बचत करेगा
- मामलों की तैयारी आसान बनाएगा
- दस्तावेजों की डिजिटल लाइब्रेरी तैयार करने में मदद करेगा
- क्लाइंट के साथ केस अपडेट साझा करना आसान होगा
- छोटे शहरों एवं कस्बों के वकीलों को सुलभ न्याय में मदद देगा
विशेष रूप से युवा वकीलों के लिए यह तकनीकी बदलाव करियर अवसर बढ़ाएगा।
5. Litigants के लिए लाभ — न्याय तक पहुँच और भी आसान
आम नागरिकों को अब:
- कोर्ट जाने की जरूरत कम पड़ेगी
- वकील के साथ दूर से काम हो सकेगा
- दस्तावेजों को अपलोड करना सरल होगा
- केस की स्थिति कभी भी, कहीं भी पता चल सकेगी
- खर्च कम होगा
ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए यह डिजिटल न्याय प्रणाली अत्यंत लाभकारी साबित होगी।
6. न्यायपालिका पर भार कम होगा और पारदर्शिता बढ़ेगी
नया सिस्टम न्यायिक व्यवस्था को:
- पेपरलेस
- अधिक पारदर्शी
- कम समय लेने वाला
- सस्ता
- पर्यावरण-अनुकूल
बनाएगा।
कागज़ों की संख्या, फाइलों की आवाजाही, स्टाफ पर दबाव—सब कम होंगे।
जजों को भी मुकदमों की डिजिटल फाइलें पढ़ने में आसानी होगी।
7. न्यायिक सुधारों के व्यापक लक्ष्य के साथ तालमेल
सुप्रीम कोर्ट पहले ही:
- ई-कोर्ट्स प्रोजेक्ट
- नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड (NJDG)
- वर्चुअल कोर्ट
- लाइव स्ट्रीमिंग
- AI-आधारित ट्रांसक्रिप्शन (SUPACE)
जैसी आधुनिक प्रणालियों की दिशा में काम कर रहा है।
CJI गवई का यह कदम उसी लंबी प्रक्रिया का अगला महत्वपूर्ण चरण है।
8. CJI गवई की टिप्पणी और न्यायपालिका की नई दिशा
उद्घाटन समारोह में CJI गवई ने कहा:
“प्रौद्योगिकी न्यायपालिका की रीढ़ बनने जा रही है।
हमें ऐसे समाधान चाहिए जो न केवल वकीलों और न्यायाधीशों को बल्कि हर नागरिक को न्याय तक आसान पहुँच उपलब्ध कराएँ। नया ई-फाइलिंग पोर्टल उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।”
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में:
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
- मशीन लर्निंग
- ब्लॉकचेन आधारित रिकॉर्ड सिस्टम
भी न्यायपालिका में शामिल किए जा सकते हैं।
9. राज्य और जिला न्यायालयों में भी लागू होगा नया मॉडल
सुप्रीम कोर्ट के नए मॉडल को देखते हुए हाई कोर्ट और जिला न्यायालय भी अपना ई-फाइलिंग सिस्टम अपग्रेड करेंगे।
यह डिजिटल एकरूपता न्यायिक प्रणाली को मजबूत बनाएगी।
10. चुनौतियाँ अभी भी बाकी हैं: डिजिटल विभाजन और प्रशिक्षण
हालाँकि यह सुधार ऐतिहासिक है, लेकिन कुछ चुनौतियाँ सामने हैं:
- छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी
- अधिवक्ताओं एवं कर्मचारियों के लिए तकनीकी प्रशिक्षण
- साइबर सुरक्षा जोखिम
- संसाधनों की कमी
- डिजिटल विभाजन
इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सरकार और न्यायपालिका मिलकर समाधान तैयार कर रहे हैं।
11. भारत की न्यायपालिका एक नए युग में प्रवेश कर चुकी है
ई-फाइलिंग पोर्टल का नया संस्करण न केवल तकनीकी रूपांतरण है, बल्कि यह न्यायिक दर्शन में एक गहन बदलाव का प्रतीक है।
अब अदालतें सिर्फ “भवन” नहीं रहेंगी, बल्कि एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म बन चुकी हैं, जो देश के किसी भी कोने से सुलभ हैं।
निष्कर्ष: डिजिटल न्याय की ओर निर्णायक कदम
CJI बी. आर. गवई द्वारा नया ई-फाइलिंग पोर्टल लॉन्च करना भारतीय न्यायपालिका की भविष्य की दिशा तय करता है।
यह पहल:
- न्यायिक कार्यक्षमता बढ़ाएगी
- जनता की पहुँच आसान बनाएगी
- वकीलों को सक्षम बनाएगी
- अदालतों के बोझ को कम करेगी
- पारदर्शिता को बढ़ाएगी
भारत अब उस दिशा में आगे बढ़ चुका है जहाँ न्याय तेज़, सुलभ, तकनीक-आधारित और समय-बचत होगा।