सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्णय: 25 वर्ष के अनुभव की अनिवार्यता के बिना चार्टर्ड अकाउंटेंट भी बन सकेंगे ट्रिब्यूनल में तकनीकी सदस्य
— न्यायिक स्वतंत्रता, ट्रिब्यूनल सुधार और प्रोफेशनल विशेषज्ञता पर सर्वोच्च न्यायालय की ऐतिहासिक व्याख्या का विस्तृत विश्लेषण
भारत में ट्रिब्यूनलों की संरचना और नियुक्तियों से जुड़ा मुद्दा लंबे समय से विवादों और न्यायिक समीक्षा का विषय रहा है। विशेष रूप से, तकनीकी सदस्यों (Technical Members) की योग्यता, अनुभव और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार और न्यायपालिका के बीच कई बार मतभेद उत्पन्न हुए हैं। ऐसे ही एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने हाल में एक अत्यंत निर्णायक फैसला सुनाया है, जिसके तहत यह स्पष्ट किया गया है कि चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) ट्रिब्यूनल में टेक्निकल मेंबर बनाए जा सकते हैं, और इसके लिए 25 वर्ष के अनुभव की अनिवार्यता आवश्यक नहीं है।
यह निर्णय केवल एक योग्यता-आधारित मुद्दा नहीं है, बल्कि यह ट्रिब्यूनल कानून, न्यायिक स्वतंत्रता, विशेषज्ञता के महत्व और ट्रिब्यूनल सुधारों की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम भी है। नीचे इस निर्णय का विस्तृत, गहन और व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत है।
1. विवाद की पृष्ठभूमि : 25 वर्ष के अनुभव की शर्त क्यों थी?
2017 और 2021 के Tribunal Reforms Ordinance/Act के बाद केंद्र सरकार ने कई ट्रिब्यूनलों में तकनीकी सदस्यों के लिए न्यूनतम अनुभव की कठोर शर्तें लागू कर दी थीं, जिनमें से एक थी—
“कम से कम 25 वर्षों का व्यावसायिक अनुभव।”
यह शर्त मुख्य रूप से—
- चार्टर्ड अकाउंटेंट,
- कंपनी सेक्रेटरी,
- कॉस्ट अकाउंटेंट,
- तथा अन्य तकनीकी विशेषज्ञों पर लागू होती थी।
कई विशेषज्ञ संगठनों ने इस शर्त को मनमाना, गैर-व्यावहारिक, और अत्यधिक कठोर बताते हुए चुनौती दी, क्योंकि—
- अधिकांश विशेषज्ञ 25 वर्ष के अनुभव तक पहुँचते-पहुँचते पेशेवर रूप से निष्क्रिय हो जाते हैं,
- इससे युवा और सक्षम विशेषज्ञों की भागीदारी समाप्त हो जाती है,
- ट्रिब्यूनलों में विषय-विशेषज्ञों की कमी बढ़ रही थी।
इसी संदर्भ में मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा।
2. सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मुख्य प्रश्न
सुप्रीम कोर्ट ने इस विवाद में दो प्रमुख कानूनी प्रश्न निर्धारित किए—
A. क्या ट्रिब्यूनल में तकनीकी सदस्य बनने के लिए 25 वर्ष अनुभव की अनिवार्यता तर्कसंगत है?
B. क्या चार्टर्ड अकाउंटेंट जैसे पेशेवर कम अनुभव के साथ भी तकनीकी सदस्य के रूप में पर्याप्त रूप से सक्षम हैं?
3. सुप्रीम कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियाँ
सुप्रीम कोर्ट ने विस्तृत विश्लेषण में कहा कि—
1. 25 वर्ष अनुभव की शर्त न्यायसंगत, युक्तिसंगत या आवश्यक नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि—
- क्या किसी व्यक्ति में विशेषज्ञता है या नहीं, यह केवल वर्षों की संख्या से नहीं मापा जा सकता।
- कई CA या CS 10–15 वर्षों में ही अत्यंत उच्च स्तर की विशेषज्ञता प्राप्त कर लेते हैं।
- “कुशलता” (Competence) और “अनुभव का वर्ष” (Years of Experience) दो अलग चीजें हैं।
2. ट्रिब्यूनल का उद्देश्य न्यायालयों के समानांतर तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध कराना है।
इसलिए अगर—
- कर,
- कॉर्पोरेट कानून,
- दिवालियेपन,
- वित्तीय मामलों,
- लागत लेखांकन,
में किसी पेशेवर ने पर्याप्त व्यावहारिक ज्ञान अर्जित कर लिया है, तो उसे 25 वर्ष अनुभव न होने के कारण बाहर करना अनुचित है।
3. अत्यधिक अनुभव की शर्त प्रतिभाशाली विशेषज्ञों को बाहर कर देती है।
कोर्ट ने टिप्पणी की—
“एक पेशेवर ट्रिब्यूनल में जाने के सर्वाधिक योग्य समय (mid-career) पर अनुभव की शर्त उसे अयोग्य घोषित कर देती है।”
4. संविधानिक विश्लेषण: अनुच्छेद 14, 50 और न्यायिक स्वतंत्रता
सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को केवल प्रशासनिक विवेक का मामला नहीं माना, बल्कि इसे संविधान के सिद्धांतों से जोड़ा।
A. अनुच्छेद 14 — समानता का अधिकार
25 वर्ष अनुभव की शर्त कई योग्य विशेषज्ञों को अनुचित रूप से अलग श्रेणी में डाल देती है—यह arbitrary classification है।
B. अनुच्छेद 50 — न्यायपालिका की स्वतंत्रता
ट्रिब्यूनलों की कार्यप्रणाली और संरचना न्यायिक स्वतंत्रता से जुड़ी है।
यदि सरकार अत्यधिक कठोर शर्तें लगाएगी, तो—
- नियुक्तियों पर अनावश्यक नियंत्रण,
- विशेषज्ञों की कमी,
- तथा न्यायिक कार्य में बाधा उत्पन्न होगी।
C. Doctrine of Proportionality
कोर्ट ने कहा—
“25 वर्ष का अनुभव अनुचित रूप से अत्यधिक (disproportionate) है, और ट्रिब्यूनल की दक्षता के विपरीत परिणाम देता है।”
5. चार्टर्ड अकाउंटेंट की भूमिका पर निर्णायक टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि—
- CA केवल ऑडिट करने वाले पेशेवर नहीं हैं,
- बल्कि वे कर कानून, वित्तीय प्रक्रिया, कंपनी कानून, IBC, SEBI कानून और कॉर्पोरेट मामलों के विशेषज्ञ होते हैं।
कोर्ट ने कहा—
“एक योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट ट्रिब्यूनल में तकनीकी सदस्य के लिए सबसे उपयुक्त पेशेवर हो सकता है।”
6. किस प्रकार यह निर्णय ट्रिब्यूनलों को मजबूत करेगा
यह निर्णय उन सभी ट्रिब्यूनलों पर प्रभाव डालेगा जहाँ तकनीकी सदस्यों की आवश्यकता होती है, जैसे—
- NCLT
- NCLAT
- ITAT
- CESTAT
- SAT
- Debt Recovery Tribunals
- और अन्य विशेष ट्रिब्यूनल
विशेषज्ञों की कमी दूर होगी
लंबे समय से सरकार बार-बार कहती रही थी कि “योग्य उम्मीदवार नहीं मिल रहे।”
इस निर्णय के बाद स्थिति सुधरेगी।
युवा और सक्षम CA अब शामिल हो सकेंगे
10–15 वर्षों का अनुभव रखने वाले कई सक्षम पेशेवर अब पात्र होंगे।
न्यायिक गति बढ़ेगी
ट्रिब्यूनलों में तकनीकी सदस्यों की कमी के कारण वर्षों तक मामलों का निपटारा लंबित रहता था।
अब यह स्थिति सुधरेगी।
7. सुप्रीम कोर्ट का संतुलित दृष्टिकोण
कोर्ट ने यह भी कहा कि—
- अनुभव बिल्कुल कम नहीं होना चाहिए,
- लेकिन 25 वर्ष की शर्त वैज्ञानिक, तार्किक या व्यावहारिक नहीं है।
इसलिए कोर्ट ने सलाह दी कि—
- योग्यता का निर्धारण flexible criteria पर होना चाहिए,
- जैसे कि—
- विशेषज्ञता का स्तर
- प्रैक्टिस की प्रकृति
- किए गए कार्यों की गुणवत्ता
- जटिल मामलों का अनुभव
8. निर्णय का कानूनी महत्व: Precedent Value
यह निर्णय भविष्य के लिए binding precedent है और—
A. ट्रिब्यूनल सुधार कानूनों पर न्यायिक निगरानी को मजबूत करता है।
B. न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच संतुलन स्थापित करता है।
C. ट्रिब्यूनल नियुक्तियों में पारदर्शिता बढ़ाता है।
9. आलोचनात्मक दृष्टिकोण: संभावित चुनौतियाँ
हालाँकि निर्णय व्यापक स्वागत का पात्र है, परंतु कुछ विशेषज्ञ यह भी कह रहे हैं कि—
- अनुभव को बहुत कम करने से कभी-कभी विशेषज्ञता का स्तर कमजोर हो सकता है।
- ट्रिब्यूनल में भी अर्ध-न्यायिक कार्य होता है, जिसके लिए परिपक्वता आवश्यक है।
परंतु सुप्रीम कोर्ट ने इन चिंताओं को “सामान्यीकृत धारणाएँ” बताते हुए अस्वीकार किया।
10. सरकार की अधिकारिता पर न्यायालय का स्पष्ट संदेश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा—
“सरकार को नियुक्ति के लिए उचित शर्तें बनाने का अधिकार है, लेकिन वे शर्तें न्यायसंगत, तर्कसंगत और संविधान के अनुरूप होनी चाहिए।”
इस प्रकार कोर्ट ने कार्यपालिका और न्यायपालिका दोनों की भूमिका को संतुलित किया है।