“Airports Authority of India बनाम Commissioner of Service Tax (Supreme Court, 2025): निर्यात कार्गो पर सेवा कर देयता पर सर्वोच्च न्यायालय का महत्वपूर्ण निर्णय”
प्रस्तावना
भारत के कराधान तंत्र में सेवा कर (Service Tax) की अवधारणा, वित्त अधिनियम, 1994 (Finance Act, 1994) के माध्यम से स्थापित की गई थी, जिसका उद्देश्य सेवाओं पर भी अप्रत्यक्ष कर के रूप में राजस्व एकत्र करना था। हालांकि, समय-समय पर इस कर की परिभाषा, सीमा और लागू क्षेत्र को लेकर विवाद उत्पन्न होते रहे हैं। ऐसा ही एक महत्वपूर्ण विवाद Airports Authority of India (AAI) और Commissioner of Service Tax के बीच उभरा, जिसमें यह प्रश्न उठाया गया कि — क्या निर्यात कार्गो (export cargo) से संबंधित सेवाएँ ‘कर योग्य सेवाओं’ (taxable services) के दायरे में आती हैं या नहीं?
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने Airports Authority of India (AAI) की अपील को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि निर्यात कार्गो के हैंडलिंग, स्टोरेज और संबंधित कार्यों पर सेवा कर देय है, क्योंकि यह Finance Act, 1994 की परिभाषा के अंतर्गत “taxable service” की श्रेणी में आता है।
मामले की पृष्ठभूमि
Airports Authority of India (AAI) भारत सरकार का एक वैधानिक निकाय है, जिसे Airports Authority of India Act, 1994 के तहत स्थापित किया गया है। इसका प्रमुख कार्य भारत के हवाई अड्डों का संचालन, रख-रखाव और प्रबंधन करना है। इसके अतिरिक्त, यह संस्था कार्गो संचालन, हवाई अड्डा सेवाएँ, और ग्राउंड हैंडलिंग सेवाएँ भी प्रदान करती है।
वर्षों से, AAI निर्यात कार्गो (export cargo) की हैंडलिंग, स्टोरेज और प्रोसेसिंग के लिए विभिन्न कंपनियों से शुल्क वसूल करता रहा है। Commissioner of Service Tax ने यह तर्क दिया कि ये सेवाएँ Finance Act, 1994 की धारा 65(105)(zzm) के तहत ‘taxable services’ की श्रेणी में आती हैं, और इस पर सेवा कर लगाया जा सकता है।
AAI ने इस कराधान को चुनौती दी, यह कहते हुए कि —
“निर्यात कार्गो से संबंधित सेवाएँ भारतीय सीमा से बाहर होने वाले व्यापार का हिस्सा हैं, और इस पर कर लगाना अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के सिद्धांतों के विपरीत है।”
मामले के प्रमुख मुद्दे (Key Issues)
- क्या निर्यात कार्गो (export cargo) के हैंडलिंग और स्टोरेज सेवाएँ ‘taxable services’ की परिभाषा में आती हैं?
- क्या सेवा कर (service tax) का लागू होना अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और निर्यात नीति के उद्देश्यों के विपरीत है?
- क्या Airports Authority of India एक “commercial service provider” के रूप में मानी जा सकती है?
- क्या निर्यात से जुड़ी सेवाओं पर कर लगाना संविधान के अनुच्छेद 286 (जो राज्यों की सीमाओं से बाहर के व्यापार पर कर निषेधित करता है) का उल्लंघन है?
Airports Authority of India के तर्क
- निर्यात सेवाओं पर कर नहीं लग सकता:
AAI का प्रमुख तर्क यह था कि निर्यात कार्गो की हैंडलिंग सेवाएँ अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का हिस्सा हैं। इन्हें ‘export of services’ माना जाना चाहिए, जिस पर सेवा कर से छूट मिलती है। - गैर-व्यावसायिक चरित्र (Non-commercial nature):
AAI ने कहा कि वह एक सरकारी निकाय है, जो सार्वजनिक सेवा के लिए कार्य करता है, न कि लाभ कमाने के लिए। अतः इस पर “commercial service provider” के रूप में कर नहीं लगाया जाना चाहिए। - Rule of Exemption:
Export of Services Rules, 2005 के तहत, निर्यात से संबंधित सेवाओं पर कर से छूट का प्रावधान है। इसलिए, AAI को भी इस नियम के तहत छूट मिलनी चाहिए। - दोहरा कराधान (Double taxation):
AAI ने यह भी तर्क दिया कि कार्गो पर पहले से कस्टम ड्यूटी और अन्य शुल्क लगाए जाते हैं, और सेवा कर लगाना दोहरे कराधान के समान होगा।
Commissioner of Service Tax के तर्क
- Finance Act, 1994 की स्पष्ट परिभाषा:
सेवा कर अधिनियम की धारा 65(105)(zzm) के अनुसार, “airport services” में हवाई अड्डे पर दी जाने वाली सभी सेवाएँ आती हैं — जिनमें कार्गो हैंडलिंग, वेयरहाउसिंग और अन्य लॉजिस्टिक सेवाएँ शामिल हैं। इसलिए AAI की सेवाएँ पूरी तरह कर योग्य हैं। - व्यावसायिक लेन-देन:
AAI निर्यात कार्गो के लिए सेवाएँ प्रदान कर शुल्क वसूलती है। यह एक स्पष्ट “commercial transaction” है, चाहे संस्था सरकारी हो या निजी। - निर्यात प्रक्रिया का हिस्सा नहीं:
सेवा कर विभाग ने कहा कि निर्यात कार्गो की हैंडलिंग सेवा भारत की भूमि पर प्रदान की जाती है। यह “export” नहीं बल्कि “pre-export handling” सेवा है, जो भारत में होती है और इसलिए इस पर कर लगाया जा सकता है। - छूट नियमों का सीमित उपयोग:
Export of Services Rules केवल उन सेवाओं पर लागू होती हैं जो भारत से बाहर प्रदान की जाती हैं या जिनका उपभोग विदेश में होता है। यहाँ सेवाओं का उपभोग भारत में ही हो रहा है।
न्यायालय में कार्यवाही
इस विवाद को लेकर मामला पहले CESTAT (Customs, Excise and Service Tax Appellate Tribunal) के समक्ष आया, जिसने Commissioner of Service Tax के पक्ष में निर्णय दिया। इसके पश्चात Delhi High Court ने भी AAI की याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद AAI ने Supreme Court of India में अपील दायर की।
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय (Judgment)
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने विस्तृत सुनवाई के बाद AAI की अपील को खारिज करते हुए कहा:
“The handling, storage, and facilitation of export cargo by the Airports Authority of India constitute taxable services under Section 65(105)(zzm) of the Finance Act, 1994. These services are rendered within India and are not exempt as ‘export of services’.”
मुख्य आधार (Key Grounds):
- स्थान का निर्धारण (Place of Provision):
न्यायालय ने कहा कि ये सेवाएँ पूरी तरह भारत में प्रदान की जाती हैं, क्योंकि कार्गो को निर्यात करने से पहले उसकी हैंडलिंग और स्टोरेज भारत में ही होती है। अतः सेवा का “place of performance” भारत है। - व्यावसायिक शुल्क का संग्रह:
AAI इन सेवाओं के लिए शुल्क वसूलता है। इस प्रकार, यह एक व्यावसायिक सेवा प्रदाता के रूप में कार्य करता है, चाहे वह सार्वजनिक क्षेत्र का निकाय ही क्यों न हो। - कर से छूट का अभाव:
Export of Services Rules का लाभ केवल उन्हीं सेवाओं को मिलता है जिनका उपयोग भारत के बाहर होता है। यहाँ सेवाओं का उपभोग भारत में ही होता है। - सरकारी निकाय को छूट नहीं:
न्यायालय ने कहा कि “governmental character” सेवा कर देयता से छूट नहीं देता, यदि संस्था वाणिज्यिक गतिविधि कर रही हो।
न्यायालय की टिप्पणी (Observations)
सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि:
“In a globalised economy, the role of statutory bodies like AAI is no longer confined to mere administration but extends to commercial operations. Therefore, they must also comply with tax obligations applicable to similar service providers.”
न्यायालय ने यह भी कहा कि कराधान में समानता (equality in taxation) संविधान के अनुच्छेद 14 का हिस्सा है, और सरकारी निकायों को भी समान रूप से कर भुगतान करना चाहिए जब वे समान सेवाएँ प्रदान कर रहे हों।
निर्णय का प्रभाव (Impact of the Judgment)
- सार्वजनिक निकायों की कर देयता स्पष्ट:
यह निर्णय इस बात की पुष्टि करता है कि सार्वजनिक निकाय (जैसे AAI, पोर्ट ट्रस्ट्स, रेल मंत्रालय आदि) जब वाणिज्यिक सेवाएँ प्रदान करते हैं, तो उन पर सेवा कर (या वर्तमान में GST) लागू होगा। - निर्यात से जुड़ी सेवाओं की व्याख्या सीमित हुई:
निर्यात से पहले दी जाने वाली सेवाओं को ‘export of services’ नहीं माना जाएगा, यदि उनका उपभोग भारत में होता है। - राजस्व वृद्धि:
यह निर्णय कर विभाग के लिए राजस्व वृद्धि का माध्यम बना, क्योंकि इससे हवाई अड्डों पर दी जाने वाली अनेक सेवाओं पर कर लागू हुआ। - भविष्य के विवादों पर प्रभाव:
यह फैसला उन सभी मामलों में मार्गदर्शक सिद्ध होगा जहाँ यह प्रश्न उठता है कि क्या कोई विशेष सेवा “export-related” है या “taxable”.
निष्कर्ष (Conclusion)
Airports Authority of India बनाम Commissioner of Service Tax का निर्णय भारत में सेवा कर कानून की व्याख्या में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि “निर्यात से जुड़ी सेवा” और “निर्यात की सेवा” में मूलभूत अंतर है।
निर्यात से पहले दी जाने वाली सेवाएँ, यदि भारत में उपभोग की जाती हैं, तो वे ‘taxable service’ की श्रेणी में आएंगी।
यह निर्णय न केवल AAI जैसे सार्वजनिक निकायों की कर देयता को परिभाषित करता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि कराधान में कोई संस्था “पवित्र” नहीं मानी जा सकती — चाहे वह सरकारी क्यों न हो।