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₹649 अंतरराष्ट्रीय रोमिंग शुल्क पर उपभोक्ता को झटका: चंडीगढ़ जिला उपभोक्ता आयोग ने एयरटेल के विरुद्ध शिकायत खारिज की

₹649 अंतरराष्ट्रीय रोमिंग शुल्क पर उपभोक्ता को झटका: चंडीगढ़ जिला उपभोक्ता आयोग ने एयरटेल के विरुद्ध शिकायत खारिज की

         उपभोक्ता अधिकारों और दूरसंचार सेवाओं से जुड़े विवाद आज के डिजिटल युग में तेजी से बढ़ रहे हैं। मोबाइल फोन अब केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि बैंकिंग, व्यापार, शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय संपर्क का अहम साधन बन चुका है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय रोमिंग (International Roaming) जैसी सेवाओं को लेकर उपभोक्ताओं और टेलीकॉम कंपनियों के बीच विवाद उत्पन्न होना स्वाभाविक है। इसी संदर्भ में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, चंडीगढ़ ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए एयरटेल के खिलाफ दायर एक शिकायत को खारिज कर दिया।

         यह मामला ₹649 के अंतरराष्ट्रीय रोमिंग शुल्क से जुड़ा था, जिसे शिकायतकर्ता ने अनुचित और बिना स्पष्ट जानकारी के लगाया गया शुल्क बताते हुए चुनौती दी थी। आयोग ने अपने निर्णय में कहा कि जब उपभोक्ता द्वारा स्वयं सेवा को सक्रिय किया गया हो और शुल्क संबंधी जानकारी पहले से उपलब्ध हो, तो उसे सेवा में कमी (Deficiency in Service) नहीं माना जा सकता।


मामला क्या था? (पृष्ठभूमि)

       इस प्रकरण में शिकायतकर्ता एक मोबाइल उपभोक्ता था, जिसने विदेश यात्रा के दौरान अपने मोबाइल नंबर पर अंतरराष्ट्रीय रोमिंग सेवा का उपयोग किया। यात्रा के बाद उसके मोबाइल बिल में ₹649 का अंतरराष्ट्रीय रोमिंग चार्ज जोड़ा गया।

शिकायतकर्ता का आरोप था कि—

  • उसे इस शुल्क की स्पष्ट और पूर्व जानकारी नहीं दी गई,
  • कंपनी ने बिना अनुमति अतिरिक्त राशि वसूल की,
  • और यह उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत अनुचित व्यापार व्यवहार है।

इन्हीं आधारों पर उसने भारती एयरटेल के विरुद्ध जिला उपभोक्ता आयोग, चंडीगढ़ में शिकायत दायर की।


उपभोक्ता की प्रमुख दलीलें

शिकायतकर्ता ने आयोग के समक्ष मुख्य रूप से निम्न तर्क प्रस्तुत किए—

  1. बिना जानकारी शुल्क
    अंतरराष्ट्रीय रोमिंग सेवा को लेकर उसे शुल्क की पूरी जानकारी नहीं दी गई थी।
  2. अनुचित बिलिंग
    ₹649 की राशि को उसने अत्यधिक और अनुचित बताया।
  3. सेवा में कमी
    कंपनी ने उपभोक्ता को जागरूक किए बिना सेवा प्रदान की, जो उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है।
  4. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन
    शिकायतकर्ता ने दावा किया कि यह कृत्य उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के अंतर्गत सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है।

एयरटेल का पक्ष

एयरटेल ने शिकायत का विरोध करते हुए आयोग के समक्ष स्पष्ट किया कि—

  • अंतरराष्ट्रीय रोमिंग सेवा उपभोक्ता द्वारा स्वयं सक्रिय की गई थी,
  • सेवा सक्रिय करते समय शुल्क, शर्तें और पैकेज की जानकारी एसएमएस/ऐप/वेबसाइट के माध्यम से उपलब्ध कराई गई थी,
  • ₹649 का शुल्क कंपनी की घोषित दरों के अनुसार था,
  • उपभोक्ता ने सेवा का वास्तविक उपयोग किया, इसलिए शुल्क लेना वैध है।

कंपनी ने यह भी कहा कि—

“जब उपभोक्ता स्वयं किसी वैकल्पिक सेवा का चयन करता है और उसका उपयोग करता है, तो बाद में लगाए गए शुल्क को मनमाना या अवैध नहीं कहा जा सकता।”


आयोग के समक्ष मुख्य कानूनी प्रश्न

जिला उपभोक्ता आयोग के सामने मूल प्रश्न यह था—

क्या अंतरराष्ट्रीय रोमिंग सेवा पर लगाया गया ₹649 का शुल्क सेवा में कमी या अनुचित व्यापार व्यवहार माना जा सकता है, जब उपभोक्ता ने स्वयं सेवा को सक्रिय किया हो?


जिला उपभोक्ता आयोग, चंडीगढ़ का निर्णय

आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलों और रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों पर विचार करने के बाद शिकायत को खारिज कर दिया।

आयोग की प्रमुख टिप्पणियां

आयोग ने कहा—

  • अंतरराष्ट्रीय रोमिंग एक वैकल्पिक सेवा (Optional Service) है,
  • यह सेवा स्वतः सक्रिय नहीं होती,
  • उपभोक्ता को इसे स्वयं अनुरोध या सहमति से सक्रिय करना पड़ता है।

आयोग ने माना कि—

“जब उपभोक्ता ने अंतरराष्ट्रीय रोमिंग सेवा का उपयोग किया है और शुल्क कंपनी की निर्धारित दरों के अनुसार है, तो इसे सेवा में कमी नहीं कहा जा सकता।”


“सेवा में कमी” की कानूनी व्याख्या

आयोग ने स्पष्ट किया कि सेवा में कमी तभी मानी जाएगी जब—

  • सेवा वादे के अनुरूप न हो,
  • शुल्क मनमाने ढंग से लगाया गया हो,
  • या उपभोक्ता को धोखे में रखकर सेवा प्रदान की गई हो।

इस मामले में—

  • शुल्क पूर्व निर्धारित था,
  • सेवा का उपयोग वास्तव में हुआ,
  • और उपभोक्ता ने इसका प्रत्यक्ष लाभ लिया।

अतः उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत राहत देने का कोई आधार नहीं बनता।


अंतरराष्ट्रीय रोमिंग और उपभोक्ता की जिम्मेदारी

आयोग ने अपने फैसले में यह भी कहा कि—

  • अंतरराष्ट्रीय रोमिंग सेवाएं सामान्य घरेलू सेवाओं से अलग होती हैं,
  • इनके शुल्क अधिक होते हैं,
  • और उपभोक्ता को सेवा सक्रिय करने से पहले शर्तें पढ़नी चाहिए।

आज के डिजिटल युग में—

  • मोबाइल ऐप,
  • एसएमएस अलर्ट,
  • और वेबसाइट के माध्यम से
    जानकारी आसानी से उपलब्ध रहती है।

आयोग ने माना कि—

“उपभोक्ता को भी सेवाओं के उपयोग में उचित सतर्कता बरतनी चाहिए।”


उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के संदर्भ में फैसला

यह निर्णय उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के उस सिद्धांत को दोहराता है, जिसके अनुसार—

  • केवल असंतोष या अधिक बिल आना ही सेवा में कमी नहीं है,
  • वास्तविक लापरवाही, धोखा या अनुचित व्यवहार साबित होना आवश्यक है।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि—

  • उपभोक्ता मंच कंपनियों को अनुचित रूप से दंडित करने के लिए नहीं,
  • बल्कि वास्तविक उपभोक्ता शोषण को रोकने के लिए हैं।

दूरसंचार कंपनियों के लिए संदेश

इस फैसले से टेलीकॉम कंपनियों को यह राहत मिलती है कि—

  • यदि वे शुल्क संरचना को पारदर्शी रखें,
  • और उपभोक्ता को पर्याप्त सूचना उपलब्ध कराएं,
  • तो उपभोक्ता विवाद मंच उनके वैध अधिकारों की रक्षा करेगा।

साथ ही यह निर्णय कंपनियों को यह भी याद दिलाता है कि—

  • सेवा शर्तों की जानकारी स्पष्ट, सरल और सुलभ होनी चाहिए।

उपभोक्ताओं के लिए सीख

यह फैसला उपभोक्ताओं के लिए भी कई महत्वपूर्ण संदेश देता है—

1. सेवाओं की शर्तें पढ़ें

अंतरराष्ट्रीय रोमिंग जैसी सेवाओं को सक्रिय करने से पहले शुल्क और नियम अवश्य समझें।

2. अलर्ट और नोटिफिकेशन पर ध्यान दें

टेलीकॉम कंपनियां अक्सर एसएमएस या ऐप नोटिफिकेशन के माध्यम से जानकारी देती हैं।

3. शिकायत तभी करें जब वास्तविक कमी हो

केवल बिल अधिक आने के आधार पर शिकायत करने से पहले तथ्यों की जांच आवश्यक है।


क्या उपभोक्ता के पास अन्य विकल्प थे?

आयोग ने यह भी संकेत दिया कि—

  • यदि उपभोक्ता को शुल्क अधिक लगता,
  • तो वह रोमिंग बंद कर सकता था,
  • या वैकल्पिक पैकेज चुन सकता था।

सेवा का निरंतर उपयोग करना और बाद में शुल्क पर आपत्ति उठाना, आयोग के अनुसार, तर्कसंगत नहीं है।


भारतीय उपभोक्ता न्यायशास्त्र में इस फैसले का महत्व

यह निर्णय भारतीय उपभोक्ता कानून में संतुलन स्थापित करता है—

  • एक ओर उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा,
  • दूसरी ओर सेवा प्रदाताओं के वैध व्यावसायिक हित।

यह स्पष्ट करता है कि—

उपभोक्ता मंच सहानुभूति के आधार पर नहीं, बल्कि कानून और तथ्यों के आधार पर निर्णय देते हैं।


निष्कर्ष

₹649 के अंतरराष्ट्रीय रोमिंग शुल्क को लेकर एयरटेल के विरुद्ध दायर शिकायत को खारिज करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग, चंडीगढ़ ने यह स्पष्ट कर दिया कि—

  • जब उपभोक्ता स्वयं सेवा का चयन करता है,
  • सेवा का उपयोग करता है,
  • और शुल्क पूर्व घोषित दरों के अनुसार होता है,
    तो उसे सेवा में कमी नहीं माना जा सकता।

यह फैसला उपभोक्ताओं को जागरूक और सतर्क रहने का संदेश देता है, वहीं दूरसंचार कंपनियों को पारदर्शिता बनाए रखने की याद दिलाता है।

अंततः, यह निर्णय इस सिद्धांत को मजबूत करता है कि—

उपभोक्ता अधिकार महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उनके साथ उपभोक्ता की जिम्मेदारियां भी उतनी ही आवश्यक हैं।

इस प्रकार, यह मामला उपभोक्ता कानून के क्षेत्र में एक संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण को दर्शाता है, जो आने वाले समय में समान मामलों में मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है।