IndianLawNotes.com

व्हाट्सएप प्राइवेसी पॉलिसी मामला: एनसीएलएटी ने स्पष्ट किया — सीसीआई द्वारा गैर-विज्ञापन डेटा के लिए तय सुरक्षा उपाय विज्ञापन डेटा पर भी लागू होंगे

व्हाट्सएप प्राइवेसी पॉलिसी मामला: एनसीएलएटी ने स्पष्ट किया — सीसीआई द्वारा गैर-विज्ञापन डेटा के लिए तय सुरक्षा उपाय विज्ञापन डेटा पर भी लागू होंगे

प्रस्तावना

       डिजिटल युग में डेटा केवल सूचना नहीं, बल्कि शक्ति और व्यापार का प्रमुख साधन बन चुका है। सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म उपयोगकर्ताओं के व्यक्तिगत डेटा का किस प्रकार उपयोग करते हैं, यह प्रश्न अब केवल तकनीकी या व्यावसायिक नहीं रह गया है, बल्कि संवैधानिक अधिकार, प्रतिस्पर्धा कानून और उपभोक्ता संरक्षण से भी गहराई से जुड़ गया है।

       इसी संदर्भ में व्हाट्सएप की प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर उठा विवाद भारत में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के नियमन का एक ऐतिहासिक अध्याय बन गया। इस मामले में नेशनल कंपनी लॉ अपीलीय अधिकरण (NCLAT) ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा गैर-विज्ञापन (Non-Advertising) डेटा के लिए निर्धारित सुरक्षा उपाय विज्ञापन (Advertising) डेटा पर भी समान रूप से लागू होंगे।

      यह निर्णय डिजिटल प्रतिस्पर्धा, डेटा संरक्षण और उपभोक्ता अधिकारों के क्षेत्र में दूरगामी प्रभाव डालने वाला है।


मामले की पृष्ठभूमि

      वर्ष 2021 में व्हाट्सएप (जो मेटा प्लेटफॉर्म्स का हिस्सा है) ने अपनी नई प्राइवेसी पॉलिसी लागू की, जिसके तहत:

  • उपयोगकर्ताओं के कुछ डेटा को
  • व्हाट्सएप की पैरेंट कंपनी फेसबुक/मेटा और उसके अन्य प्लेटफॉर्म्स के साथ साझा करने का प्रावधान किया गया।

इस नीति को लेकर यह आरोप लगाए गए कि:

  • उपयोगकर्ताओं को “स्वीकार करें या सेवा छोड़ दें” (Take it or Leave it) की स्थिति में रखा गया,
  • डेटा साझा करने की शर्तें अस्पष्ट और असंतुलित थीं,
  • इससे मेटा को डिजिटल विज्ञापन बाजार में अनुचित प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिल सकता है।

इन्हीं चिंताओं के आधार पर भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने मामले की जांच शुरू की।


CCI की प्रारंभिक जांच और निष्कर्ष

CCI ने अपनी जांच में यह माना कि:

  • व्हाट्सएप की नई प्राइवेसी पॉलिसी
    • प्रभुत्व के दुरुपयोग (Abuse of Dominant Position) का मामला हो सकती है,
    • विशेष रूप से डेटा साझा करने के संदर्भ में।

CCI ने यह भी कहा कि:

  • व्हाट्सएप के पास उपयोगकर्ताओं का विशाल डेटा है,
  • और उस डेटा का उपयोग यदि अन्य मेटा सेवाओं को लाभ पहुँचाने के लिए किया गया,
  • तो यह प्रतिस्पर्धा कानून का उल्लंघन हो सकता है।

CCI द्वारा लगाए गए सुरक्षा उपाय (Safeguards)

CCI ने व्हाट्सएप और मेटा के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय निर्धारित किए, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल थे:

  1. डेटा उपयोग की सीमाएँ
    उपयोगकर्ता डेटा का उपयोग केवल निर्दिष्ट उद्देश्यों के लिए ही किया जा सकता है।
  2. गैर-विज्ञापन डेटा पर नियंत्रण
    उपयोगकर्ताओं के व्यक्तिगत और व्यवहारिक डेटा को विज्ञापन के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए साझा करने पर सख्त नियंत्रण।
  3. पारदर्शिता (Transparency)
    यह स्पष्ट किया जाए कि कौन-सा डेटा, किस उद्देश्य से और किसके साथ साझा किया जा रहा है।

हालाँकि, इस चरण पर एक महत्वपूर्ण प्रश्न बना रहा:

क्या ये सुरक्षा उपाय केवल Non-Advertising Data तक सीमित हैं या Advertising Data पर भी लागू होंगे?


मामला NCLAT के समक्ष

CCI के आदेश को चुनौती देते हुए मामला नेशनल कंपनी लॉ अपीलीय अधिकरण (NCLAT) के समक्ष पहुँचा।

यहाँ मुख्य विवाद यह था कि:

  • विज्ञापन डेटा और गैर-विज्ञापन डेटा के बीच
  • सुरक्षा उपायों को अलग-अलग रूप में लागू किया जाए या नहीं।

व्हाट्सएप/मेटा का तर्क था कि:

  • विज्ञापन डेटा एक अलग श्रेणी है,
  • और उस पर CCI द्वारा तय किए गए सभी प्रतिबंध लागू नहीं होने चाहिए।

NCLAT का महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण

NCLAT ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि:

“CCI द्वारा गैर-विज्ञापन डेटा के लिए निर्धारित सुरक्षा उपाय, विज्ञापन डेटा पर भी समान रूप से लागू होंगे।”

NCLAT की मुख्य टिप्पणियाँ

  1. डेटा का कृत्रिम वर्गीकरण स्वीकार्य नहीं
    न्यायाधिकरण ने कहा कि डेटा को केवल “विज्ञापन” और “गैर-विज्ञापन” के नाम पर बाँटना
    प्रतिस्पर्धा कानून की भावना के विपरीत है।
  2. सभी प्रकार का डेटा प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर सकता है
    चाहे डेटा का उपयोग विज्ञापन के लिए हो या अन्य उद्देश्यों के लिए,
    यदि उससे बाजार में असमानता पैदा होती है, तो वह CCI के दायरे में आएगा।
  3. उपयोगकर्ता की सहमति सर्वोपरि
    किसी भी प्रकार के डेटा उपयोग में
    स्वतंत्र, सूचित और स्पष्ट सहमति अनिवार्य है।

विज्ञापन डेटा पर नियंत्रण क्यों आवश्यक है?

NCLAT ने माना कि:

  • डिजिटल विज्ञापन बाजार में
    डेटा ही सबसे बड़ा प्रतिस्पर्धात्मक हथियार है।

यदि किसी एक कंपनी के पास:

  • विशाल उपयोगकर्ता डेटा
  • व्यवहारिक पैटर्न
  • लोकेशन और रुचि संबंधी जानकारी

हो, तो वह बाजार में अन्य प्रतिस्पर्धियों को अनुचित रूप से बाहर कर सकती है


प्रतिस्पर्धा कानून और डेटा संरक्षण का समन्वय

इस निर्णय का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि:

  • प्रतिस्पर्धा कानून (Competition Law)
  • और डेटा संरक्षण के सिद्धांत

अब एक-दूसरे से अलग नहीं माने जा सकते।

NCLAT ने माना कि:

  • डेटा का अनुचित उपयोग
    केवल प्राइवेसी का मुद्दा नहीं,
    बल्कि प्रतिस्पर्धा का भी गंभीर प्रश्न है।

उपयोगकर्ताओं के अधिकारों पर प्रभाव

इस निर्णय से उपयोगकर्ताओं को कई स्तरों पर लाभ मिलता है:

  1. डेटा सुरक्षा में वृद्धि
    अब विज्ञापन उद्देश्यों से उपयोग होने वाला डेटा भी
    CCI के सुरक्षा उपायों के अंतर्गत आएगा।
  2. पारदर्शिता का अधिकार
    उपयोगकर्ता जान सकेंगे कि
    उनका डेटा कैसे और क्यों इस्तेमाल हो रहा है।
  3. विकल्प की स्वतंत्रता
    उपयोगकर्ता को मजबूरी में किसी नीति को स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

डिजिटल कंपनियों पर प्रभाव

मेटा/व्हाट्सएप जैसी कंपनियों के लिए

  • अब वे यह तर्क नहीं दे सकेंगी कि
    विज्ञापन डेटा पर अलग नियम लागू होते हैं।
  • डेटा उपयोग की रणनीतियों में
    कानूनी सावधानी और पारदर्शिता बढ़ानी होगी।

अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए

  • यह निर्णय एक नजीर (Precedent) बनता है।
  • गूगल, अमेज़न और अन्य बड़ी टेक कंपनियों पर भी
    इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ेगा।

आलोचनात्मक दृष्टिकोण

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • अत्यधिक नियमन से
    डिजिटल नवाचार (Innovation) प्रभावित हो सकता है।

हालाँकि, अधिकांश विधि विशेषज्ञ इस निर्णय का समर्थन करते हैं और कहते हैं कि:

  • नवाचार और उपभोक्ता अधिकारों के बीच संतुलन आवश्यक है।
  • बिना नियंत्रण के डेटा उपयोग
    लोकतांत्रिक और प्रतिस्पर्धात्मक मूल्यों को कमजोर कर सकता है।

भविष्य के लिए संकेत

यह निर्णय संकेत देता है कि:

  • भारत में डिजिटल बाजारों का नियमन
    अब और अधिक कठोर और परिष्कृत होगा।
  • डेटा को केवल व्यावसायिक संपत्ति नहीं,
    बल्कि कानूनी रूप से संरक्षित संसाधन माना जाएगा।

निष्कर्ष

      व्हाट्सएप प्राइवेसी पॉलिसी मामले में NCLAT का यह स्पष्टिकरण भारतीय डिजिटल कानून के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

यह निर्णय स्थापित करता है कि:

डेटा चाहे विज्ञापन से जुड़ा हो या नहीं,
यदि उसका उपयोग प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ता अधिकारों को प्रभावित करता है,
तो उस पर समान कानूनी सुरक्षा उपाय लागू होंगे।

       यह फैसला न केवल CCI की भूमिका को मजबूत करता है, बल्कि उपयोगकर्ताओं को यह भरोसा भी देता है कि डिजिटल युग में उनके अधिकारों की रक्षा न्यायिक स्तर पर गंभीरता से की जा रही है।