टेलीविजन उद्योग में एकाधिकार की चुनौती: सुप्रीम कोर्ट ने Jiostar की याचिका खारिज की; अब CCI करेगा केरल में ‘डोमिनेंस’ की जांच
1. परिचय: भारतीय मीडिया के बदलते पैनोरमा में प्रतिस्पर्धा का प्रश्न
भारत में मीडिया और मनोरंजन उद्योग पिछले दशक में तेजी से बदल रहा है। टेलीविजन ब्रॉडकास्टिंग से लेकर डिजिटल ओटीटी प्लेटफॉर्म तक, उपभोक्ताओं के सामने विविध विकल्प मौजूद हैं। उसी परिवेश में Jiostar Private Limited केरल के स्थानीय बाजार में ‘प्रतिस्पर्धा विरोधी व्यवहार’ के आरोपों की जांच को लेकर एक संवेदनशील न्यायिक परीक्षा से गुजर रहा है।
Jiostar—जो पहले Star India Private Limited के नाम से जानी जाती थी, और बाद में रिलायंस के मीडिया संपत्ति संघ के हिस्से के रूप में एक बड़े मीडिया नेटवर्क का हिस्सा बनी—भारत के टीवी प्रसारण क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण खिलाड़ी है। इस कंपनी के खिलाफ आरोप लगे कि उसने अपने बाजार प्रभुत्व का उपयोग छोटे प्रतिस्पर्धियों को दबाने के लिए किया, जिससे प्रतिस्पर्धा की स्पष्टता बाधित हुई है।
2. विवाद की शुरुआत: केरल टीवी बाजार का मामला
शिकायतकर्ता पक्ष — स्थानीय प्रतिस्पर्धा की आवाज
केरल में संचालित एक स्थानीय डिजिटल टीवी सेवा प्रदाता, Asianet Digital Network Private Limited (ADNPL) ने Jiostar पर आरोप लगाया कि उसने केरल केबल टीवी मार्केट में अपनी मजबूत स्थिति का अनुचित उपयोग किया है।
मुख्य आरोप थे कि:
- Jiostar ने विशेष छूट (discounts) और भेदभावपूर्ण मूल्य निर्धारण प्रदान कर कई स्थानीय MSO (Multi-System Operator) को बढ़त दी।
- इस छूट की संरचना TRAI के नियमों से अलग रूप में दी गई, जिससे एक पक्ष को अनुपातिक लाभ मिला, जिससे छोटे खिलाड़ियों की बाजार हिस्सेदारी गिर गई।
- ADNPL दावा कर रहा है कि ऐसे व्यवहार प्रतिस्पर्धा विरोधी हैं और इससे केरल में पूरे टीवी प्रसारण बाजार में प्रतिस्पर्धा कमजोर हुई।
विशेष रूप से यह विवाद 2017 के TRAI Regulations के संदर्भ में उभरा, जिसमें किसी भी वितरक को 35% से अधिक छूट नहीं दी जा सकती—परन्तु आरोप यह है कि Jiostar ने 50% से अधिक प्रभावी छूट प्रदान करके नियम को दरकिनार किया।
3. CCI का दायित्व: प्रतिस्पर्धा अधिनियम के तहत जांच
Keystones of Competition Act, 2002
भारतीय प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि:
- कोई भी एंटरप्राइज अत्यधिक प्रभुत्व (Dominant Position) का गलत उपयोग न करे।
- किसी भी बाज़ार में प्रतिस्पर्धा को रोकने, दबाने या बिगाड़ने वाले व्यवहार पर कड़ी नजर रखी जाए।
Section 4 और Section 19 के तहत CCI को यह अधिकार है कि वह ऐसे मामलों की जांच करे और निर्णय ले कि क्या प्रभुत्व का दुरुपयोग हुआ है या नहीं।
इसके तहत CCI ने Director General (DG) को इस विवाद की गहन जांच के लिए निर्देश दिया। जांच के शुरुआती दौर में ही CCI ने प्रतिस्पर्धा कानून के उल्लंघन के प्रथम दृष्टया संकेत पाए और आगे की जाँच का मार्ग प्रशस्त किया।
4. TRAI vs CCI — नियामक अधिकार क्षेत्र का टकराव
Jiostar की चुनौती की मुख्य दलील यह थी कि यह मामला TRAI के क्षेत्राधिकार में आता है, क्योंकि:
- TRAI Act, 1997 और उसके नियमन टेलीकॉम और प्रसारण क्षेत्र के मूल्य निर्धारण, छूट, और बंडलिंग नीतियों को नियंत्रित करते हैं।
- अतः, जो शिकायत उठाई गई है वह TRAI के न्यायक्षेत्रीय दायित्व के अंतर्गत आती है, न कि CCI के।
परन्तु केरल हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:
एक विशिष्ट क्षेत्रीय नियमन (जैसे TRAI नियम) CCI के अधिकार क्षेत्र को खारिज नहीं करता, जब मामला प्रतिस्पर्धा के दुरुपयोग का हो।
इन नियमों के तहत, TRAI केवल टेलीकॉम/प्रसारण क्षेत्र का नियमन करता है; जबकि CCI क्रॉस-सेक्टरल प्रतिस्पर्धा जांच की शक्ति रखता है। Thus, sector regulation by TRAI does not immunize entities from Competition Act scrutiny.
5. केरल हाई कोर्ट का रुख और आदेश
केरल हाई कोर्ट ने पहली बार इस मामले में CCI की जांच को समर्थन देते हुए कहा कि:
- CCI को अनुशासन में रखा जाना चाहिए।
- TRAI के नियम, प्रतिस्पर्धा कानून के विशिष्ट अधिनियम से ऊपर नहीं हैं।
- CCI के पास समाज और बाज़ार व्यवस्थित करने की अधिक व्यापक शक्ति है, जो केवल TRAI के अंशकालिक अधिकारों से कहीं ऊपर है।
Division Bench ने एकल पीठ के इस आदेश को 3 दिसंबर 2025 को दोहराया और कहा कि जांच बिना किसी अवरोध के जारी रहनी चाहिए।
6. सुप्रीम कोर्ट का निर्णय: याचिका खारिज
आज सुप्रीम कोर्ट ने Jiostar की याचिका को खारिज कर दिया:
- मुख्य बेंच ने कहा कि CCI की जांच अभी शुरुआती चरण में है और कोर्ट को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
- कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर जांच में कोई अधिकार क्षेत्रगत त्रुटि या संवैधानिक उल्लंघन दिखाई देता है, तो वह अपने अधिकार में देख सकती है; परन्तु अभी तक ऐसा नहीं है, इसलिए जांच को पूरा होने दिया जाना चाहिए।
रिलायंस/Disney-स्टार से जुड़े इस बड़े मीडिया समूह के लिए यह एक बड़ी कानूनी चुनौती है, क्योंकि इसे अब अपनी व्यापारिक रणनीतियों, अनुबंधों और छूट संरचनाओं को CCI की तकनीकी और तथ्यों पर आधारित जांच के सामने पेश करना होगा।
7. मुकदमों का विश्लेषण — केवल तकनीकी जांच नहीं, व्यापक नीतिगत प्रश्न
यह मामला केवल कंपनियों के बीच विवाद नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि:
Sector-specific regulation और general competition law के बीच कैसे तालमेल साधा जाए?
नियम यह कहता है कि TRAI जैसे sectoral regulators विशिष्ट अधिकार रखते हैं, परन्तु Competition Act का दायरा कहीं व्यापक है और वह सभी बाजारों में प्रतिस्पर्धा की रक्षा करने का प्रभारी है।
क्या छूट और मूल्य निर्धारण के रूप में दिखाई देने वाला व्यवहार प्रतिस्पर्धा को बाधित करता है?
समझा जाता है कि Jiostar ने वितरकों को ऐसे लाभ दिए जिससे अन्य चैनलों को बाज़ार में टिकने में कठिनाई हुई है—यदि यह सत्य पाया गया, तो Section 4(2) के तहत यह dominance abuse बन सकता है।
प्रतियोगिता की दृष्टि से बाज़ार संरचना पर क्या असर पड़ा?
विशेष रूप से subscriber base migration और negotiation asymmetries इस बात की ओर संकेत कर सकते हैं कि Jiostar की रणनीतियाँ market foreclosure के लक्षण दिखाती हैं—जो Competition Act की स्पष्ट पाबंदी है।
8. प्रतिस्पर्धा कानून और मीडिया उद्योग: सीखें और संकेत
Adjudicatory vs Regulatory Paradigms
यह मामला हमें यह सिखाता है कि:
- नियमित नियामक (sector regulators) और
- व्यापक प्रतिस्पर्धा संरक्षक (CCI)
दोनों का दायित्व और भूमिका अलग है; पर कार्यों के लैंडस्केप में ओवरलैप संभव है, जो न्यायपालिका के संतुलन के द्वारा सुलझाया जाता है।
Prima Facie और Detailed Inquiry
CCI की शुरुआती देखरेख एक prima facie view होती है—मतलब यह औपचारिक दोषी ठहराने जैसा नहीं, बल्कि तथ्यों की समग्र जांच का संकेत है। सुप्रीम कोर्ट ने इसी को आधार मानते हुए अभी अंतिम निर्णय नहीं दिया।
9. निष्कर्ष: बड़ा संदेश — बाज़ार प्रभुत्व का अनुचित उपयोग बर्दाश्त नहीं
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय इस बात को स्पष्ट करता है कि:
🔹 किसी भी खिलाड़ी का बड़ा होना अपराध नहीं,
🔹 परन्तु शक्ति का अनुचित और प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने वाला उपयोग सुनिश्चित रूप से जांच का विषय है,
🔹 और CCI का दायित्व है कि वह बाज़ार की पूंजी और संरचना को स्वतंत्र रूप से जांचे।
यह फैसला केवल Jiostar के लिए नहीं, बल्कि समूचे प्रसारण और मीडिया उद्योग के नियामक और प्रतिस्पर्धा ढांचे के लिए एक मिसाल बनता है। यह घोषणा करता है कि बाजार का हर बड़ा खिलाड़ी कानून से ऊपर नहीं है, और प्रतिस्पर्धा कानून देश की आर्थिक और उपभोक्ता सुरक्षा की पहली पंक्ति है।