कलकत्ता हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) का लाभ लेने के बाद पदोन्नति का दावा नहीं किया जा सकता
भूमिका
सेवा कानून (Service Jurisprudence) में पदोन्नति, वरिष्ठता और वेतन-वृद्धि से जुड़े विवाद अक्सर न्यायालयों के समक्ष आते रहे हैं। सरकारी और अर्ध-सरकारी सेवाओं में कर्मचारियों के लिए लागू कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (Career Advancement Scheme – CAS) का उद्देश्य यह होता है कि जिन पदों पर समयबद्ध पदोन्नति की संभावना सीमित या नगण्य हो, वहाँ कर्मचारियों को वित्तीय उन्नयन (Financial Upgradation) का लाभ दिया जा सके।
हाल ही में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में यह स्पष्ट किया कि जो कर्मचारी CAS का लाभ लेने के बाद किसी विशेष कैडर से बाहर निकल चुका है, वह बाद में उसी कैडर में बने रहे अपने कनिष्ठों (Juniors) को मिली पदोन्नति का दावा नहीं कर सकता। यह निर्णय न केवल पश्चिम बंगाल बल्कि पूरे देश में सेवा कानून से जुड़े मामलों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है।
मामला क्या था?
यह मामला पश्चिम बंगाल सरकार के अंतर्गत कार्यरत भूमि सहायक (Bhumi Sahayak) कैडर से संबंधित था। याचिकाकर्ता ने अपने सेवा काल के दौरान कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) का लाभ प्राप्त किया था। CAS के अंतर्गत उसे वेतनमान और सेवा लाभों में उन्नयन मिला, जो कि सामान्यतः पदोन्नति के स्थान पर प्रदान किया जाता है।
बाद में, याचिकाकर्ता ने Bhumi Sahayak कैडर से बाहर निकलकर अन्य पद/सेवा में प्रवेश कर लिया। कुछ समय पश्चात, Bhumi Sahayak कैडर में कार्यरत उसके कुछ कनिष्ठ कर्मचारियों को पदोन्नति प्रदान की गई।
याचिकाकर्ता ने इस आधार पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया कि उसे भी समानता (Parity) के आधार पर पदोन्नति या उसके समकक्ष लाभ दिए जाएँ।
याचिकाकर्ता के तर्क
याचिकाकर्ता की ओर से मुख्यतः निम्नलिखित तर्क प्रस्तुत किए गए—
- वरिष्ठता का अधिकार:
याचिकाकर्ता का कहना था कि वह अपने कई कनिष्ठों से वरिष्ठ था, इसलिए पदोन्नति के मामले में उसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। - समानता का सिद्धांत (Article 14):
संविधान के अनुच्छेद 14 के अंतर्गत समानता के अधिकार का हवाला देते हुए यह दलील दी गई कि जब कनिष्ठों को पदोन्नति दी गई, तो वरिष्ठ को इससे वंचित करना भेदभावपूर्ण है। - CAS और पदोन्नति में अंतर:
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि CAS केवल वित्तीय लाभ देता है, जबकि पदोन्नति से पद, जिम्मेदारी और प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है, इसलिए CAS लेने से पदोन्नति का अधिकार समाप्त नहीं होना चाहिए।
राज्य सरकार का पक्ष
राज्य सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि—
- CAS पदोन्नति का विकल्प है:
CAS को विशेष रूप से उन परिस्थितियों के लिए लागू किया गया है जहाँ नियमित पदोन्नति संभव नहीं होती। यह योजना पदोन्नति का स्थानापन्न (Substitute) है। - कैडर से बाहर निकलना:
याचिकाकर्ता स्वेच्छा से Bhumi Sahayak कैडर से बाहर निकल चुका था। इसलिए वह उस कैडर से संबंधित भविष्य के लाभों का दावा नहीं कर सकता। - कनिष्ठों से तुलना अनुचित:
जिन कर्मचारियों को पदोन्नति मिली, वे लगातार उसी कैडर में बने रहे। ऐसे में याचिकाकर्ता उनके साथ समानता का दावा नहीं कर सकता।
कलकत्ता हाईकोर्ट का निर्णय
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सभी पक्षों को सुनने के बाद याचिका को खारिज करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ कीं।
1. CAS पदोन्नति का विकल्प है
न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि कैरियर एडवांसमेंट स्कीम केवल वेतन वृद्धि की योजना नहीं है, बल्कि यह पदोन्नति के अभाव में दिया गया एक वैकल्पिक लाभ है।
जब कोई कर्मचारी स्वेच्छा से CAS का लाभ स्वीकार करता है, तो वह यह जानते हुए करता है कि यह योजना पदोन्नति के स्थान पर दी जा रही है।
2. कैडर छोड़ने के बाद अधिकार समाप्त
न्यायालय ने कहा कि—
“जो कर्मचारी किसी विशेष कैडर से बाहर निकल चुका है, वह उस कैडर में बने रहे कर्मचारियों को मिलने वाले पदोन्नति लाभों पर दावा नहीं कर सकता।”
अदालत के अनुसार, याचिकाकर्ता का कैडर से बाहर जाना उसके अपने निर्णय का परिणाम था। ऐसे में वह बाद में उत्पन्न हुए लाभों का हकदार नहीं हो सकता।
3. समानता का सिद्धांत लागू नहीं
अनुच्छेद 14 के संदर्भ में अदालत ने कहा कि समानता का सिद्धांत केवल समान परिस्थितियों में लागू होता है।
यहाँ याचिकाकर्ता और उसके कनिष्ठों की परिस्थितियाँ समान नहीं थीं—
- कनिष्ठ कर्मचारी लगातार Bhumi Sahayak कैडर में बने रहे।
- याचिकाकर्ता ने CAS लिया और फिर कैडर छोड़ दिया।
इसलिए, दोनों के बीच तुलना करना ही गलत है।
4. “Parity with juniors” का दावा अस्वीकार्य
न्यायालय ने दो टूक कहा कि CAS का लाभ लेने के बाद और कैडर से बाहर निकलने के पश्चात कनिष्ठों से समानता का दावा कानूनन अस्वीकार्य है।
निर्णय का व्यापक महत्व
यह फैसला केवल एक व्यक्ति या एक कैडर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी प्रभाव हैं—
1. सेवा कानून में स्पष्टता
इस निर्णय से यह स्पष्ट हो गया है कि—
- CAS एक वैकल्पिक व्यवस्था है।
- CAS स्वीकार करने के बाद पदोन्नति का दावा स्वतः कमजोर हो जाता है।
2. सरकारी कर्मचारियों के लिए संदेश
सरकारी कर्मचारियों को अब यह समझना होगा कि—
- CAS का लाभ लेने से पहले उसके दीर्घकालिक प्रभावों पर विचार करना आवश्यक है।
- यदि वे किसी कैडर से बाहर जाते हैं, तो वे उस कैडर में भविष्य में होने वाली पदोन्नतियों का दावा नहीं कर सकते।
3. अनावश्यक मुकदमों में कमी
इस प्रकार के स्पष्ट न्यायिक दृष्टिकोण से भविष्य में पदोन्नति और CAS से जुड़े अनावश्यक मुकदमों में कमी आने की संभावना है।
पूर्व न्यायिक दृष्टांतों से सामंजस्य
कलकत्ता हाईकोर्ट का यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट और अन्य उच्च न्यायालयों के पूर्व निर्णयों के अनुरूप है, जहाँ यह माना गया है कि—
- Financial upgradation योजनाएँ पदोन्नति का विकल्प होती हैं।
- कर्मचारी “दोहरा लाभ” (Double Benefit) का दावा नहीं कर सकता।
निष्कर्ष
कलकत्ता उच्च न्यायालय का यह फैसला सेवा कानून के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि—
- CAS का लाभ लेने वाला कर्मचारी बाद में पदोन्नति का दावा नहीं कर सकता।
- कैडर से बाहर निकलने के बाद समानता या वरिष्ठता के आधार पर कोई अधिकार शेष नहीं रहता।
यह निर्णय सरकारी कर्मचारियों, प्रशासकों और विधि-विशेषज्ञों सभी के लिए एक स्पष्ट संदेश देता है कि सेवा नियमों और योजनाओं को स्वीकार करते समय उनके कानूनी परिणामों को समझना अत्यंत आवश्यक है।
निस्संदेह, यह फैसला भविष्य में सेवा संबंधी विवादों के निपटारे में एक मजबूत मिसाल के रूप में उद्धृत किया जाएगा।