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“VISTARA” की नकल पर सख्त रुख: बॉम्बे हाईकोर्ट ने ‘VISTARRAAH’ ट्रेडमार्क रद्द किया

“VISTARA” की नकल पर सख्त रुख: बॉम्बे हाईकोर्ट ने ‘VISTARRAAH’ ट्रेडमार्क रद्द किया

        भारतीय बौद्धिक संपदा कानून के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने “VISTARRAAH” नामक ट्रेडमार्क को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि वह एयर इंडिया समूह की प्रसिद्ध एयरलाइन ब्रांड “VISTARA” से भ्रामक रूप से समान (Deceptively Similar) है और इसे दुर्भावना (Bad Faith) के साथ अपनाया गया था।
यह फैसला न केवल ट्रेडमार्क संरक्षण के सिद्धांतों को मजबूत करता है, बल्कि यह भी स्पष्ट संदेश देता है कि प्रसिद्ध ब्रांड्स की नकल कर व्यावसायिक लाभ उठाने के प्रयासों को अदालतें बर्दाश्त नहीं करेंगी।

      यह मामला Bombay High Court के समक्ष विचाराधीन था, जिसमें “VISTARA” ब्रांड की प्रतिष्ठा, पहचान और उपभोक्ता विश्वास को केंद्र में रखा गया।


पृष्ठभूमि: विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

      “VISTARA” भारत की एक जानी-मानी फुल-सर्विस एयरलाइन है, जिसे टाटा समूह और सिंगापुर एयरलाइंस के संयुक्त उपक्रम के रूप में शुरू किया गया था और बाद में यह Air India समूह का हिस्सा बनी।
“VISTARA” नाम वर्षों से—

  • उच्च गुणवत्ता वाली सेवा
  • प्रीमियम ब्रांड इमेज
  • और व्यापक उपभोक्ता पहचान

के लिए जाना जाता है।

दूसरी ओर, “VISTARRAAH” नामक ट्रेडमार्क के पंजीकरण और उपयोग ने “VISTARA” ब्रांड के स्वामियों को यह आशंका उत्पन्न की कि—

  • उपभोक्ता भ्रमित हो सकते हैं,
  • ब्रांड की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है,
  • और यह नाम जानबूझकर प्रसिद्ध ब्रांड की नकल कर अपनाया गया है।

इसी आधार पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।


मुख्य कानूनी प्रश्न

अदालत के समक्ष प्रमुख प्रश्न यह था—

क्या “VISTARRAAH” ट्रेडमार्क, “VISTARA” के साथ इतना समान है कि सामान्य उपभोक्ता भ्रमित हो सकता है?
क्या यह नाम सद्भावना (Good Faith) में अपनाया गया था या दुर्भावनापूर्ण तरीके से?


बॉम्बे हाईकोर्ट का विश्लेषण

हाईकोर्ट ने ट्रेडमार्क कानून के स्थापित सिद्धांतों के आधार पर मामले का परीक्षण किया।

1. भ्रामक समानता (Deceptive Similarity)

अदालत ने कहा कि—

  • “VISTARRAAH” और “VISTARA” का
    • उच्चारण (Phonetic Similarity),
    • दृश्य प्रभाव (Visual Impression),
    • और समग्र व्यावसायिक छवि

लगभग समान है।

अदालत ने माना कि—

“एक साधारण, औसत बुद्धि वाला उपभोक्ता दोनों नामों के बीच आसानी से भ्रमित हो सकता है।”


2. प्रसिद्ध ट्रेडमार्क का संरक्षण

हाईकोर्ट ने यह भी माना कि “VISTARA” एक Well-Known Trademark है।
ऐसे ट्रेडमार्क को विशेष संरक्षण प्राप्त होता है, क्योंकि—

  • उनकी पहचान केवल एक क्षेत्र या सेवा तक सीमित नहीं होती,
  • बल्कि व्यापक जनमानस में उनकी मजबूत छवि होती है।

अदालत ने कहा कि प्रसिद्ध ब्रांड की नकल करना अपने आप में संदेह पैदा करता है।


3. दुर्भावना (Bad Faith) का तत्व

अदालत ने इस तथ्य पर विशेष जोर दिया कि—

  • “VISTARA” पहले से बाजार में स्थापित और चर्चित ब्रांड था,
  • इसके बावजूद “VISTARRAAH” नाम अपनाया गया,
  • और नाम में मामूली बदलाव कर समानता बनाए रखी गई।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि—

“ऐसे मामलों में यह मानना कठिन है कि ट्रेडमार्क निर्दोष या संयोगवश चुना गया हो। यह स्पष्ट रूप से दुर्भावना का संकेत देता है।”


ट्रेडमार्क कानून के सिद्धांत

यह निर्णय ट्रेडमार्क अधिनियम, 1999 के मूल उद्देश्यों को रेखांकित करता है, जिनमें शामिल हैं—

  • उपभोक्ता भ्रम से संरक्षण
  • ब्रांड मालिक के अधिकारों की रक्षा
  • अनुचित प्रतिस्पर्धा को रोकना

अदालत ने कहा कि—

  • ट्रेडमार्क का उद्देश्य केवल नाम का पंजीकरण नहीं,
  • बल्कि बाजार में विशिष्ट पहचान बनाए रखना है।

उपभोक्ता भ्रम का खतरा

हाईकोर्ट ने माना कि—

  • यदि “VISTARRAAH” जैसे नाम को अनुमति दी जाती,
  • तो उपभोक्ता यह मान सकते थे कि
    • यह “VISTARA” से जुड़ी कोई सेवा है,
    • या उसी समूह की नई पेशकश है।

यह स्थिति उपभोक्ता हितों के भी विरुद्ध होती।


अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों का संदर्भ

अदालत ने यह भी संकेत दिया कि—

  • वैश्विक स्तर पर ट्रेडमार्क कानून
  • प्रसिद्ध ब्रांड्स को मजबूत संरक्षण देता है,

ताकि—

  • ब्रांड वैल्यू कमजोर न हो,
  • और बाजार में ईमानदार प्रतिस्पर्धा बनी रहे।

फैसले का परिणाम

इन सभी तथ्यों के आधार पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने—

  • “VISTARRAAH” ट्रेडमार्क को
    • रद्द (Cancelled) कर दिया,
  • और इसे “VISTARA” के अधिकारों का उल्लंघन माना।

व्यवसाय और स्टार्टअप्स के लिए संदेश

यह फैसला स्पष्ट संदेश देता है कि—

1. नाम चुनते समय सावधानी जरूरी

किसी भी नए ब्रांड या स्टार्टअप को—

  • पहले से मौजूद प्रसिद्ध ट्रेडमार्क्स की जांच करनी चाहिए।

2. मामूली बदलाव पर्याप्त नहीं

केवल—

  • अक्षर जोड़ देना,
  • उच्चारण थोड़ा बदल देना,

कानूनी सुरक्षा नहीं देता।

3. दुर्भावना भारी पड़ सकती है

यदि अदालत को लगे कि—

  • नाम जानबूझकर प्रसिद्ध ब्रांड से मिलता-जुलता चुना गया है,

तो ट्रेडमार्क रद्द होना तय है।


ब्रांड मालिकों के लिए राहत

यह निर्णय प्रसिद्ध ब्रांड्स के लिए बड़ी राहत है क्योंकि—

  • यह उनके निवेश, प्रतिष्ठा और goodwill की रक्षा करता है,
  • और नकल करने वालों के लिए एक मजबूत नजीर (Precedent) स्थापित करता है।

भारतीय बौद्धिक संपदा कानून में महत्व

यह फैसला—

  • ट्रेडमार्क संरक्षण को और मजबूत करता है,
  • “भ्रामक समानता” और “दुर्भावना” की अवधारणा को स्पष्ट करता है,
  • और निचली अदालतों व रजिस्ट्रार के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है।

निष्कर्ष

“VISTARRAAH” ट्रेडमार्क को रद्द करने का बॉम्बे हाईकोर्ट का निर्णय भारतीय ट्रेडमार्क कानून में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
यह स्पष्ट करता है कि—

  • प्रसिद्ध ब्रांड्स की पहचान की नकल
  • चाहे कितनी भी सूक्ष्म क्यों न हो,
  • कानून की नजर में स्वीकार्य नहीं है।

यह फैसला संतुलन स्थापित करता है—

  • एक ओर ब्रांड मालिकों के वैध अधिकार,
  • दूसरी ओर उपभोक्ताओं को भ्रम से बचाने का उद्देश्य।

अंततः, यह निर्णय यह संदेश देता है कि—

“ब्रांड की सफलता का शॉर्टकट नकल नहीं, बल्कि नवाचार और ईमानदारी है।”

इस प्रकार, बॉम्बे हाईकोर्ट का यह फैसला आने वाले समय में ट्रेडमार्क विवादों में एक मजबूत मार्गदर्शक सिद्ध होगा और भारत में बौद्धिक संपदा अधिकारों की रक्षा को और सुदृढ़ करेगा।