1956 – जीवन बीमा का राष्ट्रीयकरण और LIC की स्थापना
भूमिका
भारत में बीमा उद्योग का इतिहास प्राचीन व्यापारिक प्रथाओं से जुड़ा है, लेकिन संगठित और कानूनी रूप से नियंत्रित बीमा व्यवसाय का विकास औपनिवेशिक काल में हुआ। 1938 का बीमा अधिनियम सभी प्रकार के बीमा के लिए एक व्यापक कानूनी ढांचा लेकर आया, लेकिन 1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी जीवन बीमा क्षेत्र में कई समस्याएं बनी रहीं। निजी कंपनियों के प्रभुत्व, वित्तीय अनियमितताओं, और उपभोक्ता अधिकारों के हनन ने सरकार को बीमा क्षेत्र में बड़े सुधार की आवश्यकता का एहसास कराया।
इसी पृष्ठभूमि में 1956 में जीवन बीमा का राष्ट्रीयकरण किया गया और भारतीय जीवन बीमा निगम (Life Insurance Corporation of India – LIC) की स्थापना हुई। यह कदम भारतीय बीमा उद्योग के इतिहास में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी परिवर्तन था।
राष्ट्रीयकरण से पहले की स्थिति
1. निजी कंपनियों का प्रभुत्व
स्वतंत्रता के समय भारत में लगभग 245 निजी जीवन बीमा कंपनियां संचालित हो रही थीं। इनमें कई विदेशी कंपनियां भी थीं, जो मुख्यतः शहरी क्षेत्रों और उच्च-आय वर्ग के ग्राहकों पर केंद्रित थीं।
2. अनियमितताएं और धोखाधड़ी
कई निजी कंपनियां प्रीमियम तो लेती थीं, लेकिन दावों का भुगतान समय पर नहीं करती थीं। कुछ कंपनियां दिवालिया हो जातीं और निवेशकों व पॉलिसीधारकों का धन डूब जाता था।
3. ग्रामीण और कमजोर वर्गों की उपेक्षा
बीमा सेवाएं मुख्यतः बड़े शहरों में उपलब्ध थीं। ग्रामीण क्षेत्रों, श्रमिक वर्ग और निम्न-आय वाले लोगों को बीमा सुरक्षा से वंचित रखा गया।
4. विश्वास की कमी
कंपनियों की नीतियां पारदर्शी नहीं थीं, जिससे लोगों का बीमा उद्योग पर भरोसा कम था।
राष्ट्रीयकरण के कारण
- जनता का हित सुरक्षित करना – बीमा को एक लाभ-प्रधान व्यापार के बजाय जनसेवा का माध्यम बनाना।
- वित्तीय संसाधनों का समेकन – बीमा प्रीमियम से प्राप्त विशाल धनराशि का उपयोग राष्ट्रीय विकास परियोजनाओं में करना।
- समान अवसर – ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बीमा सेवाओं का विस्तार।
- निगरानी और नियंत्रण – वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता लाना।
राष्ट्रीयकरण की प्रक्रिया
- Life Insurance (Emergency Provisions) Ordinance, 1956
- 19 जनवरी 1956 को यह अध्यादेश जारी किया गया।
- सभी निजी जीवन बीमा कंपनियों का प्रबंधन तत्काल प्रभाव से केंद्र सरकार के अधीन आ गया।
- Life Insurance Corporation Act, 1956
- 1 जून 1956 को संसद में पारित।
- 1 सितंबर 1956 से लागू।
- इस अधिनियम के तहत भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की स्थापना हुई।
- संपत्तियों और देनदारियों का हस्तांतरण
- 245 जीवन बीमा कंपनियों की सभी संपत्तियां, देनदारियां, अनुबंध और पॉलिसियां LIC में स्थानांतरित कर दी गईं।
भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की स्थापना
संरचना और स्वरूप
- LIC एक वैधानिक निगम (Statutory Corporation) है।
- इसका पूर्ण स्वामित्व केंद्र सरकार के पास था (हालांकि हाल के वर्षों में कुछ हिस्सेदारी सार्वजनिक हुई है)।
- इसका मुख्यालय मुंबई में स्थापित किया गया।
उद्देश्य
- जीवन बीमा को देश के सभी वर्गों और क्षेत्रों में पहुंचाना।
- बीमा प्रीमियम से प्राप्त धन का सुरक्षित और उत्पादक निवेश करना।
- राष्ट्रीय विकास परियोजनाओं में वित्तीय योगदान देना।
- बीमा के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना।
राष्ट्रीयकरण के लाभ
1. पारदर्शिता और विश्वास
LIC के गठन से लोगों का बीमा उद्योग पर विश्वास बढ़ा। दावों का निपटान समय पर और न्यायसंगत ढंग से होने लगा।
2. ग्रामीण क्षेत्रों में विस्तार
LIC ने गांव-गांव में शाखाएं खोलीं और कम प्रीमियम वाली योजनाओं के माध्यम से गरीब और ग्रामीण लोगों को भी बीमा सुरक्षा दी।
3. राष्ट्रीय विकास में योगदान
LIC ने अपने निवेश से सड़क, बिजली, जलापूर्ति, उद्योग, और आवास जैसी परियोजनाओं में बड़ा योगदान दिया।
4. समान अवसर
अब बीमा केवल अमीर और शहरों के लोगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज के सभी वर्गों के लिए उपलब्ध हुआ।
चुनौतियां
हालांकि राष्ट्रीयकरण से कई लाभ हुए, फिर भी कुछ चुनौतियां बनी रहीं:
- एकाधिकार (Monopoly) – निजी प्रतिस्पर्धा खत्म होने से नवाचार की गति धीमी हुई।
- प्रशासनिक बोझ – विशाल संगठन के कारण निर्णय लेने की प्रक्रिया जटिल हो गई।
- राजनीतिक हस्तक्षेप – निवेश और संचालन में कभी-कभी राजनीतिक प्रभाव देखा गया।
संशोधन और उदारीकरण के बाद की स्थिति
- 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद बीमा क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोला गया।
- 1999 में भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) की स्थापना हुई।
- निजी कंपनियों के प्रवेश के बावजूद LIC का बाजार में प्रभुत्व लंबे समय तक कायम रहा और आज भी यह भारत की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी है।
LIC की उपलब्धियां
- ग्राहक आधार – करोड़ों पॉलिसीधारक।
- विस्तृत नेटवर्क – देशभर में हजारों शाखाएं और लाखों एजेंट।
- सामाजिक योजनाएं – गरीब और वंचित वर्गों के लिए विशेष बीमा योजनाएं।
- निवेश – भारत के बुनियादी ढांचे के विकास में अरबों रुपये का निवेश।
निष्कर्ष
1956 में जीवन बीमा का राष्ट्रीयकरण और LIC की स्थापना भारतीय बीमा इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है। इस कदम ने बीमा को केवल लाभ कमाने का साधन न रखकर सामाजिक सुरक्षा और राष्ट्रीय विकास का साधन बना दिया।
यह न केवल उपभोक्ता संरक्षण का एक मजबूत उदाहरण है, बल्कि इसने दिखाया कि राज्य द्वारा नियंत्रित वित्तीय संस्थान भी पारदर्शिता, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रीय प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।