📱 “WhatsApp चैट: क्या यह अदालत में सबूत मानी जाती है?”
🔹 प्रस्तावना
आज के डिजिटल युग में संवाद का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुका है — WhatsApp। व्यक्तिगत बातचीत से लेकर व्यापारिक समझौतों तक, हर चीज़ अब इस प्लेटफ़ॉर्म पर दर्ज होती है। लेकिन जब किसी कानूनी विवाद में सच्चाई साबित करनी होती है, तो सबसे बड़ा सवाल उठता है —
“क्या WhatsApp चैट अदालत में सबूत के रूप में स्वीकार की जा सकती है?”
यह सवाल सरल प्रतीत होता है, परंतु इसका उत्तर भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act, 1872) की गहराइयों में छिपा हुआ है। न्यायालयों ने समय-समय पर इस प्रश्न पर महत्वपूर्ण निर्णय दिए हैं, जिनसे यह स्पष्ट होता है कि WhatsApp चैट “साक्ष्य (Evidence)” के रूप में तो प्रस्तुत की जा सकती है, परंतु इसे स्वीकार करने के लिए कुछ कानूनी शर्तें पूरी करनी आवश्यक हैं।
🔹 WhatsApp चैट की कानूनी स्थिति
भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 3 (Section 3) के अनुसार,
“साक्ष्य (Evidence)” में वे सभी कथन आते हैं जो न्यायालय में साक्षी द्वारा दिये जाते हैं, तथा वे सभी दस्तावेज जो न्यायालय में प्रस्तुत किए जाते हैं, जिनसे किसी तथ्य की सत्यता सिद्ध की जा सके।
इस परिभाषा में “दस्तावेज” शब्द अत्यंत महत्वपूर्ण है। डिजिटल संचार (Electronic Communication), जैसे कि WhatsApp चैट, ई-मेल, SMS, ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग, इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज (Electronic Document) की श्रेणी में आते हैं।
इस प्रकार, WhatsApp चैट Section 65-B of the Indian Evidence Act, 1872 के अंतर्गत “Electronic Evidence” मानी जाती है।
🔹 धारा 65-B का महत्व
Section 65-B इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को अदालत में प्रमाणित करने की प्रक्रिया निर्धारित करती है।
इस धारा के अनुसार, किसी भी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को अदालत में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत करने के लिए “65-B Certificate” आवश्यक होता है।
यह प्रमाण पत्र क्या होता है?
यह एक ऐसा दस्तावेज होता है जो यह सुनिश्चित करता है कि –
- प्रस्तुत किया गया इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड (जैसे चैट, ई-मेल आदि) उसी डिवाइस से उत्पन्न हुआ है,
- इसमें किसी प्रकार की छेड़छाड़ (Tampering) नहीं की गई है,
- रिकॉर्ड को उसी रूप में कॉपी या ट्रांसफर किया गया है जैसा मूल में था।
अर्थात, बिना 65-B प्रमाण पत्र के, अदालत में WhatsApp चैट की प्रमाणिकता (Authenticity) संदिग्ध मानी जा सकती है।
🔹 क्या केवल स्क्रीनशॉट सबूत के लिए पर्याप्त है?
अक्सर लोग सोचते हैं कि WhatsApp चैट का स्क्रीनशॉट (Screenshot) ही पर्याप्त सबूत है।
लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है।
📌 न्यायालयों ने कहा है कि केवल स्क्रीनशॉट अपने आप में साक्ष्य नहीं होता, क्योंकि यह आसानी से फ़र्ज़ी या एडिटेड हो सकता है।
अतः स्क्रीनशॉट तभी प्रभावी होता है जब –
- वह मूल डिवाइस (Original Device) से लिया गया हो,
- और उसके साथ 65-B प्रमाण पत्र संलग्न हो।
🔹 न्यायालयों के प्रमुख निर्णय
1. Anvar P.V. v. P.K. Basheer (2014) 10 SCC 473
इस ऐतिहासिक निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा —
“इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत करने के लिए धारा 65-B का पालन अनिवार्य है। बिना प्रमाण पत्र के कोई भी इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज अदालत में मान्य नहीं होगा।”
इस फैसले ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की स्वीकार्यता के लिए कड़ा मानक तय किया।
2. Arjun Panditrao Khotkar v. Kailash Kushanrao Gorantyal (2020) 7 SCC 1
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने Anvar P.V. के निर्णय की पुनः पुष्टि करते हुए कहा —
“अगर मूल डिवाइस उपलब्ध है, तो अदालत उसे प्रत्यक्ष रूप से जांच सकती है। परंतु यदि प्रतिलिपि प्रस्तुत की जा रही है, तो 65-B प्रमाण पत्र आवश्यक है।”
3. Khusbu Khatal v. State of Maharashtra (2021)
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि –
“WhatsApp चैट केवल तभी विश्वसनीय मानी जाएगी जब उसे तकनीकी रूप से प्रमाणित किया गया हो और यह दिखाया गया हो कि चैट का संबंध विवादित मुद्दे से सीधे जुड़ा है।”
🔹 चैट के प्रमाणिक होने की शर्तें
अदालत में WhatsApp चैट को साक्ष्य के रूप में स्वीकार करने के लिए निम्नलिखित शर्तें आवश्यक हैं:
- चैट असली होनी चाहिए – कोई एडिटिंग या मॉडिफिकेशन नहीं।
- चैट का स्रोत प्रमाणित होना चाहिए – यानी किस फोन नंबर और किस व्यक्ति से चैट हुई।
- 65-B प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना आवश्यक है।
- चैट का केस से सीधा संबंध होना चाहिए।
- डिवाइस की जब्ती या जांच रिपोर्ट (Forensic Report) अदालत को सौंपी जा सकती है।
- संदेश का संदर्भ (Context) भी देखा जाएगा — यानी चैट का कौन-सा हिस्सा विवादित तथ्य को सिद्ध कर रहा है।
🔹 क्या वॉइस मैसेज या इमोजी भी सबूत हैं?
हाँ, भारतीय साक्ष्य अधिनियम की दृष्टि में WhatsApp के वॉइस नोट्स, इमोजी, फाइल अटैचमेंट्स, या मीडिया फाइल्स भी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की श्रेणी में आते हैं।
यदि वे 65-B प्रमाण पत्र के साथ प्रस्तुत किए जाएँ और उनकी प्रासंगिकता सिद्ध की जा सके, तो अदालत उन्हें भी स्वीकार कर सकती है।
उदाहरण के लिए —
यदि किसी धमकी या धोखाधड़ी के मामले में वॉइस नोट स्पष्ट रूप से अपराध सिद्ध कर रहा हो, तो वह निर्णायक साक्ष्य बन सकता है।
🔹 पुलिस जांच और डिजिटल साक्ष्य
अपराध की जांच के दौरान पुलिस डिजिटल फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं (Digital Forensic Labs) की मदद से WhatsApp चैट को रिकवर और प्रमाणित कराती है।
जांच अधिकारी को यह सुनिश्चित करना होता है कि:
- चैट के मूल स्रोत (Original Device) को सील किया जाए,
- उसकी Hash Value (डिजिटल पहचान) सुरक्षित रखी जाए,
- और प्राप्त रिकॉर्ड्स की प्रमाणिकता रिपोर्ट अदालत को दी जाए।
🔹 WhatsApp चैट कब स्वीकार नहीं की जाती?
अदालत निम्न परिस्थितियों में WhatsApp चैट को अस्वीकार कर सकती है:
- जब 65-B प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया हो।
- जब चैट की स्रोत डिवाइस संदिग्ध हो।
- जब चैट एडिट या मॉडिफाई की गई हो।
- जब चैट का केस से कोई प्रत्यक्ष संबंध न हो।
- जब चैट एकतरफा (Unverified) हो, यानी दूसरी पार्टी उसकी पुष्टि न करे।
🔹 उदाहरण द्वारा समझें
मान लीजिए, किसी महिला ने अपने पति पर घरेलू हिंसा का आरोप लगाया है और उसके पास WhatsApp चैट में पति के धमकी भरे संदेश हैं।
वह यदि अदालत में केवल स्क्रीनशॉट पेश करती है, तो न्यायालय कहेगा —
“आपको इस चैट की प्रमाणिकता साबित करनी होगी — यानी यह संदेश उसी व्यक्ति ने भेजे हैं और यह रिकॉर्ड असली है।”
अगर वह चैट का 65-B प्रमाण पत्र पेश करती है, और उसका मोबाइल जब्त कर पुलिस फॉरेंसिक जांच कराती है, तो अदालत इसे प्रमाणिक साक्ष्य मान लेगी।
🔹 WhatsApp चैट और निजता का अधिकार
के. एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ (2017) में सर्वोच्च न्यायालय ने “गोपनीयता के अधिकार” (Right to Privacy) को संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मौलिक अधिकार घोषित किया।
इसका अर्थ है कि किसी व्यक्ति की निजी चैट को बिना अनुमति या उचित कानूनी प्रक्रिया के अदालत में पेश नहीं किया जा सकता।
अतः, यदि चैट को प्रस्तुत करने वाला व्यक्ति गोपनीयता का उल्लंघन करता है, तो उसे दंडात्मक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
🔹 डिजिटल युग में साक्ष्य का बदलता स्वरूप
WhatsApp चैट के मामलों ने भारतीय न्याय प्रणाली को एक नए युग में प्रवेश कराया है, जहाँ डिजिटल साक्ष्य पारंपरिक दस्तावेज़ों से अधिक प्रभावी साबित हो रहे हैं।
अब न्यायालयों ने यह स्वीकार किया है कि ईमेल, चैट, कॉल रिकॉर्डिंग, GPS डेटा, CCTV फुटेज आदि सत्यापन योग्य साक्ष्य हैं — बशर्ते वे कानूनी नियमों के अनुरूप प्रस्तुत किए जाएँ।
🔹 निष्कर्ष
इस प्रकार, यह स्पष्ट है कि —
✅ WhatsApp चैट अदालत में साक्ष्य (Evidence) के रूप में प्रस्तुत की जा सकती है।
लेकिन,
⚖️ इसे स्वीकार करने के लिए निम्नलिखित शर्तें अनिवार्य हैं:
- चैट असली होनी चाहिए।
- 65-B प्रमाण पत्र के साथ होनी चाहिए।
- केस के मुद्दे से संबंधित होनी चाहिए।
- चैट का स्रोत और संदर्भ स्पष्ट होना चाहिए।
केवल स्क्रीनशॉट दिखा देना पर्याप्त नहीं है।
यदि चैट में छेड़छाड़ की संभावना हो या उसका केस से कोई प्रत्यक्ष संबंध न हो, तो अदालत उसे सबूत के रूप में खारिज कर सकती है।
🔹 अंतिम विचार
आज के समय में, जब हर बात डिजिटल माध्यम से होती है, तब डिजिटल साक्ष्य की विश्वसनीयता न्याय प्रणाली के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है।
WhatsApp चैट सच्चाई को उजागर करने का एक सशक्त माध्यम हो सकती है, लेकिन केवल तभी जब उसे कानूनी तरीके से प्रमाणित किया जाए।
इसलिए, अगर कभी आपको किसी केस में WhatsApp चैट को सबूत के रूप में प्रस्तुत करना हो, तो ध्यान रखें:
“सिर्फ चैट नहीं, उसकी प्रमाणिकता ही असली सबूत है।”