हर अनधिकृत फोटो या वीडियो ‘वॉय्यूरिज़्म’ नहीं –Tuhin Kumar Biswas @ Bumba बनाम State of West Bengal में सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण व्याख्या
भूमिका
महिलाओं की गरिमा, निजता और सुरक्षा भारतीय दंड कानून का एक महत्वपूर्ण विषय है। इसी उद्देश्य से भारतीय दंड संहिता में धारा 354C – वॉय्यूरिज़्म (Voyeurism) को शामिल किया गया, ताकि महिलाओं की निजी गतिविधियों को चोरी-छिपे देखने, रिकॉर्ड करने या प्रसारित करने जैसे कृत्यों को दंडित किया जा सके।
हालाँकि, तकनीक के विकास और मोबाइल फोन के व्यापक उपयोग के कारण यह प्रश्न बार-बार उठता है कि—
क्या किसी महिला की बिना सहमति फोटो या वीडियो बनाना हर स्थिति में धारा 354C IPC के अंतर्गत अपराध होगा?
इसी प्रश्न का महत्वपूर्ण और संतुलित उत्तर सुप्रीम कोर्ट ने Tuhin Kumar Biswas @ Bumba बनाम State of West Bengal मामले में दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
इस मामले में आरोपी पर आरोप था कि उसने—
- एक महिला की मोबाइल फोन से तस्वीरें और वीडियो बनाए
- यह कार्य महिला की सहमति के बिना किया गया
महिला पक्ष ने इसे वॉय्यूरिज़्म बताते हुए IPC की धारा 354C के अंतर्गत कार्रवाई की मांग की।
निचली अदालतों में मामला आगे बढ़ा और अंततः यह प्रश्न सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पहुँचा कि—
क्या यह कृत्य वास्तव में “वॉय्यूरिज़्म” की कानूनी परिभाषा में आता है?
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मुख्य कानूनी प्रश्न
न्यायालय के सामने निम्नलिखित महत्वपूर्ण प्रश्न थे—
- धारा 354C IPC के अंतर्गत “वॉय्यूरिज़्म” की आवश्यक शर्तें क्या हैं?
- क्या किसी महिला की बिना सहमति फोटो या वीडियो बनाना, जब वह निजी कृत्य (Private Act) में लिप्त न हो, अपराध होगा?
- “निजी कृत्य” (Private Act) की कानूनी व्याख्या क्या है?
धारा 354C IPC : वॉय्यूरिज़्म का कानूनी ढांचा
सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में सबसे पहले धारा 354C IPC की संरचना को स्पष्ट किया।
धारा 354C के अनुसार—
यदि कोई पुरुष किसी महिला को निजी कृत्य (Private Act) में संलग्न अवस्था में—
- देखता है,
- उसकी छवि बनाता है,
- वीडियो रिकॉर्ड करता है,
- या उस सामग्री को प्रसारित करता है,
और यह सब महिला की सहमति के बिना किया जाता है,
तो वह वॉय्यूरिज़्म का अपराध होगा।
“निजी कृत्य” (Private Act) की व्याख्या
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि—
“वॉय्यूरिज़्म का अपराध तभी बनता है, जब महिला किसी ऐसे कृत्य में संलग्न हो, जिसकी उसे निजता की वैध अपेक्षा हो।”
निजी कृत्य में सामान्यतः शामिल हैं—
- स्नान करना
- कपड़े बदलना
- शौचालय का उपयोग
- कोई ऐसा निजी व्यवहार, जिसे सार्वजनिक दृष्टि से दूर रखा जाना स्वाभाविक है
सुप्रीम कोर्ट की प्रमुख टिप्पणी
न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा—
“केवल किसी महिला की बिना सहमति फोटो या वीडियो बना लेना, जब वह किसी निजी कृत्य में संलग्न न हो, धारा 354C IPC के अंतर्गत वॉय्यूरिज़्म नहीं माना जा सकता।”
इस प्रकार कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि—
- सहमति का अभाव अकेला तत्व पर्याप्त नहीं
- निजी कृत्य का होना अनिवार्य शर्त है
हर अनैतिक कृत्य, हर अपराध नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि—
“कानून और नैतिकता एक-दूसरे के पर्याय नहीं हैं।”
अर्थात—
- कोई कृत्य अनैतिक, आपत्तिजनक या अशोभनीय हो सकता है
- लेकिन जब तक वह कानून में परिभाषित अपराध की आवश्यक शर्तों को पूरा न करे, उसे दंडित नहीं किया जा सकता
यह सिद्धांत आपराधिक कानून की मूल भावना को दर्शाता है।
अन्य धाराओं की संभाव्यता
हालाँकि कोर्ट ने यह भी कहा कि—
- यदि परिस्थितियाँ उपयुक्त हों, तो
- IPC की अन्य धाराएँ, जैसे—
- धारा 354 (महिला की लज्जा भंग)
- धारा 509 (शब्द, इशारा या कृत्य द्वारा लज्जा अपमान)
- आईटी एक्ट की धाराएँ
लागू हो सकती हैं।
अर्थात आरोपी स्वतः निर्दोष नहीं हो जाता, केवल धारा 354C लागू नहीं होगी।
निजता के अधिकार और आपराधिक कानून का संतुलन
इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने—
- अनुच्छेद 21 (निजता का अधिकार)
- और दंड कानून की सख्त व्याख्या
के बीच संतुलन बनाए रखा।
कोर्ट ने कहा—
आपराधिक कानून का विस्तार अनुमान या भावनाओं के आधार पर नहीं किया जा सकता।
महिला सुरक्षा कानूनों के दुरुपयोग पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी
यह निर्णय इस बात की भी ओर संकेत करता है कि—
- महिला सुरक्षा कानून अत्यंत आवश्यक हैं
- लेकिन उनका प्रयोग कानूनी सीमाओं के भीतर होना चाहिए
कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि—
कानून का उद्देश्य संरक्षण है, प्रतिशोध नहीं।
डिजिटल युग में इस निर्णय का महत्व
आज के समय में—
- मोबाइल फोन
- सोशल मीडिया
- सार्वजनिक स्थानों पर वीडियो रिकॉर्डिंग
सामान्य बात हो गई है।
यह फैसला बताता है कि—
- हर रिकॉर्डिंग अपराध नहीं
- अपराध तय करने के लिए परिस्थिति और मंशा महत्वपूर्ण हैं
भविष्य के मामलों पर प्रभाव
यह निर्णय—
- पुलिस जाँच
- चार्जशीट दाखिल करने
- ट्रायल कोर्ट के दृष्टिकोण
पर सीधा प्रभाव डालेगा।
अब—
- धारा 354C लगाने से पहले
- यह जांचना अनिवार्य होगा कि
क्या महिला किसी निजी कृत्य में थी या नहीं
कानून छात्रों और परीक्षाओं के लिए उपयोगिता
यह केस विशेष रूप से महत्वपूर्ण है—
- IPC धारा 354C
- महिला अपराधों की व्याख्या
- Strict Interpretation of Penal Statutes
UPSC, Judiciary, Law Exams में यह निर्णय अत्यंत उपयोगी है।
समाज के लिए संदेश
यह फैसला समाज को यह संदेश देता है कि—
- महिलाओं की निजता का सम्मान अनिवार्य है
- लेकिन अपराध तय करने में कानून की स्पष्ट सीमाएँ हैं
- न्याय भावना और विधि दोनों पर आधारित होता है
निष्कर्ष
Tuhin Kumar Biswas @ Bumba बनाम State of West Bengal में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय एक संतुलित, तर्कसंगत और विधि-सम्मत व्याख्या प्रस्तुत करता है।
इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि—
- हर अनधिकृत फोटो या वीडियो वॉय्यूरिज़्म नहीं
- “निजी कृत्य” धारा 354C की आत्मा है
- आपराधिक कानून का विस्तार सावधानी से किया जाना चाहिए
यह निर्णय महिला सुरक्षा, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और विधिक अनुशासन—तीनों के बीच संतुलन का उत्कृष्ट उदाहरण है।