Supreme Court to Hear Jana Nayagan Censor Certificate Dispute: Producer KVN Productions LLP Challenges Madras High Court Stay on CBFC Clearance
सुप्रीम कोर्ट में खुला विवाद: ‘जना नायक’ फिल्म का सर्टिफिकेशन रोकने वाली मद्रास HC की रोक के खिलाफ निर्माता KVN Productions LLP की चुनौती
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने आगामी 15 जनवरी 2026 को थलापथि विजय अभिनीत तमिल फिल्म जना नायक (Jana Nayagan) से जुड़े सर्टिफिकेशन विवाद को सुने जाने की तिथि निर्धारित की है। कोर्ट के सामने वह याचिका आएगी जिसमें फिल्म के निर्माता KVN Productions LLP ने मद्रास उच्च न्यायालय (Madras High Court) के एक डिविजन बेंच के आदेश को चुनौती दी है, जिसने फिल्म को तुरंत प्रमाणपत्र देने के लिए Central Board of Film Certification (CBFC) को निर्देश देने वाले एकल न्यायाधीश के निर्णय पर रोक लगा दी थी।
यह मामला न केवल फिल्म उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि यह सिनेमा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रशासकीय प्रक्रिया के बीच न्यायिक नियंत्रण का भी चिंतास्पद उदाहरण बन गया है।
विवाद की पृष्ठभूमि
Jana Nayagan को साल 2026 के पोंगल महोत्सव के दौरान 9 जनवरी को रिलीज़ करने की योजना थी, और उसके लिए समय पूर्व ही CBFC से U/A 16+ प्रमाणपत्र की मांग की गई थी। निर्माता ने फ़िल्म को दिसंबर 2025 के अंत में सीबीएफसी की समीक्षा के लिए प्रस्तुत किया था।
CBFC की Examining Committee ने फ़िल्म सामग्री की समीक्षा के बाद U/A 16+ सर्टिफिकेट देने की सिफ़ारिश की थी, जिसमें कुछ कट और बदलाव की शर्तें भी शामिल थीं। निर्माता ने इन संशोधनों को स्वीकार किया और 24 दिसंबर 2025 को संशोधित फ़िल्म फिर से सब्मिट कर दी थी। इसके बाद CBFC के चेन्नई क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा 29 दिसंबर 2025 को निर्माता को सूचित किया गया कि संशोधित फ़िल्म को प्रमाणित किया जाएगा।
लेकिन उसी बीच एक शिकायत आई जिसमें कहा गया कि फ़िल्म में धार्मिक भावनाओं को आहत किया जा सकता है और सशस्त्र बलों का अनुचित चित्रण देखा गया है। इसके कारण CBFC के अध्यक्ष ने फ़िल्म को Revising Committee के पास भेजने का निर्णय लिया, जिससे सर्टिफिकेशन प्रक्रिया में और विलंब हो गया।
मद्रास हाईकोर्ट का फैसला
उत्प्रेरित होकर निर्माता ने 6 जनवरी 2026 को मद्रास हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया और फ़िल्म के प्रमाणपत्र न मिलने से हुई देरी के खिलाफ न्याय की मांग की। इसी याचिका को जस्टिस पी. टी. आषा ने 9 जनवरी 2026 को सुना और CBFC को तुरंत U/A सर्टिफिकेट जारी करने का आदेश दिया।
जस्टिस आषा का तर्क था कि एक बार जब Examining Committee ने सर्टिफिकेशन के लिए सकारात्मक सिफ़ारिश की है और फ़िल्म के प्रोड्यूसर ने आवश्यक संशोधन प्रदान कर दिए हैं, तो CBFC अध्यक्ष के पास Revising Committee को भेजने का औचित्य समाप्त हो जाता है। इसी आधार पर उन्होंने तुरंत प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया।
उच्च न्यायालय की डिविजन बेंच ने रोक लगाई
हालांकि उसी दिन CBFC ने उच्च न्यायालय में अपील कर दी। इसके बाद Madras High Court की डिविजन बेंच ने Justice M.M. श्रीवास्तव और Justice G. अरुल मुरुगन की अध्यक्षता में सिंगल बेंच के उस निर्णय को रोका, जिसने सीबीएफसी को तुरंत सर्टिफिकेट देने का आदेश दिया था।
डिविजन बेंच ने कहा कि चूँकि याचिका 6 जनवरी को ही दाख़िल की गई थी और CBFC को अपनी प्रतिक्रिया देने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया, इसलिए सिंगल जज के आदेश को स्टे कर दिया गया और मामले को 21 जनवरी 2026 तक सुनवाई के लिए रखा गया।
इसका मतलब यह हुआ कि फिल्म Jana Nayagan को पोंगल के अवसर पर समय से रिलीज़ नहीं किया जा सकता, और इसका वाणिज्यिक व दर्शकीय प्रभाव बहुत बड़ा है क्योंकि यह थलापथि विजय के अभिनय करियर के अंतिम प्रोजेक्ट में से एक है।
Supreme Court में याचिका: KVN Productions LLP की चुनौती
इन परिस्थितियों में निर्माता KVN Productions LLP ने 13 जनवरी 2026 को Supreme Court of India में अपील दाख़िल की है, जिसमें उन्होंने Madras High Court की डिविजन बेंच के आदेश (जो एकल बेंच के फैसले पर रोक लगा रहा है) को चुनौती दी है और उसे रोकने के लिए तत्काल अंतरिम राहत देने का अनुरोध किया है।
इस याचिका (Special Leave Petition / SLP) में निर्माता ने यह अनुरोध किया है कि 9 जनवरी 2026 के हाईकोर्ट के आदेश का प्रभाव रोका जाए, ताकि CBFC तुरंत फ़िल्म को प्रमाणित कर सके। याचिका में ex‑parte interim / ad‑interim stay का भी आग्रह किया गया है, जिसका मतलब है कि सीबीआई परिषद को जवाब देने का अवसर पहले न दिए बिना भी आदेश दी जा सकती है।
सूत्रों के अनुसार, यह मामला Diary No. 1894/2026 के तहत दाख़िल हुआ है और इसे जल्द से जल्द सूचीबद्ध करके खंडपीठ के समक्ष रखा जाएगा।
Supreme Court में सुनवाई: क्या मुद्दे हैं?
1. प्रशासकीय प्रक्रिया और नियमन
मुख्य प्रश्न यह है कि क्या CBFC अध्यक्ष को Revising Committee को मामला भेजने का अधिकार था, खासकर जब Examining Committee पहले ही सर्टिफिकेशन की सिफ़ारिश कर चुकी थी। निर्माता पक्ष का दावा है कि यह एक अवैध ‘volte‑face’ या निर्णय में अकारण बदलाव था।
2. समीक्षा और न्यायिक हस्तक्षेप
दूसरा मुद्दा यह है कि क्या सिंगल बेंच का आदेश, जिसमें तुरंत सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया गया, सही था। इसके विपरीत हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने कहा कि CBFC को पर्याप्त मौका दिए बिना ऐसा निर्णय नहीं देना चाहिए था।
3. रिलीज़ की समय‑सीमा और आर्थिक प्रभाव
यह भी एक बड़ा मुद्दा है कि यदि प्रमाणपत्र समय पर नहीं मिला, तो फ़िल्म पोंगल रिलीज़ विंडो से चूक जाएगी, जिसके कारण लाखों रुपये की आर्थिक क्षति और वितरण समझौतों पर असर पड़ेगा।
4. संवैधानिक अधिकार और उद्योग की आज़ादी
ट्रेड प्रतिनिधियों और वकीलों का यह भी कहना है कि यह मामला रचनात्मक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यवसाय के अधिकार (Article 19(1)(a) एवं Article 19(1)(g)) का सवाल भी खड़ा करता है, क्योंकि अनुचित और देरी वाली सर्टिफिकेशन रुकावट फिल्म की रनिंग और व्यवसाय पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है.
CBFC का पक्ष और प्रतिक्रिया
CBFC ने Supreme Court में एक कैविएट (Caveat) दाख़िल किया है, जिसमें उसने आग्रह किया है कि कोर्ट कोई आदेश दें उससे पहले बोर्ड को खुद सुनाया जाना चाहिए। CBFC का तर्क है कि इस पूरे विवाद का निर्णय लिया जाना चाहिए जब दोनों पक्षों को अपना पक्ष प्रस्तुत करने का पूरा अवसर मिले.
इसके अलावा CBFC की प्राथमिक चिंता यह रही कि फ़िल्म में कुछ धार्मिक भावनाओं और सशस्त्र बलों के प्रतीकों के चित्रण जैसे संवेदनशील मुद्दों के कारण प्रारंभिक निर्णय को समीक्षा के लिए भेजा गया था, जिसे बोर्ड को गंभीरता से देखना चाहिए।
फ़िल्म जगत और जनता की प्रतिक्रिया
Jana Nayagan को थलापथि विजय का एक महानतम और अंतिम फिल्म प्रयास माना जा रहा था, क्योंकि अभिनेता ने हाल ही में राजनीति में प्रवेश किया है और इसे अपने करियर की आख़िरी बड़ी प्रस्तुति के रूप में प्रतीक्षित किया जा रहा था।
मद्रास हाईकोर्ट के Stay आदेश के बाद फ़िल्म की लॉन्चिंग और प्रदर्शनार्थ योजनाएं प्रभावित हुईं, जिससे प्रशंसकों और उद्योग के भीतर तनाव और निराशा फैल गई। कुछ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इसी विवाद ने अभिनेता विजय की पुरानी फिल्मों के री‑रिलीज़ शेड्यूल्स में भी बदलाव करने पर मजबूर कर दिया है.
फिल्म निर्माता के. वेंकट क. नरायण ने सार्वजनिक बयान जारी कर प्रशंसकों से क्षमा प्रकट की है और उन्होंने न्यायपालिका और प्रक्रिया पर भरोसा जताया है, जबकि यह भी कहा गया कि विजय एक योग्य प्रतिष्ठित अभिनेता हैं और उनका सही समापन होना चाहिए।
निष्कर्ष: सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का महत्त्व
आगामी 15 जनवरी 2026 की Supreme Court hearing को कम नहीं आँका जा सकता। यह मामला सर्टिफिकेशन प्रक्रिया, न्यायिक समीक्षा, प्रशासकीय अधिकार और फिल्म‑उद्योग के हितों के समन्वय का परीक्षण करेगा। कोर्ट यह निर्धारित करेगा कि क्या Madras High Court की डिविजन बेंच का स्टे आदेश उचित था या एकल जज के तुरंत प्रमाणपत्र देने के आदेश को बहाल किया जाना चाहिए।
यह केस यह भी स्पष्ट करेगा कि CBFC के निर्णयों पर न्यायालय किस सीमा तक हस्तक्षेप कर सकता है, और सहमति/अनुमोदन के बीच में आए विवादों को न्यायिक प्रक्रिया कैसे संबोधित करती है। इसके पीछे फिल्म‑उद्योग के संवैधानिक और आर्थिक अधिकार भी जुड़े हैं, जो आगे की न्यायिक व्याख्या और नियमन के लिए मिसाल बन सकते हैं।