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“संघीय अनुचित प्रतिस्पर्धा पर बड़ा प्रहार: रक्षा टेंडर में बिड रिगिंग का खुलासा — CCI ने दिखाया कड़ी कार्रवाई का रास्ता”

“संघीय अनुचित प्रतिस्पर्धा पर बड़ा प्रहार: रक्षा टेंडर में बिड रिगिंग का खुलासा — CCI ने दिखाया कड़ी कार्रवाई का रास्ता”

परिचय

      भारत में सार्वजनिक संरक्षण और प्रतिस्पर्धा (Competition) का संतुलन बनाए रखना सिर्फ़ बाज़ार की पारदर्शिता के लिए महत्वपूर्ण नहीं है — यह राष्ट्रीय सुरक्षा, सरकारी ख़र्च की बचत और लघु व मध्यम उद्योगों (MSMEs) के हितों के लिए भी अनिवार्य है। इस दृष्टि से प्रतिस्पर्धा आयोग ऑफ़ इंडिया (Competition Commission of India — CCI) की हाल की कार्रवाई अत्यंत महत्वपूर्ण बन गई है, जिसमें उसने रक्षा मंत्रालय द्वारा निकाले गए निविदा (defence tender) में साठगांठ (bid rigging/collusive bidding) का स्पष्ट खुलासा किया है और दोषी कंपनियों के ख़िलाफ़ सीज़ और डिसिस्ट (cease-and-desist) आदेश जारी किए हैं। यह कदम यह दर्शाता है कि सरकारी प्रक्रियाओं और सार्वजनिक क्रय (public procurement) में न्याय और प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए CCI कितनी सख्त रुख़ अपनाता है।


1. CCI की भूमिका और प्रतियोगिता अधिनियम: परिचय

       भारत में प्रतिस्पर्धा के नियम Competition Act, 2002 के तहत तय होते हैं, जिसका उद्देश्य है बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनाए रखना, उपभोक्ता हितों की रक्षा करना, और प्रतिबंधात्मक व्यापार कृत्यों (anti-competitive practices) से बचाव करना।

     इन प्रावधानों के अंतर्गत bid rigging या collusive bidding जैसे अनुचित व्यवहार को सख़्ती से निषेध किया गया है। जब कंपनियाँ मिलकर अपनी बोली (bid) की कीमतें तय करती हैं या प्रतिस्पर्धा को समाप्त करती हैं, तो यह केवल सरकारी ख़र्च को बढ़ाता है बल्कि वास्तविक मूल्य प्रतिस्पर्धा का क्षरण भी करता है — जिससे देश और उपभोक्ता दोनों को आर्थिक हानि होती है।


2. मामला: रक्षा टेंडर में बिड रिगिंग

      हाल ही में CCI ने लुधियाना स्थित दो कपड़ा (textile) कंपनियों — KKK Mills और Sankeshwar Synthetics Pvt Ltd को डिफ़ेंस विभाग द्वारा निकाले गए रक्षा टेंडर (woollen undergarments) में कोलुसिव बिडिंग और बिड रिगिंग में दोषी पाया

      यह टेंडर Directorate General of Ordnance Services (DGOS) द्वारा प्रकाशित किया गया था। CCI ने पाया कि दोनों कंपनियों ने एक समान (identical) कीमतें प्रस्तुत कीं, बोली जमा करने के समय में समान व्यवहार दिखाया और इस तरह वस्तुतः प्रतिस्पर्धा को खत्म कर दिया, जो स्पष्ट anti-competitive conduct के दायरे में आता है — ऐसा CCI ने Section 3(3)(d) और Section 3(1) के तहत माना।

       न केवल यह पाया गया कि उन्होंने समान दरें लागू कीं, बल्कि यह भी आरोप लगा कि उनके बीच बाज़ार में प्रतिस्पर्धा को सीमित करने जैसा व्यवहार था, जिससे CCI ने यह निष्कर्ष निकाला कि गतिविधियाँ सीधे cartelisation और बिड रिगिंग के स्वरूप में हैं।


3. CCI का आदेश और दंडात्मक कार्रवाई

       दिनांक2 जनवरी 2026 को CCI ने दूसरे पक्ष के खिलाफ सीज़ एंड डिसिस्ट आदेश जारी किया, जिसमें उन दोनों कंपनियों को भविष्य में किसी भी अवैध प्रतिस्पर्धात्मक कृत्य से रोकने का निर्देश दिया गया। साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इन कंपनियों के कुछ प्रमुख अधिकारियों पर व्यक्तिगत रूप से भी Section 48 के तहत व्यक्तिगत जिम्मेदारी लागू होती है।

       यह आदेश Section 27 के तहत पारित हुआ, जो CCI को अधिकार देता है कि वह ऐसे व्यवहार को तुरंत रोकने के लिए निर्देश जारी करे। यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि जैसे-जैसे सरकारी निवेश बढ़े और टेंडर निकाले जाएं, उनका मूल्य और ईमानदारी से चयन सुनिश्चित हो — खासकर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील अनुबंधों में।


4. CCI के ढांचे के तहत बिड रिगिंग की पहचान कैसे होती है?

बिड रिगिंग का पता लगाने के लिए CCI यह जांच करता है कि क्या:

  • कीमतें अनुचित रूप से समान हैं,
  • बोली जमा करने का समय और पैटर्न काफी समान है,
  • कंपनियों के बीच संचार या समझौते के संकेत मौजूद हैं,
  • और कोई पुराना व्यवहार या कंप्लेंट इस दिशा में संकेत दे रहा है।

अक्सर यह चेतावनी होती है कि जब बोली देने वाली फर्मों की कीमतों में वहनीय समानता अधिक हो — तो यह सिर्फ संयोग नहीं, बल्कि आशयपूर्ण सहयोग (collusion) हो सकता है। CCI ऐसे मामलों में व्यवस्थित जांच के ज़रिये धोखाधड़ी की पहचान करता है और उसी के आधार पर सीज़ और डिसिस्ट या दंडात्मक कार्रवाई करता है।


5. रक्षा टेंडर मामला: राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव

जब यह इंजीनियरिंग या औद्योगिक टेंडरों की बात होती है, तो बिड रिगिंग केवल अर्थशास्त्र का मामला नहीं रह जाता — यह राष्ट्रीय सुरक्षा और सशस्त्र बलों की ज़रूरतों पर भी सीधा प्रभाव डालता है। यहाँ टेंडर डिफ़ेंस वर्दी के अंतर्गत प्रयुक्त होने वाली वस्तुओं के लिए थे — ऐसे संवेदनशील उपकरण जो हमारी सेनाओं की आवश्यकताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। अगर कीमतों में अनुचित वृद्धि होती है या प्रतिस्पर्धा घटती है, तो इसका प्रभाव बदलते सुरक्षा प्रतिमानों और ख़र्च की अनावश्यक वृद्धि के रूप में सामने आता है।

CCI का यह कदम इसीलिए महत्वपूर्ण है कि उसने साफ़ संकेत दिया कि सरकारी ख़र्च में पारदर्शिता, उच्‍च प्रतिस्पर्धा और अनुचित व्यवहार से होने वाली लागत को सहन नहीं किया जाएगा। इससे भविष्य में ऐसे अनुचित अभ्यासों पर नियंत्रण पाने में आसानी मिलेगी।


6. क्यों हुआ मामला सामने? CCI की जांच प्रक्रिया

यह मामला CCI द्वारा DGOS की शिकायत के आधार पर शुरू हुआ, जो मानता था कि मौजूद ढांचे में प्रतिस्पर्धा सीमित थी। CCI ने बाद में अध्ययन किया कि दोनों कंपनियों द्वारा पेश किए गए एक जैसी बोली क्यों थी। जांच में यह पाया गया कि दोनों फर्में समान दरें देकर एक तय पैटर्न के तहत बोली तैयार कर रही थीं — जिससे यह संकेत मिलता है कि उन्होंने प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग का विकल्प चुना था

यह सहयोग केवल कीमत तय करने तक सीमित नहीं था — इसके ज़रिये वास्तविक प्रतिस्पर्धा के अवसरों को भी समाप्त कर दिया गया, जिससे सरकार को निर्धारित मूल्य से अधिक भुगतान करना पड़ा और बाज़ार में प्रतिस्पर्धा का अवसान हुआ


7. CCI कार्रवाई का प्रभाव: उद्योगों में चेतावनी

इस आदेश का प्रभाव व्यापक उद्योगों पर पड़ेगा, क्योंकि यह साफ़ संकेत देता है कि CCI अब विशेष रूप से प्रतिस्पर्धात्मक व्यवहार में अपारदर्शिता और साठगांठ के मामलों को गंभीरता से ले रहा है। इससे छोटे और मध्यम उद्योगों को भी यह संकेत मिलेगा कि ईमानदारी से प्रतिस्पर्धा करने पर ही उन्हें लाभ मिलेगा, न कि अनुचित रीतियों के सहारे


8. निष्कर्ष: भारत में प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता की दिशा

        CCI द्वारा जारी यह नवीन आदेश यह स्पष्ट करता है कि बिड रिगिंग और कार्टेल जैसी गतिविधियाँ सिर्फ़ गलत ही नहीं बल्कि अवैध भी हैं, और कोई भी कंपनी जो इस तरह के व्यवहार में लिप्त पाई जाती है, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। इस कदम का असर सिर्फ़ उन दो कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा — यह पूरे व्यवसाय समुदाय के लिए एक चेतावनी है कि बाज़ार में पारदर्शिता, प्रतियोगिता और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हैं।