श्री पंकज मोहन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य — GST रजिस्ट्रेशन की बहाली (Restoration) पर गौहाटी हाई कोर्ट का प्रमुख निर्णय
भारत में Goods and Services Tax (GST) का प्रशासनिक ढांचा एक सख्त अनुपालन-आधारित व्यवस्था है जिसमें रिटर्न (GST Returns) नियमित रूप से दाखिल करना अनिवार्य है। यदि कोई करदाता लगातार छह महीने तक GST रिटर्न दाखिल नहीं करता, तो उसके GST पंजीकरण (Registration) को अनुमंडल अधिकारी (Appropriate Officer) रद्द (Cancelled) कर सकता है। यह प्रावधान Section 29(2)(c) of the CGST Act, 2017 के अंतर्गत स्पष्ट रूप से निहित है।
गौहाटी उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय में GST पंजीकरण के पुनर्स्थापन (Restoration) से जुड़ा एक समाहित और न्यायसंगत दिशा-निर्देश दिया है, जिसका शीर्षक है:
Shri Pankaj Mohan Vs. The Union of India & Anr.
(Gauhati High Court – W.P.(C) No. ___ of 2025)
इस निर्णय में न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि यदि कोई करदाता रिटर्न दाखिल नहीं करने की वजह से पंजीकरण खो देता है लेकिन बाद में सभी लंबित रिटर्न दाखिल कर देता है और टैक्स, ब्याज तथा विलम्ब शुल्क चुका देता है, तो उसे GST पंजीकरण बहाल करने का अवसर दिया जाना चाहिए, भले ही समय-सीमा समाप्त हो गई हो।
1. पृष्ठभूमि और तथ्य (Facts of the Case)
श्री पंकज मोहन (Petitioner) एक एकल स्वामित्व (Proprietorship) व्यवसाय के रूप में “M/s …” नाम से CGST और AGST दोनों के अंतर्गत पंजीकृत थे। उनके व्यवसाय का GST पंजीकरण था, लेकिन वे लगातार छह महीनों से GST रिटर्न दाखिल नहीं कर रहे थे। इस वजह से GST अधिकारियों ने Show Cause Notice जारी किया, जिसमें कहा गया:
- 30 दिनों के भीतर जवाब दें, अन्यथा पंजीकरण रद्द किया जाएगा।
- यदि जवाब नहीं दिया जाता या सुनवाई में उपस्थित नहीं होते तो मामला Ex-parte तय किया जाएगा।
लेकिन पंकज मोहन GST पोर्टल के ऑनलाइन सिस्टम से अच्छी तरह से परिचित नहीं थे और इसी वजह से उन्होंने समय पर जवाब नहीं दिया। परिणामस्वरूप अधिकारियों ने 15.07.2024 के आदेश द्वारा GST पंजीकरण रद्द कर दिया।
इसके बाद, उन्होंने:
- पहले सभी लंबित रिटर्न दाखिल किए, और
- बकाया GST टैक्स, ब्याज और विलम्ब शुल्क का पूरा भुगतान किया।
जब उन्होंने पुनः पंजीकरण बहाल करने के लिए आवेदन किया, तो पोर्टल ने संदेश दिखाया कि 270-दिन की revocation की समय-सीमा पहले ही समाप्त हो चुकी है, इसलिए उनका आवेदन स्वीकृत नहीं किया जा सकता था।
पुनः अपील (Appeal) भी की गई, पर वह भी अस्वीकृत (Dismissed) कर दी गई।
अंततः उन्होंने गौहाटी उच्च न्यायालय में Writ Petition दायर की, जिसमें कहा गया कि रजिस्ट्रेशन रद्द होना उचित नहीं था और यदि सभी अनुपालन किए गए हैं, तो पंजीकरण बहाल होना चाहिए।
2. सम्बंधित कानूनी प्रावधान
इस पूरे विवाद के केन्द्र में मुख्यतः तीन कानून/नियम हैं:
a. Section 29(2)(c) of the CGST Act, 2017
यह प्रावधान स्पष्ट करता है कि यदि कोई करदाता लगातार 6 महीने तक रिटर्न दाखिल नहीं करता, तो उनका पंजीकरण रद्द किया जा सकता है।
b. Rule 22 of the CGST Rules, 2017
यह विशिष्ट रूप से रजिस्ट्रेशन के रद्द करने की प्रक्रिया को परिभाषित करता है। इसमें एक महत्वपूर्ण उप-प्रावधान है:
Proviso to Sub-Rule (4): यदि करदाता लंबित रिटर्न दाखिल कर देता है और पूरे बकाया टैक्स, ब्याज और विलम्ब शुल्क चुका देता है, तो अधिकारी को GST_REG-20 फॉर्म में रद्द करने की प्रक्रिया को रोककर पंजीकरण बहाल करने पर विचार करना चाहिए।
यह उप-प्रावधान न सिर्फ कानूनी आधार देता है, बल्कि यह यह भी सुनिश्चित करता है कि तकनीकी या त्रुटिपूर्ण अनुपालन की वजह से करदाता को व्यवसाय खोने जैसा दंड न सहना पड़े।
3. न्यायालय का तर्क (Court’s Reasoning)
गौहाटी हाई कोर्ट ने निर्णय में प्रमुख रूप से निम्नलिखित आधार पर अपने निर्णय को मजबूती दी:
i. गंभीर नागरिक परिणाम (Serious Civil Consequences)
GST पंजीकरण रद्द होना करदाता के लिए एक गंभीर परिणाम है। जब तक करदाता बिना किसी धोखाधड़ी के केवल तकनीकी कारणों से अनुपालन चूक रहा है, उसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था से विमुख नहीं होना चाहिए।
ii. नियम 22(4) का प्रावधान
Rule 22(4) का प्रोविज़ो स्पष्ट रूप से कहता है कि यदि करदाता सब कुछ पूरा कर देता है, तो अधिकारी को रद्द करने की प्रक्रिया को रोक देना चाहिए और उसे पंजीकरण बहाल करने का अवसर देना चाहिए। यही न्यायालय ने लागू किया।
iii. Revocation की समय-सीमा के मूल भाव की तुलना
कुछ मामलों में, समय-सीमा (270 दिन) के कारण आवेदक को आवेदन नहीं दे पाने के कारण से भी पंजीकरण खोना पड़े। न्यायालय ने फोटो-कॉप्युट जैसे तकनीकी प्रतिबंध को संशय के लिए कारण नहीं माना और कहा कि जब करदाता सभी अनुपालन कर चुका है, तो उसे पुनर्स्थापना का अवसर मिलना चाहिए।
iv. न्यायिक समानता (Judicial Precedent)
न्यायालय ने इसी तरह के मामलों (जैसे Dhirghat Hardware Stores) को उद्धृत किया, जिसमें इसी आधार पर GST पंजीकरण के बहाल होने की अनुमति दी गई थी।
4. न्यायालय का आदेश (Court’s Directions)
गौहाटी उच्च न्यायालय ने अंतिम निर्णय में स्पष्ट रूप से निर्देश दिया:
- Petitioner (श्री पंकज मोहन) को 60 दिनों के भीतर संबंधित अधिकारी के समक्ष आवेदन देना चाहिए।
- आवेदन में समस्त लंबित रिटर्न, पूरा टैक्स, ब्याज और विलम्ब शुल्क का भुगतान शामिल होना चाहिए।
- यदि यह सब किया जाता है, तो अधिकारी नियम 22(4) के आधार पर पंजीकरण बहाल कर सकता है और उचित आदेश पारित करेगा।
5. निर्णय के प्रभाव और उपयोगकर्ता के लिए सुझाव (Impact & Practical Advice)
कानूनी स्पष्टता
यह निर्णय बताता है कि GST व्यवस्था में न्यायालय अनुपालन को गंभीरता से ले रहा है और तकनीकी चूक के कारण किसी के व्यवसाय को समाप्त नहीं किया जाएगा जब तक कि वह सही तरीके से टैक्स और रिटर्न संबंधी सभी कर्तव्यों का निवर्हण करता है।
व्यापारियों के लिए मार्गदर्शन
- नियमित रूप से GST रिटर्न दाखिल करें (निल रिटर्न भी आवश्यक है)।
- यदि कोई चूक हो जाए, तो जल्द ही लंबित रिटर्न दाखिल करें और पूरी राशि चुका दें।
- यदि पंजीकरण रद्द हो गया है, तो जल्द से जल्द Rule 22(4) के तहत आवेदन दें।
- समय-सीमा के बावजूद न्यायालय का निर्णय इस बात को पुष्ट करता है कि सबूत-आधारित अनुपालन से न्यायालय सहायता प्रदान करने को तैयार है।
6. निष्कर्ष (Conclusion)
गौहाटी उच्च न्यायालय का यह निर्णय अर्थव्यवस्था के छोटे से लेकर मध्यम उद्यमों तक के लिए एक सकारात्मक संदेश है। यह दिखाता है कि GST अपेक्षाएँ सख्त हैं, लेकिन न्यायालय अनुपालन और व्यावहारिकता के बीच संतुलन स्थापित करने में सक्षम है। यदि करदाता ने अपनी चूक सुधारी और सभी देयताएँ पूरी की, तो कानून उसके पक्ष में न्याय प्रदान करता है और उसे वांछित पुनर्स्थापना का अधिकार देता है।