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मौखिक उल्लेख की ज़रूरत ख़त्म: अत्यावश्यक मामले अब 2 दिनों में स्वतः सूचीबद्ध होंगे — CJI सूर्यकांत ji द्वारा सुप्रीम कोर्ट में बड़े सुधार

मौखिक उल्लेख की ज़रूरत ख़त्म: अत्यावश्यक मामले अब 2 दिनों में स्वतः सूचीबद्ध होंगे — CJI सूर्यकांत hi  द्वारा सुप्रीम कोर्ट में बड़े सुधार

No Need For Oral Mentioning; Urgent Matters Will Be Automatically Listed In 2 Days : CJI Surya Kant ji Brings Major Reforms In Supreme Court

       भारत के सर्वोच्च न्यायालय में याचिकाओं की सूचीकरण प्रक्रिया (Listing Process) वर्षों से लगातार आलोचना का विषय रही है। वकीलों द्वारा बार-बार मौखिक उल्लेख (Oral Mentioning) करने की परंपरा, अत्यधिक भीड़भाड़ वाला सूचीकरण ढांचा, और मामलों के लंबित रहने की समस्या ने न्याय प्रणाली की कार्यक्षमता को कई बार सवालों के घेरे में खड़ा किया है। किंतु हाल ही में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए घोषणा की है कि अब अत्यावश्यक मामलों (Urgent Matters) को मौखिक उल्लेख की आवश्यकता के बिना 2 दिनों के भीतर स्वचालित रूप से सूचीबद्ध किया जाएगा।

        यह सुधार न केवल न्यायपालिका की कार्यशैली में पारदर्शिता और दक्षता लाएगा, बल्कि वकीलों और आम नागरिकों दोनों के लिए राहत का कारण बनेगा। यह कदम न्यायिक सुधारों की दिशा में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उठाया गया सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक माना जा रहा है।


परिचय : मौखिक उल्लेख की पुरानी परंपरा

       सालों से सर्वोच्च न्यायालय में किसी भी अत्यावश्यक याचिका की सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए वकीलों को सुबह की कोर्ट में ‘मेनशनिंग’ करनी पड़ती थी। वकील जजों के सामने खड़े होकर बताते थे कि उनका मामला अत्यावश्यक है और उसे तुरंत सूचीबद्ध किया जाए।

यह व्यवस्था कई व्यावहारिक समस्याओं को जन्म देती थी—

  • रोज़ सैकड़ों वकील मौखिक उल्लेख करते थे
  • जजों का काफी समय सूचीकरण प्रक्रिया में ही खर्च होता था
  • कई मामलों में उल्लेख के बावजूद तुरंत सूचीकरण नहीं हो पाता था
  • पक्षकारों को अनिश्चितता और देरी का सामना करना पड़ता था

कई वरिष्ठ वकीलों ने भी समय-समय पर इस प्रणाली में सुधार की आवश्यकता जताई थी। ऐसे में CJI सूर्यकांत का यह कदम न्यायिक प्रशासन में नया अध्याय खोलता है।


नई व्यवस्था : अत्यावश्यक मामलों का 48 घंटे में स्वतः सूचीकरण

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट कहा है कि—

“अब किसी वकील को कोर्ट में आकर ओरल मेनशनिंग करने की आवश्यकता नहीं है। यदि मामला वास्तव में अत्यावश्यक है, तो उसे स्वतः 2 दिनों के भीतर लिस्ट कर दिया जाएगा।”

इस प्रकार कोर्ट ने एक स्वचालित सूचीकरण प्रणाली (Automated Listing Mechanism) लागू करने का निर्णय लिया है।

यह प्रणाली निम्न बिंदुओं पर आधारित होगी—

1. E-filing की Scrutiny टीम द्वारा तत्काल समीक्षा

  • याचिका दायर होते ही स्क्रूटनी टीम मामले को जाँच करेगी
  • यदि मामला गंभीर, अत्यावश्यक या अधिकारों पर तत्काल प्रभाव डालने वाला है
  • तो उसे ‘Urgent Category’ में डाल दिया जाएगा

2. दो दिनों के भीतर Benches के समक्ष सूचीकरण

  • अत्यावश्यक मामलों को अधिकतम 48 घंटे (दो कार्य दिवस) में सूचीबद्ध किया जाएगा
  • सूचीकरण स्वचालित रूप से होगा—किसी वकील को अनुरोध नहीं करना पड़ेगा

3. Mentioning की परंपरा खत्म नहीं, पर बहुत कम आवश्यकता

  • अब केवल अत्यंत असाधारण परिस्थितियों में ही वकील मौखिक उल्लेख करेंगे
  • दैनिक ‘हंगामेदार मेनशनिंग’ अब लगभग पूरी तरह समाप्त हो जाएगी

सुधारों की पृष्ठभूमि : क्यों ज़रूरी थे ये कदम?

सुप्रीम कोर्ट में प्रतिदिन लगभग 1,200 से अधिक मामले दाखिल होते हैं। इनमें से कई मामले अत्यावश्यक होते हैं जैसे—

  • जमानत (Bail)
  • स्टे आदेश (Stay)
  • डिमॉलिशन की प्रक्रिया
  • ताबड़तोड़ गिरफ्तारी
  • समय सीमा वाली याचिकाएँ
  • मृत्यु दंड मामले
  • चुनाव संबंधी विवाद

ऐसे मामलों में देरी न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। मौखिक उल्लेख की अनिवार्यता ने इन मामलों को अतिरिक्त समय तक रोककर रखा। कई बार सूचीकरण में तकनीकी देरी या प्रशासनिक बाधाएँ आ जाती थीं।

नए सुधार इस समस्या का समाधान करते हैं।


इस सुधार के प्रमुख लाभ

1. वकीलों का समय बचेगा

अब वकीलों को रोज़ सुबह कोर्ट में ‘मेनशनिंग’ के लिए लंबी कतारों में नहीं लगना पड़ेगा। इससे—

  • अनावश्यक भीड़भाड़ कम होगी
  • वकील अपने मामलों की तैयारी पर अधिक समय दे सकेंगे

2. जजों का महत्वपूर्ण न्यायिक समय बचेगा

जज अब सूचीकरण के अनुरोध सुनने के बजाय—

  • वास्तविक मामलों की सुनवाई
  • महत्वपूर्ण निर्णयों की तैयारी
  • लंबित मामलों के निपटारे

पर अधिक समय खर्च कर पाएंगे।

3. न्याय प्रणाली अधिक ‘प्रोफेशनल’ बनेगी

हर चीज़ स्वचालित होने से—

  • पारदर्शिता बढ़ेगी
  • मानव त्रुटियों में कमी आएगी
  • पक्षकारों को भरोसा होगा कि उनके मामले को उचित प्राथमिकता मिलेगी

4. अत्यावश्यक मामलों में त्वरित न्याय

दो दिनों के भीतर सुनवाई मिलना अपने आप में महत्वपूर्ण है। इससे—

  • नागरिकों का मूल अधिकार संरक्षित होगा
  • गिरफ्तारी/डिमॉलिशन/जब्ती जैसे मामलों में राहत मिलेगी
  • मानव अधिकार उल्लंघन कम होंगे

CJI सूर्यकांत ji की कार्यशैली : ‘सुधार-केन्द्रित न्यायपालिका’

       जस्टिस सूर्यकांत अपने प्रशासनिक सुधारों के लिए पहले से जाने जाते रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय में जिम्मेदारी संभालते ही उन्होंने कई अहम कदम उठाए—

1. Listing Process को आसान और तेज़ बनाया

       उन्होंने अदालत की प्रशासनिक इकाई को पूरी तरह पुनर्गठित किया, और सभी पेंडिंग Listing Requests को प्राथमिकता दी।

2. डिजिटल फाइलिंग को प्रोत्साहन

सभी याचिकाओं और दस्तावेज़ों की E-filing को बढ़ावा देने के लिए विशिष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए।

3. Benches के कार्य विभाजन में स्पष्टता

Bench composition और केस आवंटन को पहले से अधिक वैज्ञानिक और सुव्यवस्थित बनाया गया।

4. पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर

वे बार-बार कहते रहे हैं कि न्यायपालिका का विश्वास जनता से आता है, इसलिए प्रक्रियाएँ जनता के लिए सरल होनी चाहिए।


स्वचालित सूचीकरण प्रणाली कैसे काम करेगी?

1. चरण – 1 : E-Filing Portal पर याचिका अपलोड

  • वकील या पार्टी E-filing के माध्यम से याचिका जमा करेगी
  • याचिका में ‘Urgent Listing’ का विकल्प होगा

2. चरण – 2 : Scrutiny Officer द्वारा प्रारंभिक जाँच

Scrutiny officer निम्न बिंदुओं को देखेगा—

  • क्या मौजूदा आदेश से तत्काल नुकसान होगा?
  • क्या केस में गिरफ्तारी/डिमॉलिशन/सीलिंग/टर्मिनेशन जैसी कार्रवाई जारी है?
  • क्या याचिकाकर्ता के मौलिक अधिकारों का तात्कालिक हनन हो रहा है?
  • क्या मामला समय सीमा से बंधा हुआ है?

3. चरण – 3 : Computerised Assessment

  • Artificial Intelligence आधारित मॉड्यूल केस की प्रकृति को श्रेणीबद्ध करेगा
  • “Urgent” टैग लगने पर मामला रजिस्ट्रार को भेजा जाएगा

4. चरण – 4 : Bench Allocation

  • रजिस्ट्रार मामले की प्रकृति के अनुसार संबंधित बेंच तय करेगा
  • अधिकतम 48 घंटे के भीतर मामला सूचीबद्ध कर दिया जाएगा

5. चरण – 5 : Hearing

  • बेंच तत्काल सुनवाई करेगी
  • यदि आवश्यक हुआ तो मामले को उसी दिन/अगले दिन भी लिया जा सकता है

वकीलों की प्रतिक्रिया : स्वागत और संतोष

      सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और AOR एसोसिएशन दोनों ने इस कदम का स्वागत किया है। कई वरिष्ठ वकीलों ने कहा कि—

  • “यह वर्षों से मांग की जा रही थी।”
  • “मेनशनिंग की भीड़ अब खत्म होगी।”
  • “न्यायिक समय का सदुपयोग होगा।”

कुछ युवा वकीलों ने कहा कि यह सुधार उन्हें पेशे में अधिक सम्मान और समय दोनों देगा।


क्या मौखिक उल्लेख पूरी तरह समाप्त हो जाएगा?

नहीं।
CJI सूर्यकांत ji  ने स्पष्ट किया है कि—

मेनशनिंग अब अपवाद होगी, नियम नहीं।

निम्न परिस्थितियों में मौखिक उल्लेख अभी भी किया जा सकेगा—

  • किसी तकनीकी त्रुटि के कारण याचिका लिस्ट नहीं हुई
  • अत्यंत आपातकालीन स्थिति जैसे रात में गिरफ्तारी, तात्कालिक डिमॉलिशन
  • जब Automated System मामले की प्रकृति को गलत श्रेणी में डाल दे

लेकिन ये स्थिति बहुत कम होंगी।


न्यायिक सुधारों का व्यापक प्रभाव

इस सुधार से देश की न्याय प्रणाली पर व्यापक प्रभाव होगा—

1. “Justice Delayed is Justice Denied” की समस्या कम होगी

याचिकाओं को तुरन्त सूचीबद्ध करने से अत्यावश्यक मामलों में देरी नहीं होगी।

2. Digitisation मजबूत होगा

AI और डिजिटल स्क्रूटनी का उपयोग न्याय प्रणाली को आधुनिक बनाएगा।

3. भ्रष्टाचार की संभावना कम होगी

स्वचालित प्रणाली से मानव हस्तक्षेप कम होगा, जिससे मनमानी और पक्षपात समाप्त होंगे।

4. Litigant’s Confidence बढ़ेगा

जनता को लगेगा कि उनका मामला समय पर सुना जाएगा।


निष्कर्ष

      मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत द्वारा घोषित यह सुधार भारतीय न्यायपालिका में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। इससे—

  • न्यायिक प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और कुशल होगी
  • वकीलों और litigants को राहत मिलेगी
  • लंबित मामलों के बोझ को कम करने में मदद मिलेगी
  • सर्वोच्च न्यायालय एक आधुनिक और वैज्ञानिक न्यायिक प्रणाली की ओर अग्रसर होगा

यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि यह कदम आने वाले वर्षों में भारतीय न्यायपालिका की दिशा और दशा दोनों को बदल देगा।