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“भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के अंतर्गत गिरफ्तारी और गिरफ्तार व्यक्ति के अधिकार”

“भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के अंतर्गत गिरफ्तारी और गिरफ्तार व्यक्ति के अधिकार”


भूमिका (Introduction)

कानून के शासन में गिरफ्तारी (Arrest) एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवधारणा है। यह वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से राज्य किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को कानूनी रूप से सीमित करता है, ताकि उसे न्यायालय के समक्ष उपस्थित किया जा सके या किसी अपराध की रोकथाम की जा सके।
पूर्व में यह विषय दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (CrPC) के अंतर्गत विनियमित था, परंतु भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita – BNSS), 2023 ने इसमें कई आधुनिक और मानवाधिकार-उन्मुख सुधार किए हैं।

BNSS का उद्देश्य है — कानूनी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-अधिकारों के अनुरूप बनाना। गिरफ्तारी के नए प्रावधान इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।


1. गिरफ्तारी का अर्थ (Meaning of Arrest)

गिरफ्तारी (Arrest) का अर्थ है — किसी व्यक्ति को कानून के अधिकार से हिरासत में लेना, ताकि उसकी उपस्थिति न्यायालय में सुनिश्चित की जा सके या अपराध की रोकथाम हो सके।

सरल शब्दों में, गिरफ्तारी का मतलब है — किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता को इस इरादे से सीमित करना कि उसे कानूनी प्रक्रिया के अधीन लाया जाए।
गिरफ्तारी तभी वैध होती है जब वह कानूनी अधिकार के तहत की गई हो।


2. कौन कर सकता है गिरफ्तारी (Who May Arrest) – धारा 35 से 40 BNSS

BNSS के अंतर्गत विभिन्न व्यक्तियों और अधिकारियों को गिरफ्तारी का अधिकार दिया गया है:

(a) पुलिस अधिकारी द्वारा गिरफ्तारी (Section 35)

पुलिस अधिकारी निम्न परिस्थितियों में गिरफ्तारी कर सकता है:

  1. बिना वारंट (Without Warrant)
    • जब कोई व्यक्ति किसी संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) को पुलिस अधिकारी की उपस्थिति में करता है।
    • जब उचित संदेह हो कि व्यक्ति किसी गंभीर अपराध में संलिप्त है।
  2. वारंट के साथ (With Warrant)
    • जब न्यायालय द्वारा गिरफ्तारी का वारंट जारी किया गया हो।

BNSS में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पुलिस को गिरफ्तारी के कारण लिखित रूप में दर्ज करने होंगे, और यदि गिरफ्तारी आवश्यक नहीं है तो व्यक्ति को नोटिस देकर जांच में सम्मिलित किया जा सकता है। इससे अनावश्यक गिरफ्तारी पर रोक लगती है।


(b) निजी व्यक्ति द्वारा गिरफ्तारी (Section 37)

कोई भी निजी व्यक्ति निम्न परिस्थितियों में गिरफ्तारी कर सकता है:

  • जब उसके सामने कोई व्यक्ति संज्ञेय अपराध करता है,
  • या अपराधी से भागने का खतरा हो।

ऐसे में निजी व्यक्ति को गिरफ्तार व्यक्ति को शीघ्र ही निकटतम पुलिस स्टेशन में सौंपना होगा।


(c) मजिस्ट्रेट द्वारा गिरफ्तारी (Section 38–40)

किसी न्यायिक या कार्यकारी मजिस्ट्रेट को भी यह अधिकार है कि यदि उनके समक्ष कोई व्यक्ति अपराध करता है, तो वे उसे तुरंत गिरफ्तार करने या गिरफ्तारी का आदेश देने का अधिकार रखते हैं।


3. वारंट के साथ गिरफ्तारी (Arrest with Warrant) – धारा 72 से 83 BNSS

  • मजिस्ट्रेट द्वारा वारंट जारी करना (Section 72):
    मजिस्ट्रेट किसी अभियुक्त की उपस्थिति सुनिश्चित करने हेतु गिरफ्तारी का वारंट जारी कर सकता है।
  • वारंट का स्वरूप (Section 74):
    वारंट पर मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर और न्यायालय की मुहर होना आवश्यक है।
  • वारंट की वैधता (Section 75–77):
    वारंट तब तक वैध रहता है जब तक कि उसे निरस्त न किया जाए या गिरफ्तारी न हो जाए।
  • वारंट का निष्पादन (Section 78–83):
    वारंट को किसी भी पुलिस अधिकारी द्वारा भारत के किसी भी हिस्से में निष्पादित किया जा सकता है।

4. गिरफ्तारी की प्रक्रिया (Procedure of Arrest) – धारा 41–42 BNSS

गिरफ्तारी के समय निम्न प्रक्रिया का पालन आवश्यक है:

  1. पुलिस को गिरफ्तारी करते समय न्यूनतम बल का प्रयोग करना चाहिए।
  2. महिलाओं के साथ मर्यादापूर्ण व्यवहार किया जाना चाहिए।
  3. गिरफ्तारी का कारण स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए
  4. गिरफ्तारी के बाद अभियुक्त का नाम, पता और गिरफ्तारी का समय दर्ज किया जाना चाहिए।
  5. गिरफ्तारी ज्ञापन (Arrest Memo) तैयार किया जाना अनिवार्य है।

5. गिरफ्तार व्यक्ति को सूचना देने का अधिकार (Right to be Informed) – धारा 43 BNSS

BNSS की धारा 43 के अनुसार —

  • प्रत्येक गिरफ्तार व्यक्ति को उसकी गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी दी जानी चाहिए, और
  • उसे यह बताया जाना चाहिए कि वह जमानत पर रिहा होने का अधिकार रखता है, यदि अपराध जमानती है।

यह अधिकार व्यक्ति की संविधानिक स्वतंत्रता (Article 22(1) of the Constitution) की रक्षा करता है।


6. रिश्तेदार या मित्र को सूचना देने का अधिकार (Right to Inform Relative or Friend) – धारा 43(1) BNSS

  • गिरफ्तार व्यक्ति के किसी रिश्तेदार या मित्र को तुरंत सूचना दी जानी चाहिए
  • पुलिस को यह सुनिश्चित करना होगा कि गिरफ्तारी और स्थान की जानकारी परिजनों तक पहुँचे।
  • गिरफ्तारी ज्ञापन पर गवाह के रूप में किसी रिश्तेदार या स्थानीय व्यक्ति के हस्ताक्षर होने चाहिए।

7. अधिवक्ता से परामर्श का अधिकार (Right to Legal Counsel) – धारा 43(3) BNSS

गिरफ्तार व्यक्ति को यह अधिकार है कि —

  • उसे पूछताछ के दौरान अधिवक्ता से परामर्श करने की अनुमति दी जाए।
  • यह अधिकार न्यायपूर्ण सुनवाई (Fair Trial) के मूल सिद्धांत का हिस्सा है।

यह प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 22(1) और सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों (जैसे DK Basu v. State of West Bengal) के अनुरूप है।


8. मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किए जाने का अधिकार (Right to be Produced Before Magistrate) – धारा 60 BNSS

  • गिरफ्तारी के बाद व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
  • किसी व्यक्ति को 24 घंटे से अधिक हिरासत में रखना अवैध (Illegal Detention) माना जाएगा।

यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 22(2) के अंतर्गत सुनिश्चित है।


9. निःशुल्क विधिक सहायता का अधिकार (Right to Free Legal Aid) – धारा 187 BNSS

BNSS के अनुसार:

  • यदि कोई व्यक्ति वकील की फीस देने में असमर्थ है, तो उसे मुफ्त कानूनी सहायता दी जाएगी।
  • यह सहायता राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (Legal Services Authority) के माध्यम से प्रदान की जाएगी।

यह प्रावधान विधिक सहायता अधिनियम, 1987 और Article 39-A (संविधान) के अनुरूप है।


10. अनावश्यक बंधन पर रोक (Prohibition of Unnecessary Restraint) – धारा 39(3) BNSS

गिरफ्तार व्यक्ति पर आवश्यक से अधिक बंधन या बल नहीं लगाया जा सकता।
पुलिस केवल इतना बल प्रयोग कर सकती है जो व्यक्ति के भागने या हिंसा करने से रोकने के लिए आवश्यक हो।


11. महिलाओं की गिरफ्तारी में सुरक्षा प्रावधान (Women’s Safety in Arrest) – धारा 43(2) BNSS

महिलाओं की गिरफ्तारी से संबंधित विशेष नियम:

  1. सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले महिला की गिरफ्तारी नहीं की जा सकती,
    जब तक कि मजिस्ट्रेट की विशेष अनुमति न हो।
  2. महिला की गिरफ्तारी केवल महिला पुलिस अधिकारी द्वारा की जाएगी।
  3. महिला की जांच या तलाशी भी महिला अधिकारी द्वारा ही की जाएगी।

यह प्रावधान महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा की रक्षा करता है।


12. गिरफ्तारी ज्ञापन (Arrest Memo) और सूचना संचार

BNSS में यह प्रावधान है कि —

  • हर गिरफ्तारी पर गिरफ्तारी ज्ञापन (Memo of Arrest) तैयार किया जाएगा।
  • इसमें गिरफ्तारी का समय, स्थान, गवाह के हस्ताक्षर, और गिरफ्तारी के कारण लिखे जाएंगे।
  • गिरफ्तारी की सूचना ई-मेल या अन्य माध्यमों से परिजनों तक पहुंचाई जा सकती है।

13. न्यायिक निगरानी और जवाबदेही (Judicial Oversight and Accountability)

BNSS ने गिरफ्तारी के अधिकार को न्यायिक नियंत्रण के अधीन किया है।

  • मजिस्ट्रेट को यह देखना आवश्यक है कि गिरफ्तारी वैध और उचित कारणों से की गई है।
  • यदि मजिस्ट्रेट को लगता है कि गिरफ्तारी मनमानी है, तो वे व्यक्ति को रिहा कर सकते हैं या जमानत दे सकते हैं

14. निष्कर्ष (Conclusion)

BNSS, 2023 ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, मानवीय और जवाबदेह बनाया है।
यह कानून सुनिश्चित करता है कि —

  • किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता केवल कानूनी कारणों से ही सीमित की जाए,
  • गिरफ्तारी के दौरान मानवाधिकारों और गरिमा की रक्षा हो,
  • और पुलिस की शक्तियों पर न्यायिक नियंत्रण बना रहे।

संक्षेप में कहा जा सकता है कि BNSS ने गिरफ्तारी से जुड़े पुराने ढांचे में सुधार लाते हुए, नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा को सर्वोपरि रखा है।


सुझावित शीर्षक विकल्प:

  1. “BNSS, 2023 के अंतर्गत गिरफ्तारी और नागरिक अधिकारों का नया आयाम”
  2. “भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में गिरफ्तारी की प्रक्रिया और व्यक्ति के अधिकार”
  3. “BNSS के तहत गिरफ्तारी: प्रक्रिया, प्रावधान और संवैधानिक संरक्षण”