बड़ी खबर: संसद से पास हुआ G RAM G विधेयक — ग्रामीण भारत की तक़दीर बदलेगा या विवादों की नई शुरुआत?
भूमिका
भारत की राजनीति और नीति-निर्माण में ग्रामीण भारत हमेशा केंद्र में रहा है। देश की लगभग 65% आबादी आज भी गांवों में निवास करती है, जहां रोजगार, आजीविका, पलायन और गरीबी जैसी समस्याएं लंबे समय से चुनौती बनी हुई हैं। इन्हीं मुद्दों को संबोधित करने के उद्देश्य से Parliament of India के शीतकालीन सत्र 2025 में G RAM G (ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका गारंटी) विधेयक को पारित किया गया।
यह विधेयक 18 दिसंबर 2025 को Lok Sabha और 19 दिसंबर 2025 को Rajya Sabha से पारित हुआ। सरकार इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए “गेम चेंजर” बता रही है, जबकि विपक्ष इसे “गरीब और मजदूर विरोधी” कानून करार दे रहा है।
यह लेख इस विधेयक के राजनीतिक घटनाक्रम, कानूनी निहितार्थ, सरकार और विपक्ष के तर्क, तथा आम जनता पर इसके संभावित प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
G RAM G विधेयक क्या है?
G RAM G (ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका गारंटी) विधेयक का उद्देश्य:
- ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना
- आजीविका के साधनों को विविध बनाना
- तकनीक के माध्यम से निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाना
- फर्जी जॉब कार्ड और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण
सरकार के अनुसार यह विधेयक पुराने ग्रामीण रोजगार तंत्र को “आधुनिक और परिणामोन्मुखी” बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
संसद में कब और क्या हुआ?
18 दिसंबर 2025 – लोकसभा में घटनाक्रम
लोकसभा में विधेयक पेश होते ही:
- सत्ता पक्ष ने इसे ऐतिहासिक सुधार बताया
- विपक्ष ने इसे किसान-मजदूर विरोधी करार दिया
कई घंटों तक चली बहस में:
- विपक्षी सांसदों ने नारेबाज़ी की
- कुछ सांसदों ने बिल की प्रतियां फाड़कर विरोध दर्ज कराया
- सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित हुई
अंततः भारी हंगामे के बीच विधेयक बहुमत से पारित कर दिया गया।
19 दिसंबर 2025 – राज्यसभा में मंजूरी
राज्यसभा में भी स्थिति अलग नहीं रही:
- विपक्षी दलों ने वॉकआउट किया
- सरकार ने विधेयक को “राष्ट्रीय आवश्यकता” बताया
- अंततः आवाज़ मत (Voice Vote) से बिल पारित कर दिया गया
इस तरह, संसद के दोनों सदनों से विधेयक को मंजूरी मिल गई।
सरकार का पक्ष: “ग्रामीण भारत के लिए नया युग”
सरकार ने अपने आधिकारिक वक्तव्य में कहा कि:
- यह कानून ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को 21वीं सदी के अनुरूप बनाएगा
- मजदूरों को अधिक और विविध रोजगार अवसर मिलेंगे
- डिजिटल निगरानी से भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़ा रुकेगा
- गांवों में बुनियादी ढांचे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी
सरकार के अनुसार, यह विधेयक “विकसित भारत” के विज़न का अभिन्न हिस्सा है, जिसमें:
“गांव आत्मनिर्भर होंगे, मजदूर सशक्त होंगे और पलायन पर रोक लगेगी।”
विपक्ष का तीखा विरोध
कांग्रेस और विपक्षी दलों की आपत्ति
कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने इस विधेयक का कड़ा विरोध किया।
Rahul Gandhi का बयान
“यह विधेयक गांव और गरीब विरोधी है। इससे मजदूरों की कानूनी सुरक्षा कमजोर होगी। हम इसके खिलाफ सड़क से संसद तक संघर्ष करेंगे।”
कांग्रेस का आरोप है कि:
- सरकार ने पुराने रोजगार कानून की मूल भावना को कमजोर कर दिया
- विधेयक को संसदीय स्थायी समिति को भेजे बिना जल्दबाज़ी में पास कराया गया
- राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है
अन्य विपक्षी दलों की टिप्पणी
अन्य दलों ने भी चिंता जताई कि:
- यह कानून मजदूरों के अधिकारों को सीमित कर सकता है
- केंद्र सरकार राज्यों की स्वायत्तता में दखल दे रही है
- रोजगार की “गारंटी” शब्द मात्र बनकर रह जाएगी
विरोध के प्रतीक स्वरूप, विपक्षी सांसदों ने देर रात संसद परिसर में धरना प्रदर्शन भी किया।
आम जनता के लिए इसका क्या मतलब?
सरकार समर्थकों के अनुसार संभावित लाभ
✅ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर
✅ तकनीक आधारित बेहतर निगरानी और पारदर्शिता
✅ गांवों में विकास परियोजनाओं को गति
✅ फर्जी लाभार्थियों पर रोक
सरकार का दावा है कि इससे:
- मजदूरी समय पर मिलेगी
- काम की गुणवत्ता सुधरेगी
- स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा
आलोचकों की आशंकाएं
❌ रोजगार की गारंटी कमजोर हो सकती है
❌ मजदूरों के कानूनी अधिकार प्रभावित होंगे
❌ पुराने, महात्मा गांधी के नाम से जुड़ी योजना की पहचान खत्म होने का डर
❌ गरीब और हाशिए पर खड़े वर्गों को नुकसान
आलोचकों का कहना है कि:
“कानून कागज़ पर मजबूत दिख सकता है, लेकिन जमीन पर इसका असर गरीब के खिलाफ जा सकता है।”
कानूनी और संवैधानिक पहलू
संवैधानिक दृष्टि से:
- रोजगार और आजीविका का प्रश्न
- अनुच्छेद 21 (जीवन और गरिमा का अधिकार)
- राज्य के नीति निर्देशक तत्वों
से जुड़ा हुआ है।
यदि नया कानून:
- रोजगार की न्यूनतम गारंटी को कमजोर करता है
- या राज्यों पर असंतुलित वित्तीय बोझ डालता है
तो भविष्य में इसे न्यायिक समीक्षा का सामना करना पड़ सकता है।
ग्रामीण भारत पर संभावित प्रभाव
सकारात्मक पहलू
- गांवों में बुनियादी ढांचा विकास
- स्थानीय स्तर पर कौशल आधारित काम
- पलायन में संभावित कमी
नकारात्मक जोखिम
- कार्य दिवसों में कटौती
- मजदूरी दरों पर दबाव
- स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक हस्तक्षेप
ज़मीन पर लागू होने की चुनौती
भारत में कई योजनाएं:
- कागज़ पर सफल
- लेकिन ज़मीन पर कमजोर
रही हैं।
G RAM G विधेयक की सफलता निर्भर करेगी:
- राज्यों के सहयोग पर
- प्रशासनिक क्षमता पर
- पारदर्शी क्रियान्वयन पर
यदि निगरानी तंत्र मजबूत नहीं हुआ, तो:
- यह कानून भी विवादों में घिर सकता है।
आगे क्या?
अब यह विधेयक:
- राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा
- मंजूरी के बाद अधिनियम का रूप लेगा
- नियम और अधिसूचनाएं जारी होंगी
असली परीक्षा तब होगी, जब:
यह कानून गांवों की धरती पर लागू होगा।
निष्कर्ष
G RAM G विधेयक का संसद से पारित होना भारतीय लोकतंत्र में एक बड़ा राजनीतिक और नीतिगत घटनाक्रम है।
- सरकार इसे ग्रामीण भारत के सशक्तिकरण का माध्यम बता रही है
- विपक्ष इसे गरीब-मजदूर विरोधी करार दे रहा है
सच क्या है—यह आने वाला समय बताएगा।
लेकिन इतना तय है कि:
यदि यह कानून पारदर्शिता, जवाबदेही और संवेदनशीलता के साथ लागू हुआ, तो यह गांवों की तस्वीर बदल सकता है।
और यदि नहीं, तो यह केवल एक और विवादास्पद कानून बनकर रह जाएगा।
अब सवाल आपसे है—
क्या यह कानून सच में गांव और गरीबों के लिए वरदान बनेगा, या विपक्ष की आशंकाएं सही साबित होंगी?