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“नकदी आहरण पर कर कटौती: आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 194N का विस्तृत विश्लेषण”

“नकदी आहरण पर कर कटौती: आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 194N का विस्तृत विश्लेषण”


प्रस्तावना

भारत सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में नकदी लेनदेन को कम करने और डिजिटल भुगतान प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इन्हीं प्रयासों के अंतर्गत वर्ष 2019 में आयकर अधिनियम, 1961 (Income Tax Act, 1961) में धारा 194N (Section 194N) जोड़ी गई।
इस धारा का मुख्य उद्देश्य अत्यधिक नकद आहरण (Cash Withdrawal) पर निगरानी रखना और कर प्रशासन को ऐसे लेनदेन की जानकारी देना है, जिससे काले धन (Black Money) की रोकथाम और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

धारा 194N का सीधा संबंध बैंक, सहकारी बैंक (Co-operative Bank) और डाकघर (Post Office) से नकदी निकालने की प्रक्रिया से है। यह धारा यह सुनिश्चित करती है कि कोई व्यक्ति अत्यधिक नकदी निकालकर कर चोरी या अनौपचारिक लेनदेन में संलिप्त न हो।


धारा 194N का उद्देश्य (Objective of Section 194N)

धारा 194N का प्रमुख उद्देश्य कैशलेस अर्थव्यवस्था (Cashless Economy) को प्रोत्साहित करना है।
सरकार का दृष्टिकोण यह है कि डिजिटल ट्रांजैक्शन के माध्यम से लेनदेन अधिक पारदर्शी होता है, जबकि नकद लेनदेन से कर चोरी, मनी लॉन्ड्रिंग और अनियमित वित्तीय गतिविधियों की संभावना बढ़ जाती है।

इसलिए, इस धारा के तहत एक सीमा (Threshold Limit) तय की गई है, जिसके बाद यदि कोई व्यक्ति नकद निकासी करता है, तो उस पर स्रोत पर कर कटौती (Tax Deduction at Source – TDS) लागू होगा।


धारा 194N की कानूनी पृष्ठभूमि (Legal Background of Section 194N)

धारा 194N को वित्त अधिनियम, 2019 (Finance Act, 2019) के माध्यम से 1 सितंबर, 2019 से लागू किया गया।
बाद में, वित्त अधिनियम, 2020 (Finance Act, 2020) में इसमें संशोधन कर इसे और प्रभावी बनाया गया।

इस प्रावधान के तहत यह कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति, कंपनी, या संस्था किसी वित्तीय वर्ष में बैंक, सहकारी बैंक या डाकघर से नकद आहरण करती है, और वह राशि निर्धारित सीमा से अधिक है, तो बैंक उस पर टीडीएस (TDS) काटेगा।


धारा 194N का मुख्य प्रावधान (Main Provision of Section 194N)

(1) लागू क्षेत्र (Applicability):

यह धारा निम्नलिखित संस्थाओं पर लागू होती है —

  1. बैंकिंग कंपनी (Banking Company)
  2. सहकारी बैंक (Co-operative Bank)
  3. डाकघर (Post Office)

इन संस्थाओं के माध्यम से नकद निकासी करने वाले व्यक्ति पर यह धारा लागू होती है।

(2) जिन व्यक्तियों पर लागू (Applicable Persons):
  • व्यक्तिगत व्यक्ति (Individual)
  • हिन्दू अविभाजित परिवार (HUF)
  • कंपनी (Company)
  • साझेदारी फर्म (Partnership Firm)
  • सहकारी समिति (Co-operative Society)
  • स्थानीय प्राधिकरण (Local Authority)
  • अन्य संस्थाएँ (Other Persons)
(3) सीमा (Threshold Limit):

यदि किसी व्यक्ति द्वारा एक वित्तीय वर्ष में ₹1 करोड़ से अधिक नकद राशि बैंक, सहकारी बैंक या डाकघर से निकाली जाती है, तो इस धारा के अंतर्गत टीडीएस काटा जाएगा।


टीडीएस की दर (TDS Rate under Section 194N)

धारा 194N के तहत टीडीएस की दरें निम्न प्रकार से निर्धारित हैं —

स्थिति निकासी सीमा TDS दर
यदि व्यक्ति ने पिछले 3 वर्षों में आयकर रिटर्न भरा है ₹1 करोड़ से अधिक नकद निकासी 2%
यदि व्यक्ति ने पिछले 3 वर्षों में आयकर रिटर्न नहीं भरा है ₹20 लाख से ₹1 करोड़ तक नकद निकासी 2%
यदि व्यक्ति ने पिछले 3 वर्षों में आयकर रिटर्न नहीं भरा है ₹1 करोड़ से अधिक नकद निकासी 5%

इसका अर्थ यह है कि यदि कोई व्यक्ति रिटर्न दाखिल नहीं करता, तो उसके लिए यह प्रावधान अधिक कठोर हो जाता है।


उदाहरण द्वारा समझें (Illustration)

उदाहरण 1:
यदि किसी व्यवसायी ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में ₹1.40 करोड़ नकद बैंक से निकाला, और उसने नियमित रूप से आयकर रिटर्न भरा है, तो:

  • ₹1 करोड़ तक कोई TDS नहीं,
  • ₹40 लाख पर 2% की दर से TDS = ₹80,000।

उदाहरण 2:
यदि वही व्यक्ति रिटर्न नहीं भरता है और ₹1.40 करोड़ निकालता है, तो:

  • ₹20 लाख से ₹1 करोड़ तक (₹80 लाख) पर 2% = ₹1,60,000
  • ₹1 करोड़ से अधिक (₹40 लाख) पर 5% = ₹2,00,000
    कुल TDS = ₹3,60,000।

छूट प्राप्त श्रेणियाँ (Exemptions under Section 194N)

निम्नलिखित श्रेणियों के व्यक्ति या संस्थाएँ धारा 194N से मुक्त (Exempt) हैं —

  1. भारत सरकार या राज्य सरकार
  2. बैंकिंग कंपनी और सहकारी बैंक
  3. पोस्ट ऑफिस (डाकघर)
  4. व्यवसायिक संवाददाता (Business Correspondent)
  5. श्वेत सूचीबद्ध कंपनियाँ जिन्हें सरकार या RBI द्वारा छूट दी गई है
  6. कृषि उत्पाद विपणन समिति (APMC)
  7. प्राइमरी को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी

CBDT द्वारा जारी दिशा-निर्देश (CBDT Guidelines)

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने धारा 194N के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए कई सर्कुलर जारी किए हैं।
Circular No. 18/2019 (dated 30.09.2019) में यह स्पष्ट किया गया कि बैंक और डाकघर यह सुनिश्चित करें कि नकद निकासी की गणना वित्तीय वर्ष के आधार पर की जाए, और पहले से निकाली गई राशि को भी जोड़ा जाए।

इसके अलावा, CBDT Circular No. 10/2020 (dated 24.04.2020) में यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि कोई व्यक्ति एक से अधिक खातों से नकद निकालता है, तो सभी खातों की निकासी को जोड़कर सीमा तय की जाएगी


धारा 194N का आर्थिक और सामाजिक प्रभाव (Economic and Social Impact)

(1) डिजिटल लेनदेन को प्रोत्साहन

इस प्रावधान के कारण व्यापारियों, संगठनों और व्यक्तियों को डिजिटल भुगतान अपनाने की प्रेरणा मिली है।
सरकार का उद्देश्य कैश ट्रांजैक्शन को सीमित कर “लेस-कैश इकोनॉमी” बनाना है।

(2) काले धन पर रोकथाम

धारा 194N के माध्यम से बड़े पैमाने पर नकद निकासी पर निगरानी रखी जा सकती है। इससे अघोषित आय (Undisclosed Income) पर नियंत्रण संभव हुआ है।

(3) बैंकिंग ट्रांजैक्शन की पारदर्शिता

बैंकिंग प्रणाली में नकदी लेनदेन का रिकॉर्ड रखने से वित्तीय गतिविधियों की ट्रेसबिलिटी (Traceability) बढ़ी है।

(4) ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

हालाँकि, कुछ विशेषज्ञों का मत है कि ग्रामीण इलाकों में नकदी अभी भी प्रमुख माध्यम है। वहाँ डिजिटल अवसंरचना की कमी के कारण इस धारा से असुविधा हो सकती है।


संविधान और कर न्याय के संदर्भ में विश्लेषण (Legal and Constitutional Analysis)

धारा 194N को लेकर कुछ कानूनी प्रश्न भी उठाए गए हैं —
क्या यह “नकद निकासी पर कर” के समान है?
क्या यह व्यक्ति की संपत्ति के उपयोग के अधिकार में हस्तक्षेप नहीं करता?

हालाँकि, सरकार का तर्क है कि यह कोई “कर” नहीं बल्कि स्रोत पर कर कटौती (TDS) है, जो केवल निगरानी का साधन है। अंततः, यदि करदाता का वैधानिक आयकर दायित्व नहीं बनता, तो वह रिटर्न दाखिल करते समय रिफंड प्राप्त कर सकता है।

न्यायालयों ने भी माना है कि यह प्रावधान संवैधानिक रूप से वैध है क्योंकि इसका उद्देश्य कर चोरी की रोकथाम और पारदर्शिता है।


व्यावहारिक कठिनाइयाँ (Practical Challenges)

  1. व्यवसायियों पर प्रभाव:
    छोटे व्यापारियों को अक्सर नकद में भुगतान करना पड़ता है, जिससे इस धारा के तहत उनके ऊपर TDS का बोझ बढ़ जाता है।
  2. तकनीकी दिक्कतें:
    कई बैंकिंग संस्थानों को ग्राहकों की नकद निकासी को एकीकृत रूप से ट्रैक करने में दिक्कत आती है।
  3. जागरूकता की कमी:
    कई करदाता इस प्रावधान से अनभिज्ञ हैं और उन्हें तब पता चलता है जब उनके खाते से TDS कट जाता है।

सुधार और सुझाव (Suggestions for Improvement)

  1. ग्रामीण क्षेत्रों के लिए विशेष छूट:
    जहाँ डिजिटल भुगतान संभव नहीं है, वहाँ सरकार को विशेष रियायत देनी चाहिए।
  2. TDS की सीमा बढ़ाना:
    वर्तमान ₹1 करोड़ की सीमा को बढ़ाकर ₹2 करोड़ किया जा सकता है, जिससे मध्यम उद्योगों पर बोझ कम हो।
  3. डिजिटल प्रोत्साहन योजनाएँ:
    जो व्यक्ति डिजिटल लेनदेन करते हैं, उन्हें टैक्स इंसेंटिव देना चाहिए।
  4. सिस्टम इंटीग्रेशन:
    बैंकों को एकीकृत प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से ग्राहकों की नकद निकासी पर वास्तविक समय निगरानी की सुविधा दी जानी चाहिए।

निष्कर्ष (Conclusion)

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 194N सरकार के उस व्यापक अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारत को कैशलेस और पारदर्शी अर्थव्यवस्था की दिशा में अग्रसर करना है।
यह प्रावधान न केवल कर चोरी को नियंत्रित करने में सहायक है, बल्कि वित्तीय प्रणाली को मजबूत और विश्वसनीय बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।

हालाँकि, यह भी आवश्यक है कि इस धारा को लागू करते समय छोटे व्यापारियों, ग्रामीण उपभोक्ताओं और कृषि क्षेत्र की वास्तविक आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाए।
संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए ही यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि नकदी पर नियंत्रण के साथ-साथ आर्थिक समावेशन (Financial Inclusion) भी बना रहे।

अंततः, धारा 194N का सार यह है कि “नकद जितना कम, पारदर्शिता उतनी अधिक।”
यह न केवल एक कर प्रावधान है, बल्कि एक आर्थिक नैतिकता (Economic Discipline) की दिशा में निर्णायक कदम है।