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देर से गोद लेने के दस्तावेज़ का पंजीकरण अनुकंपा नियुक्ति के अधिकार में बाधा नहीं: उड़ीसा हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

Delayed Registration of Adoption Deed No Bar to Compassionate Appointment: Orissa High Court Clarifies Law

देर से गोद लेने के दस्तावेज़ का पंजीकरण अनुकंपा नियुक्ति के अधिकार में बाधा नहीं: उड़ीसा हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

संक्षिप्त परिचय
उड़ीसा उच्च न्यायालय (Orissa High Court) ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि गोद लेने के दस्तावेज़ (Adoption Deed) का देर से पंजीकरण (Late Registration) अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) मिलने के अधिकार में कोई बाधा नहीं बन सकता, यदि गोद लेने के आवश्यक धार्मिक और कानूनी अनुष्ठान समय पर संपन्न हो चुके हैं।


मामले का पृष्ठभूमि

       इस मामले में, एक रेलकर्मी, श्री के. सद्हु पात्रा, अपनी सेवा के दौरान 02 अप्रैल 2008 को निधन कर गए। उनके द्वारा गोद लिया गया पुत्र, के. मनोज पात्रा, अपने पिता की मृत्यु के पश्चात रेल मंत्रालय से अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन कर रहा था। हालांकि, रेल विभाग ने मनोज के दावे को अस्वीकार कर दिया क्योंकि गोद लेने के दस्तावेज़ का पंजीकरण (Registration) पिता के निधन के बाद हुआ था।

रेल विभाग का तर्क था कि केवल वही आश्रित (Dependent) अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र हैं, जिनका गोद लेना उस समय तक वैध रूप से पूरा हो चुका था जब तक कि मृतक सरकारी कर्मचारी जीवित थे; और पंजीकृत दस्तावेज़ इस वैधता का प्रमाण है। अतः उन्होंने यह दावा खारिज कर दिया कि दस्तावेज़ का पंजीकरण देरी से होने के कारण वह अवैध है।


उच्च न्यायालय की राय और निर्णय

1. गोद लेने की वैधता – ‘रिट्स’ महत्वपूर्ण, दस्तावेज़ नहीं

उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि गोद लेने की वैधता का निर्णय दस्तावेज़ (Adoption Deed) के पंजीकरण पर निर्भर नहीं करता, बल्कि उसके पीछे किये गये धार्मिक अनुष्ठानों और विधि अनुसार गोद लेने की प्रक्रिया पूरा होने पर ही यह वैध माना जाता है। गोद लेने की रस्में जैसे ‘दत्तक ग्रहण’ और समुदाय अनुसार अनुष्ठान संपन्न होने पर गोद लेना वैध रूप से पूरा हो जाता है।

न्यायालय ने कहा कि पंजीकरण केवल एक प्रमाणपत्र (Evidentiary Record) है, जिसका काम सिर्फ इस बात का दस्तावेजी सबूत प्रदान करना है कि गोद लेने की प्रक्रिया हुई थी। पंजीकरण की देरी से गोद लेने की वास्तविक वैधता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, यदि गोद लेने के सभी अनिवार्य तत्व पहले से पूरे हैं।


वैधानिक प्रावधानों की व्याख्या

1. Hindu Adoptions and Maintenance Act, 1956

उच्च न्यायालय ने इस बात की पुष्टि की कि Hindu Adoptions and Maintenance Act, 1956 में कहीं भी यह अनिवार्य नहीं किया गया है कि गोद लेने का दस्तावेज़ पंजीकृत होना चाहिए ताकि गोद लेना वैध हो। गोद लेने की समूह मान्यताओं और विधियों के अनुसार पूर्णता ही निर्णय का आधार है।

2. Registration Act, 1908

न्यायालय ने यह भी बताया कि Registration Act, 1908 के अंतर्गत, गोद लेने के दस्तावेज़ का पंजीकरण करना अनिवार्य तो नहीं है, बल्कि यह एक वैकल्पिक प्रमाण प्रदान करने का साधन मात्र है। इसकी देरी से केवल दस्तावेज़ की साक्ष्य संबंधी वैधता थोड़ी प्रभावित हो सकती है, न कि गोद लेने की वास्तविक वैधता


न्यायालय द्वारा अपनाया गया तर्क

न्यायालय ने विभाजन पीठ में कहा:

  • “एक बार यदि गोद लेने की विधि अनुसार रस्में सम्पन्न हो जाती हैं और समुदाय की आवश्यक शर्तें पूरी हो जाती हैं, तो गोद लेना वैध रूप से स्थापित हो जाता है; पंजीकरण केवल एक साक्ष्य दस्तावेज है।”
  • इसलिए, रेल विभाग के तर्क को खारिज करते हुए, उच्च न्यायालय ने कहा कि दस्तावेज़ के पंजीकरण की तारीख पिता के निधन से पहले या बाद में होने की स्थिति में भी पति और पुत्र के संबंध की वैधता में अंतर नहीं आता

केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) की भूमिका

मामले में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT), कट्टक बेंच ने पहले ही मनोज के पक्ष में निर्णय दिया था और रेलवे को इसे अनुकंपा नियुक्ति के संदर्भ में विचार करने का निर्देश दिया था। इस CAT के आदेश को ही उच्च न्यायालय ने बनाए रखा और सरकार के विरुद्ध अपील को खारिज कर दिया।


निर्णय का महत्व

यह निर्णय कई मायनों में महत्वपूर्ण है:

1. आश्रित बच्चों के अधिकारों की पुष्टि

गोद लेने के बाद बच्चों को अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार तभी प्राप्त होता है जब गोद लेने की विधि पूरी तरह से वैध और प्रमाणित हो। इस निर्णय ने स्पष्ट कर दिया कि प्रक्रियात्मक पंजीकरण की देरी किसी भी तरह से बच्चे के अधिकार में बाधा नहीं बना सकती

2. सरकारी नीतियों का सुधार

सरकारी नीतियों और भर्ती नियमों में ऐसे मामलों में कठोर तकनीकी बिंदुओं से हटकर न्यायसंगत व्याख्या की आवश्यकता होगी, ताकि वास्तविक आश्रितों को उनकी पवित्रता और आवश्यक अधिकार मिल सकें।

3. गोद लेने एवं रोजगार नीति में स्पष्टता

यह न्यायसंगत और संवेदनशील दृष्टिकोण गोद लेने से जुड़े कानूनी विवादों तथा भर्तियों में स्पष्टता प्रदान करेगा और ऐसे कई मामलों में बच्चों के भविष्य को संरक्षित करेगा।


निष्कर्ष

उड़ीसा उच्च न्यायालय का यह निर्णय एक कानूनी प्रगति और मानवीय व्याख्या का उदाहरण है। इस फैसले में न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि:

गोद लेने की वैधता का निर्णय दस्तावेज़ के पंजीकरण पर आधारित नहीं है;
गोद लेने की वास्तविकता और अनुष्ठानों के पूरा होने पर इसे वैध माना जाता है;
देर से पंजीकरण को आधार मानकर किसी के अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार उनसे नहीं छीनना चाहिए।

इस प्रकार यह निर्णय उन आश्रितों के लिए एक बड़ा दिलासा है जो संवेदनशील जीवन परिस्थितियों में राहत की उम्मीद करते हैं। यदि आप अपने अधिकारों या ऐसे किसी मामले पर और विशेषज्ञ सलाह चाहते हैं, तो उचित विधिक मार्गदर्शन लेने से महत्वपूर्ण सहायता मिल सकती है।


1. प्रश्न: उड़ीसा हाईकोर्ट ने किस मामले में निर्णय दिया?

उत्तर: उड़ीसा हाईकोर्ट ने यह निर्णय दिया कि गोद लेने के दस्तावेज़ (Adoption Deed) का देर से पंजीकरण (Late Registration) होने पर भी गोद लेने की वैधता और अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) का अधिकार प्रभावित नहीं होता, यदि गोद लेने की विधि और धार्मिक अनुष्ठान समय पर संपन्न हो चुके हों।


2. प्रश्न: क्या गोद लेने का दस्तावेज़ पंजीकृत होना अनिवार्य है?

उत्तर: नहीं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पंजीकरण केवल साक्ष्य का प्रमाण है, लेकिन गोद लेने की वैधता धार्मिक अनुष्ठानों और विधि अनुसार गोद लेने की प्रक्रिया पूरा होने पर ही तय होती है। देरी से पंजीकरण वैधता को प्रभावित नहीं करता।


3. प्रश्न: रेल विभाग ने मनोज के दावे को क्यों अस्वीकार किया था?

उत्तर: रेल विभाग का तर्क था कि मनोज के पिता के जीवित रहते गोद लेने का दस्तावेज़ पंजीकृत नहीं हुआ था, इसलिए वह अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र नहीं हैं। उन्होंने पंजीकरण की देरी को गोद लेने की अवैधता का आधार माना।


4. प्रश्न: न्यायालय ने Hindu Adoptions and Maintenance Act, 1956 के संदर्भ में क्या कहा?

उत्तर: न्यायालय ने कहा कि Hindu Adoptions and Maintenance Act, 1956 में दस्तावेज़ पंजीकरण अनिवार्य नहीं है। गोद लेने की वैधता सिर्फ विधि और धार्मिक अनुष्ठानों के पूर्ण होने पर निर्भर करती है, न कि पंजीकरण की तारीख पर।


5. प्रश्न: इस निर्णय का महत्व क्या है?

उत्तर: यह निर्णय सुनिश्चित करता है कि गोद लिए गए बच्चों के अनुकंपा नियुक्ति के अधिकार सुरक्षित हैं, सरकारी विभागों को तकनीकी बाधाओं के बजाय न्यायसंगत और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा देता है। इसके माध्यम से आश्रित बच्चों के भविष्य और उनके रोजगार अधिकारों की सुरक्षा होती है।