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‘सबका बीमा, सबकी रक्षा’ : बीमा कानून संशोधन विधेयक 2025 से भारत के इंश्योरेंस सेक्टर में ऐतिहासिक बदलाव

‘सबका बीमा, सबकी रक्षा’ : बीमा कानून संशोधन विधेयक 2025 से भारत के इंश्योरेंस सेक्टर में ऐतिहासिक बदलाव

भूमिका

        भारत में बीमा (Insurance) अब सिर्फ अमीर या शहरी लोगों तक सीमित विषय नहीं रहा। सरकार लंबे समय से यह कोशिश कर रही है कि हर नागरिक—चाहे वह किसान हो, मजदूर हो, मध्यम वर्ग का कर्मचारी हो या छोटे व्यापारी—बीमा सुरक्षा के दायरे में आए। इसी सोच को कानूनी रूप देने के लिए संसद ने ‘सबका बीमा, सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) विधेयक, 2025’ को मंजूरी दी है।

         सरकार का दावा है कि यह कानून बीमा कंपनियों के मुनाफे से ज्यादा पॉलिसीधारकों के अधिकार, सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता देता है। यह न केवल बीमा क्षेत्र में बड़े आर्थिक सुधार लाता है, बल्कि आम जनता के लिए सस्ता, पारदर्शी और भरोसेमंद बीमा सुनिश्चित करने की दिशा में एक मजबूत कदम है।


क्या है ‘सबका बीमा, सबकी रक्षा’ (बीमा कानून संशोधन) विधेयक 2025?

       ‘सबका बीमा, सबकी रक्षा’ विधेयक को 16 दिसंबर 2025 को लोकसभा में पेश किया गया। यह विधेयक बीमा से जुड़े पुराने और दशकों पुराने कानूनों को आज के डिजिटल और वैश्विक दौर के अनुरूप संशोधित करने के लिए लाया गया है।

इस विधेयक के माध्यम से तीन प्रमुख कानूनों में संशोधन किया गया है—

  1. बीमा अधिनियम, 1938
  2. भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) अधिनियम, 1956
  3. बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) अधिनियम, 1999

इन संशोधनों का उद्देश्य बीमा क्षेत्र को आधुनिक बनाना, निवेश बढ़ाना और पॉलिसीधारकों के हितों को मजबूत कानूनी संरक्षण देना है।


सरकार का उद्देश्य और दृष्टिकोण

सरकार के अनुसार इस विधेयक के प्रमुख उद्देश्य हैं—

  • देश के हर नागरिक तक बीमा की पहुंच
  • बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश (FDI) बढ़ाना
  • प्रतिस्पर्धा के जरिए प्रीमियम कम करना
  • क्लेम सेटलमेंट को तेज और पारदर्शी बनाना
  • फर्जी कंपनियों और गलत कमाई पर सख्ती

सरकार का स्पष्ट संदेश है कि बीमा कंपनियां सिर्फ मुनाफा कमाने की मशीन नहीं होंगी, बल्कि उन्हें ग्राहक-सुरक्षा केंद्रित व्यवस्था अपनानी होगी।


100% विदेशी निवेश (FDI) : सबसे बड़ा और चर्चित बदलाव

इस विधेयक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक प्रावधान है—

बीमा कंपनियों में विदेशी निवेश की सीमा 74% से बढ़ाकर 100% कर देना।

इसका क्या मतलब है?

अब विदेशी बीमा कंपनियां भारत में पूरी हिस्सेदारी के साथ काम कर सकेंगी। उन्हें भारतीय साझेदार की अनिवार्यता नहीं होगी।

इसके फायदे

  • बीमा सेक्टर में बड़ी पूंजी का प्रवाह
  • नई और आधुनिक टेक्नोलॉजी का उपयोग
  • ग्लोबल लेवल की बीमा पॉलिसीज भारतीय ग्राहकों के लिए
  • मजबूत फाइनेंशियल बैकअप के कारण क्लेम सेटलमेंट में भरोसा

सरकार का मानना है कि इससे बीमा सेक्टर मजबूत होगा और आम उपभोक्ता को बेहतर सेवाएं मिलेंगी।


महंगे प्रीमियम पर लगेगा ब्रेक

अब तक बीमा लेने से लोग इसलिए डरते थे क्योंकि—

  • प्रीमियम महंगा होता था
  • शर्तें जटिल होती थीं
  • क्लेम मिलने की गारंटी नहीं होती थी

लेकिन नए कानून के बाद—

  • बाजार में कंपनियों की संख्या बढ़ेगी
  • प्रतिस्पर्धा बढ़ने से प्रीमियम घटेगा
  • कंपनियां ज्यादा लाभ देने वाली पॉलिसी लाएंगी

खासतौर पर हेल्थ इंश्योरेंस, माइक्रो इंश्योरेंस, साइबर इंश्योरेंस, पेट इंश्योरेंस जैसे नए सेगमेंट तेजी से विकसित होंगे।


क्लेम सेटलमेंट होगा तेज, आसान और पारदर्शी

बीमा से जुड़ी सबसे बड़ी शिकायत रही है—
“क्लेम लेने में महीनों लग जाते हैं”

नए कानून में क्या बदलेगा?

  • कंपनियों पर सर्विस क्वालिटी का दबाव
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म और AI आधारित सिस्टम
  • समय-सीमा के भीतर क्लेम निपटाने की बाध्यता
  • अनावश्यक दस्तावेजों पर रोक

अब पॉलिसीधारक को इलाज या नुकसान के समय लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।


IRDAI को मिलेगी ज्यादा ताकत

नए कानून में IRDAI (बीमा नियामक) की भूमिका को और मजबूत किया गया है।

अब IRDAI कर सकेगा—

  • गलत क्लेम रिजेक्शन पर भारी जुर्माना
  • भ्रामक विज्ञापन पर कार्रवाई
  • फर्जी या शेल बीमा कंपनियों पर प्रतिबंध
  • पॉलिसीधारकों की शिकायतों का तेज निपटारा

इससे बीमा कंपनियों की मनमानी पर लगाम लगेगी।


पॉलिसीधारकों के अधिकार होंगे मजबूत

इस विधेयक के बाद पॉलिसीधारक सिर्फ ग्राहक नहीं बल्कि कानूनी रूप से संरक्षित उपभोक्ता होंगे।

मुख्य अधिकार

  • पॉलिसी की शर्तों की स्पष्ट जानकारी
  • समय पर क्लेम सेटलमेंट
  • गलत सेवा पर मुआवजा
  • डिजिटल और ऑफलाइन शिकायत निवारण

ग्रामीण और कमजोर वर्गों के लिए राहत

सरकार का लक्ष्य है कि—

हर गांव, हर गरीब और हर कामकाजी व्यक्ति तक बीमा पहुंचे।

इसलिए—

  • माइक्रो इंश्योरेंस को बढ़ावा
  • कम प्रीमियम, कम दस्तावेज
  • किसान, मजदूर और असंगठित क्षेत्र पर फोकस

यह कदम सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करेगा।


LIC और सरकारी बीमा कंपनियों पर प्रभाव

LIC अधिनियम में संशोधन के बाद—

  • LIC को भी प्रतिस्पर्धी माहौल में काम करना होगा
  • सर्विस क्वालिटी और डिजिटल सुधार जरूरी होंगे
  • पॉलिसीधारकों को ज्यादा विकल्प मिलेंगे

हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि LIC का सार्वजनिक चरित्र बना रहेगा।


बिल कानून कब बनेगा और कब लागू होगा?

किसी भी विधेयक को कानून बनने के लिए—

  1. लोकसभा से पास
  2. राज्यसभा से पास
  3. राष्ट्रपति की मंजूरी
  4. सरकारी अधिसूचना

इन चरणों से गुजरना होता है।

यह विधेयक संसद से पारित हो चुका है और जल्द ही राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अधिनियम बन जाएगा। इसके बाद सरकार इसे अधिसूचित कर लागू करेगी।


आलोचना और आशंकाएं

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि—

  • 100% FDI से भारतीय कंपनियों पर दबाव बढ़ेगा
  • विदेशी कंपनियों का वर्चस्व हो सकता है

लेकिन सरकार का तर्क है कि मजबूत नियमन के साथ यह जोखिम नियंत्रित रहेगा।


निष्कर्ष

     ‘सबका बीमा, सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) विधेयक, 2025’ भारतीय बीमा क्षेत्र में एक दूरगामी और ऐतिहासिक सुधार है।

यह कानून—

  • बीमा को आम आदमी के करीब लाता है
  • पॉलिसीधारकों को मजबूत कानूनी सुरक्षा देता है
  • बीमा कंपनियों को जवाबदेह बनाता है

सरल शब्दों में कहें तो यह बिल बीमा को सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि जन-सुरक्षा का मजबूत माध्यम बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।