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विदेशी कंपनियों के हेड ऑफिस खर्चों पर कर कटौती की सीमा – आयकर अधिनियम की धारा 44C पर सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

विदेशी कंपनियों के हेड ऑफिस खर्चों पर कर कटौती की सीमा – आयकर अधिनियम की धारा 44C पर सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

प्रस्तावना

      आयकर कानून में विदेशी कंपनियों (Foreign Companies) के भारत में किए गए व्यापार से संबंधित कर निर्धारण हमेशा एक जटिल विषय रहा है। विशेष रूप से यह प्रश्न बार-बार न्यायालयों के समक्ष आया है कि विदेशी कंपनी द्वारा अपने हेड ऑफिस (Head Office) में किए गए खर्चों को भारत में संचालित व्यापार के लिए किस सीमा तक कटौती (Deduction) के रूप में स्वीकार किया जा सकता है

       इस संदर्भ में आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 44C (Section 44C) अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह स्पष्ट किया कि विदेशी कंपनियों के हेड ऑफिस खर्चों पर धारा 44C के अंतर्गत निर्धारित सीमा लागू होगी और उससे अधिक कटौती की अनुमति नहीं दी जा सकती

       यह निर्णय न केवल कर अधिकारियों के लिए बल्कि विदेशी कंपनियों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और कर कानून के विद्यार्थियों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।


धारा 44C का उद्देश्य और पृष्ठभूमि

       धारा 44C को आयकर अधिनियम में शामिल करने का मुख्य उद्देश्य यह था कि:

  • विदेशी कंपनियां अपने वैश्विक हेड ऑफिस खर्चों को भारत में अर्जित आय से अत्यधिक मात्रा में घटाकर
  • भारत में कर योग्य आय (Taxable Income) को कृत्रिम रूप से कम न कर सकें।

      सरकार ने यह महसूस किया कि कई विदेशी कंपनियां अपने मुख्यालय में होने वाले सामान्य प्रशासनिक खर्च, प्रबंधन खर्च, तकनीकी सलाह शुल्क आदि को भारत स्थित शाखा (Branch) या स्थायी प्रतिष्ठान (Permanent Establishment) के खर्च के रूप में दिखाकर कर बचाव (Tax Avoidance) कर रही थीं।

इसी समस्या के समाधान के लिए धारा 44C लाई गई।


धारा 44C का कानूनी प्रावधान (Legal Provision)

धारा 44C के अनुसार:

कोई भी विदेशी कंपनी भारत में अपने व्यापार या पेशे से संबंधित हेड ऑफिस खर्चों की कटौती केवल निर्धारित सीमा (Prescribed Limit) तक ही प्राप्त कर सकती है।

यह सीमा सामान्यतः निम्न में से जो कम हो, वही होगी:

  1. भारत में स्थायी प्रतिष्ठान की समायोजित कुल आय (Adjusted Total Income) का 5%, या
  2. वास्तव में हुए हेड ऑफिस खर्चों की राशि।

अर्थात, भले ही विदेशी कंपनी ने अधिक खर्च किया हो, कटौती 5% से अधिक नहीं हो सकती


मामले की पृष्ठभूमि

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह प्रश्न उठा कि:

  • क्या विदेशी कंपनी अपने वास्तविक (Actual) हेड ऑफिस खर्चों की पूरी कटौती का दावा कर सकती है?
  • या फिर क्या धारा 44C की सीमा अनिवार्य रूप से लागू होगी?

विदेशी कंपनी का तर्क था कि:

  • उसके द्वारा किए गए हेड ऑफिस खर्च वास्तविक, आवश्यक और पूर्णतः भारत में किए गए व्यापार से संबंधित हैं।
  • अतः उन्हें सामान्य व्यापार व्यय (Business Expenditure) के रूप में पूर्ण कटौती मिलनी चाहिए।

वहीं, आयकर विभाग का कहना था कि:

  • संसद ने विशेष रूप से धारा 44C बनाकर एक सीमा निर्धारित की है,
  • और किसी भी स्थिति में उस सीमा से अधिक कटौती की अनुमति नहीं दी जा सकती।

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मुख्य विधिक प्रश्न

  1. क्या धारा 44C अनिवार्य (Mandatory) है या वैकल्पिक (Optional)?
  2. क्या विदेशी कंपनी वास्तविक खर्चों का हवाला देकर धारा 44C से बाहर जा सकती है?
  3. क्या धारा 44C संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन करती है?

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से निर्णय दिया कि:

विदेशी कंपनियों द्वारा भारत में व्यापार हेतु किए गए हेड ऑफिस खर्चों पर धारा 44C की सीमा पूर्णतः लागू होगी।

मुख्य निष्कर्ष

  1. धारा 44C एक विशेष प्रावधान (Special Provision) है
    जब कोई विशेष प्रावधान बनाया जाता है, तो सामान्य प्रावधानों पर वही प्रभावी होता है।
  2. वास्तविक खर्च का तर्क स्वीकार्य नहीं
    भले ही खर्च वास्तविक और व्यापार से संबंधित हो, फिर भी कटौती की अधिकतम सीमा धारा 44C से नियंत्रित होगी।
  3. कर अपवंचन रोकने हेतु वैध कानून
    न्यायालय ने माना कि यह प्रावधान कर चोरी या कर बचाव को रोकने के लिए लाया गया है।
  4. संवैधानिक वैधता बरकरार
    धारा 44C को अनुच्छेद 14 के उल्लंघन के रूप में नहीं देखा गया क्योंकि:

    • विदेशी कंपनियों और घरेलू कंपनियों की स्थिति समान नहीं है
    • इसलिए अलग वर्गीकरण (Reasonable Classification) वैध है।

न्यायालय की महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ

सुप्रीम कोर्ट ने कहा:

  • विदेशी कंपनियों के हेड ऑफिस आमतौर पर कई देशों में व्यापार करते हैं।
  • यह निर्धारित करना कठिन होता है कि कौन-सा खर्च वास्तव में भारत में किए गए व्यापार से संबंधित है।
  • इसलिए एक निश्चित प्रतिशत की सीमा व्यावहारिक और न्यायसंगत समाधान है

इस निर्णय का करदाताओं पर प्रभाव

विदेशी कंपनियों के लिए

  • भारत में स्थित शाखा या स्थायी प्रतिष्ठान को अब
    हेड ऑफिस खर्चों की योजना (Tax Planning) धारा 44C के अंतर्गत ही करनी होगी।
  • वास्तविक खर्च अधिक होने पर भी पूर्ण कटौती संभव नहीं।

कर विभाग के लिए

  • यह निर्णय विभाग को मजबूत कानूनी आधार प्रदान करता है।
  • अनावश्यक विवादों में कमी आएगी।

कर कानून के छात्रों और पेशेवरों के लिए

  • यह निर्णय Special Provision vs General Provision के सिद्धांत को समझने का उत्कृष्ट उदाहरण है।
  • परीक्षा और व्यावहारिक दोनों दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण।

धारा 44C और कर संधियाँ (DTAA)

एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह भी उठा कि:

  • क्या भारत द्वारा अन्य देशों के साथ की गई Double Taxation Avoidance Agreements (DTAA) धारा 44C पर प्रभाव डालती हैं?

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:

  • जब तक संधि में विशेष रूप से अलग प्रावधान न हो,
  • घरेलू कानून (Domestic Law) लागू रहेगा।

आलोचनात्मक दृष्टिकोण

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • 5% की सीमा कई मामलों में व्यावहारिक रूप से कम हो सकती है।
  • इससे विदेशी निवेश (Foreign Investment) पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

हालांकि, न्यायालय ने कहा कि:

  • नीति निर्धारण (Policy Making) न्यायालय का कार्य नहीं है।
  • यह संसद का विशेषाधिकार है।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय स्पष्ट रूप से स्थापित करता है कि:

विदेशी कंपनियों के हेड ऑफिस खर्चों की कटौती भारत में केवल धारा 44C के अंतर्गत निर्धारित सीमा तक ही संभव है।

यह फैसला:

  • कर कानून में निश्चितता (Certainty) लाता है,
  • कर अपवंचन को रोकता है,
  • और भारतीय कर व्यवस्था की पारदर्शिता को मजबूत करता है।

कर कानून के विद्यार्थियों, अधिवक्ताओं और कर सलाहकारों के लिए यह निर्णय एक मार्गदर्शक मिसाल (Landmark Precedent) के रूप में सदैव महत्वपूर्ण रहेगा।