भारतीय सेना ने नए डिजिटल-प्रिंट कॉम्बैट कोट के लिए प्राप्त किए एक्सक्लुसिव आईपी हक — आत्मनिर्भर भारत और सुरक्षा दृष्टिकोण से एक ऐतिहासिक कदम
भारतीय सेना ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है: उसने अपने नए डिजिटल-प्रिंट कॉम्बैट कोट (New Coat Combat, Digital Print) के डिज़ाइन और पैटर्न पर अनन्य (Exclusive) बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) दर्ज करवा लिए हैं। यह कदम न सिर्फ सैन्य पोशाक प्रणाली में नवीनता का परिचायक है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) की अवधारणा और भारतीय रक्षा के डिज़ाइन-स्वायत्तता (design sovereignty) की दिशा में एक बड़ी प्रगति को दर्शाता है।
यह लेख विस्तार से बताएगा कि यह नया कोट क्या है, इसके तकनीकी और संरचनात्मक पहलू, आईपीआर पंजीकरण की कानूनी प्रक्रिया, सुरक्षा और रणनीतिक महत्व, साथ ही इस कदम के सामाजिक और आर्थिक प्रभाव।
1. पृष्ठभूमि: नया डिजिटल-प्रिंट कॉम्बैट कोट क्या है?
भारतीय सेना ने जनवरी 2025 में यह नया कोट कॉम्बैट (Combat Coat) पेश किया था, जो पारंपरिक वर्दी (uniform) से एक बड़ा अपग्रेड है।
इस कोट को नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT), नई दिल्ली ने डिज़ाइन किया है, और यह Army Design Bureau के तत्वावधान में एक सलाह-परियोजना (consultancy project) के रूप में विकसित किया गया था।
यह केवल एक कोट नहीं है — बल्कि तीन-लेयर सिस्टम (three-layer garment) पर आधारित है:
- Outer Layer (बाहरी कोट): डिजिटल प्रिंटेड कैमोफ्लैज डिज़ाइन, ताकि विभिन्न भू-भागों में छुपने में मदद मिले और मुकाबला स्थिरता (durability) बनी रहे।
- Inner Jacket (मध्य परत): इंसुलेटेड, हल्का और सांस लेने योग्य कपड़ा, जिससे सैनिकों को गर्मी मिले पर आंदोलन की स्वतंत्रता भी बनी रहे।
- Thermal/Base Layer (ताप-नियमन परत): बेस लेयर जो तापमान नियंत्रण और नमी नियंत्रण (moisture management) देती है, विशेष रूप से चरम मौसम में।
इस प्रकार यह कोट सिर्फ दिखने का नया रूप नहीं है, बल्कि प्रयोगात्मक टेक्सटाइल, एर्गोनॉमिक (ergonomic) डिज़ाइन, और ऑपरेशनल कुशलता — यानी कम्फर्ट + संरक्षण + लड़ाकू दक्षता — का संयोजन है।
2. आईपीआर पंजीकरण: कानूनी सुरक्षा और अनन्य अधिकार
न सिर्फ डिजाइन, बल्कि कैमोफ्लैज पैटर्न (डिजिटल प्रिंट) के लिए भी भारतीय सेना ने बौद्धिक संपदा अधिकार हासिल किए हैं।
विशेष रूप से:
- डिज़ाइन आवेदन संख्या 449667-001 है, जिसकी तारीख 27 फरवरी, 2025 है।
- यह आवेदन Controller General of Patents, Designs and Trademarks (CGPDTM), कोलकाता में दर्ज किया गया था।
- यह डिज़ाइन 7 अक्टूबर, 2025 को डिज़ाइन ऑफिसियल जर्नल (Official Journal of the Patent Office) में प्रकाशित हुआ।
इस पंजीकरण के साथ, अनाधिकृत निर्माण, कॉपी, या वाणिज्यिक उपयोग (commercial use) पर प्रतिबंध लगाया गया है।
यदि कोई गैर-प्राधिकृत इकाई इस डिज़ाइन या पैटर्न का उपयोग करने की कोशिश करती है, तो भारतीय सेना Designs Act, 2000, Designs Rules, 2001 और Patents Act, 1970 के प्रावधानों के अंतर्गत कानूनी कार्रवाई, इंजंक्शन, और मुआवजे का दावा कर सकती है।
यह अधिकार न सिर्फ सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि यह भारतीय सेना की डिज़ाइन स्वायत्तता और मॉडर्नाइजेशन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
3. सुरक्षा और रणनीतिक महत्व
यह कदम सिर्फ एक कानूनी सुरक्षित मोर्चा ही नहीं खोलता, बल्कि उसे कई रणनीतिक और सुरक्षा-लाभ भी हैं:
(a) अप्राधिकृत प्रतिकृति (Counterfeiting) से सुरक्षा
डिजाइन और पैटर्न पर IPR के कारण, सेना वह अधिकार रखती है कि किसी भी गैर-मान्यता प्राप्त निर्माता को अनुमति दे या न दे। यह सुरक्षा उस समस्या को रोकेगी जहाँ बाजार में नकली या अनधिकृत समान वर्दी विक्रय हो सकती है, जिससे सुरक्षा जोखिम पैदा हो सकते हैं।
(b) ऑपरेशनल गोपनीयता और रणनीतिक संरचना
डिजिटल-प्रिंट कैमोफ्लैज पैटर्न सिर्फ एक फैशन एलिमेंट नहीं है — वह रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। सही पैटर्न और डिज़ाइन छुपने की क्षमता, टो-पोटेराउन (terrain) में छिपने की दक्षता, और पहचान छुपाना बेहतर बनाती है।
यदि कोई अनाधिकृत व्यक्ति या संगठन समान डिज़ाइन का उत्पादन करता है, तो वह “कमान्डर-स्तर की असमानता (operational disparity)” पैदा कर सकता है — क्योंकि आक्रांता या अनुचित एजेंट भी उसी पैटर्न का इस्तेमाल कर सकते हैं।
(c) आत्मनिर्भरता और डिज़ाइन स्वावलंबन
यह पंजीकरण भारत की “Atmanirbhar Bharat” (स्वावलंबी भारत) नीति के अनुरूप है। IPR के जरिये सेना यह सुनिश्चित करती है कि उसकी नई वर्दी प्रणाली पर नियंत्रण बना रहे, और यह निर्भरता विदेशी निविदाओं या तकनीक पर कम हो।
यह “डिज़ाइन स्वायत्तता” न सिर्फ लागत नियंत्रण में मदद करेगा बल्कि भविष्य में निर्यात-संभावनाओं के लिए भी मार्ग खोल सकता है।
(d) गुणवत्ता नियंत्रण
जब उत्पादन लाइसेंस अथवा अनुज्ञा आधारित होगी, तो सेना यह सुनिश्चित कर सकती है कि केवल अधिकृत और प्रमाणित आपूर्तिकर्ता ही इस कॉम्बैट कोट का उत्पादन करें। इससे क्वालिटी नियंत्रण बेहतर होगा, घटिया या नकली सामग्रियों का उपयोग नहीं होगा, और सैनिकों को उच्च-मानक वर्दी मिलेगी।
4. भारतीय रक्षा उत्पादन में नवाचार और डिज़ाइन प्रबंधन
यह घटना कुछ व्यापक प्रवृत्तियों की ओर इशारा करती है जो भारतीय सेना और रक्षा मंत्रालय में तेजी से उभर रही हैं:
- डिफेंस + डिजाइन इंस्टीट्यूशन्स का सहयोग
NIFT जैसे डिजाइन संस्थान और सेना का Army Design Bureau मिलकर काम कर रहे हैं। यह एक मजबूत मॉडल है जिसमें विशेषज्ञ फैशन-डिज़ाइन और टेक्सटाइल ज्ञान का उपयोग रक्षा जरूरतों के लिए किया जाता है। - डिज़ाइन प्रोटेक्शन का महत्व
सिर्फ हथियार या हथियार प्रणालियों की नहीं, बल्कि पोशाक (uniform) डिजाइन को भी संवेदना और सुरक्षा दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह दिखाता है कि सेना अब अपने वर्दी डिज़ाइन को रणनीतिक परिसंपत्ति के रूप में देख रही है। - डिकाड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन (2023–2032)
यह कदम सेना की “द्वार-दशक परिवर्तन” (Decade of Transformation) पहल के अनुरूप है, जिसमें आत्मनिर्भरता, डिज़ाइन नवाचार, और प्रौद्योगिकी-चालित सुधारों पर जोड़ दिया गया है। - स्वदेशी टेक्सटाइल और टेक्निकल फैब्रिक्स का उपयोग
तीन-लेयर कोट में उन्नत टेक्सटाइल सामग्री का प्रयोग हुआ है — breathable, insulating, moisture-managing — ये सभी विशेषताएं स्वदेशी टेक्सटाइल विकास की दिशा में कदम हैं।
5. कानूनी चुनौतियाँ और संभावित विवाद
हालाँकि IPR पंजीकरण ब्रिट-स्थापित कॉपीराइट या पेटेंट अधिकारों की तुलना में मजबूत सुरक्षा देता है, लेकिन कुछ चुनौतियाँ और जोखिम भी हैं:
(a) उल्लंघन और निगरानी
- सेना को यह सुनिश्चित करना होगा कि कोट की डिजाइन और पैटर्न का उपयोग किसी भी अनाधिकृत स्रोत द्वारा न हो।
- इसके लिए निरंतर निगरानी, अनाधिकृत विक्रेताओं की पहचान, और कानूनी कार्रवाई की क्षमता चाहिए होगी।
(b) उत्पादन लाइसेंस प्रबंधन
- यदि सेना चाहती है कि अन्य प्रमाणित आपूर्तिकर्ता यह कोट बनाएँ, तो यह लाइसेंसिंग मॉडल साफ, पारदर्शी और मजबूत होना चाहिए।
- गलत लाइसेंसिंग मॉडल से सुरक्षा जोखिम बढ़ सकते हैं, अगर अनाधिकृत या कम गुणवत्ता वाले उत्पाद लाइसेंस प्राप्त कर लेते हैं।
(c) आयात-निर्यात संतुलन
- भविष्य में, अगर कोट या तकनीक को निर्यात करने की योजना है, तो विदेशी बाजारों में IPR संरक्षण और लाइसेंसिंग व्यवस्था जटिल हो सकती है।
- अलग-अलग देशों की कॉपीराइट/डिज़ाइन प्रोटेक्शन नियमावली में असमानता समस्या खड़ी कर सकती है।
6. व्यापक प्रभाव: सेना, अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता
(a) अर्थव्यवस्था और रक्षा उद्योग
यह कदम भारतीय रक्षा डिजाइन उद्योग के लिए एक संकेत है कि सेना न केवल हथियारों पर निर्भर है, बल्कि डिज़ाइन और टेक्सटाइल नवाचार में भी सक्रिय हिस्सेदारी ले रही है। इससे:
- स्थानीय टेक्सटाइल कंपनियों को काम मिलने की संभावनाएं होंगी,
- उच्च तकनीक सैन्य पोशाक क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, और
- रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता मजबूत होगी।
(b) सैनिक कल्याण
नया तीन-लेयर कोट न सिर्फ बेहतर सुरक्षा देता है, बल्कि कम्फ़र्ट को भी प्राथमिकता देता है:
- कठिन और विविध भौगोलिक परिस्थितियों में बेहतर अनुकूलन,
- हल्के और सांस लेने योग्य मिड-लेयर से थकान कम हो सकती है,
- ताप-नियमन बेस लेयर से चरम मौसम में सैनिकों को फायदे मिल सकते हैं।
इस प्रकार, यह पोशाक सैनिकों की मानवीय और मानसिक स्थिति (मानसिक बोझ, गतिशीलता, ज़िंदा रहने की क्षमता) पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
(c) राष्ट्रीय सुरक्षा और आत्म-निर्भरता की दिशा
आईपीआर के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश जाता है कि भारतीय सेना:
- अपनी डिजाइन पर पूरा नियंत्रण चाहती है,
- विदेशी टेक्नोलॉजी पर निर्भरता कम करना चाहती है,
- और रक्षा परिदृश्य में डिज़ाइन और नवाचार को रणनीतिक संसाधन मानती है।
यह आत्म-निर्भरता (self-reliance) की दिशा में ठोस कदम है — और सिर्फ हथियारों या प्लेटफार्मों तक सीमित नहीं है, बल्कि पोशाक और सैनिक उपकरणों तक भी फैला हुआ है।
7. भविष्य की चुनौतियाँ और अवसर
यह उपलब्धि भविष्य में कई नए मार्ग खोल सकती है, लेकिन कुछ चुनौतियों का सामना भी करना होगा:
- लाइसेंसिंग मॉडल का विस्तार
सेना को एक सुव्यवस्थित लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क तैयार करना होगा जिससे अधिकृत आपूर्तिकर्ताओं की संख्या टिकाऊ रूप से बढ़ सके। - उत्पादन क्षमता और गोपनीयता
भारी पैमाने पर निर्माण में गोपनीयता और गुणवत्ता बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। - निर्यात संभावनाएं
अगर सेना इस कोट को अन्य देशों को निर्यात करना चाहे, तो वह देशों के IPR कानूनों, लाइसेंसिंग समझौतों और उत्पादन लागतों पर काम करना होगा। - निरंतर नवाचार
सिर्फ एक डिज़ाइन पंजीकरण ही पर्याप्त नहीं है; भविष्य में टेक्सटाइल सामग्री, स्मार्ट कपड़े, या डि-नायल (de-nial) या स्टेथर (stealth) फीचर्स के साथ नए डिज़ाइनों पर काम करना होगा।
8. निष्कर्ष: एक रणनीतिक मील का पत्थर
भारतीय सेना द्वारा नए डिजिटल-प्रिंट कॉम्बैट कोट के लिए एक्सक्लुसिव आईपी राइट्स सुरक्षित करना एक रणनीतिक और दूरदर्शी कदम है। यह:
- आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के अनुरूप,
- रक्षा डिज़ाइन और टेक्सटाइल नवाचार में आत्म-विश्वास बढ़ाता है,
- सैन्य पोशाक प्रणाली को सिर्फ कम्बैट वर्दी से आगे ले जाता है,
- कानूनी, सुरक्षा और आर्थिक दृष्टिकोण से डिज़ाइन स्वायत्तता को मजबूत बनाता है।
यह उपलब्धि न केवल आज की जरूरतों को पूरा करती है, बल्कि आने वाले दशकों में भारतीय सेना को सशक्त, सुरक्षित और स्व-नियंत्रित रखेगी।