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पुलिस कॉल, पूछताछ और गिरफ्तारी : नए BNSS कानून के तहत नागरिकों के अधिकार (विस्तृत विश्लेषण)

पुलिस कॉल, पूछताछ और गिरफ्तारी : नए BNSS कानून के तहत नागरिकों के अधिकार (विस्तृत विश्लेषण)

भारत में आपराधिक न्याय प्रणाली में 1 जुलाई 2024 से एक ऐतिहासिक बदलाव आया, जब Criminal Procedure Code, 1973 (CrPC) को हटाकर Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 (BNSS) लागू किया गया।
इस नए कानून का उद्देश्य नागरिकों के अधिकारों की रक्षा, पुलिस शक्तियों पर नियंत्रण, और डिजिटल व पारदर्शी आपराधिक प्रक्रिया को बढ़ावा देना है।

आज भी आम लोगों में सबसे बड़ा डर यही होता है —

“अगर पुलिस फोन कर दे या मैसेज भेज दे, तो क्या थाने जाना जरूरी है?”

इस लंबे लेख में हम BNSS और पुराने CrPC — दोनों के संदर्भ में यह स्पष्ट करेंगे कि

  • पुलिस आपको कब बुला सकती है
  • कब लिखित नोटिस जरूरी है
  • महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और बीमार व्यक्तियों को क्या विशेष सुरक्षा मिली है
  • गिरफ्तारी, हथकड़ी, नोटिस और शिकायत से जुड़े आपके कानूनी विकल्प क्या हैं

भाग–1 : पुलिस कॉल या मैसेज आए तो क्या करें? (BNSS के तहत स्थिति)

नए कानून के अनुसार यह स्पष्ट सिद्धांत है कि —

पुलिस का फोन कॉल या WhatsApp मैसेज कोई कानूनी नोटिस नहीं है।

अगर पुलिस आपको केवल मौखिक रूप से थाने बुलाती है, तो आपको जाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, जब तक कि BNSS के अनुसार विधिवत लिखित नोटिस न दिया जाए।


1. पूछताछ के लिए लिखित नोटिस – Section 35(3) BNSS

पुराने CrPC की धारा 41A को अब BNSS की धारा 35(3) में शामिल किया गया है।

 मुख्य नियम

यदि किसी व्यक्ति पर लगाया गया अपराध ऐसा है जिसमें 7 वर्ष से कम सजा का प्रावधान है, तो —

  • पुलिस सीधे गिरफ्तारी नहीं कर सकती
  • पहले लिखित नोटिस (Notice of Appearance) देना अनिवार्य है

 नोटिस में क्या होना चाहिए?

  • पुलिस अधिकारी का नाम व पद
  • केस / FIR नंबर
  • आरोपित धाराएं
  • थाने में उपस्थित होने की तारीख, समय और स्थान

 यदि आप नोटिस का पालन करते हैं, तो सामान्यतः पुलिस आपको गिरफ्तार नहीं कर सकती।


2. बुजुर्ग, बीमार व्यक्ति की गिरफ्तारी पर नया प्रतिबंध

BNSS ने पहली बार यह स्पष्ट किया है कि —
यदि कोई व्यक्ति:

  • 60 वर्ष से अधिक आयु का है, या
  • गंभीर रूप से बीमार है

और मामला 7 वर्ष से कम सजा वाला है, तो —
पुलिस को गिरफ्तारी से पहले DSP स्तर के अधिकारी की लिखित अनुमति लेनी होगी।

यह प्रावधान मनमानी गिरफ्तारी पर बड़ा अंकुश लगाता है।


भाग–2 : महिलाओं, बच्चों और विशेष वर्गों की सुरक्षा – Section 179 BNSS

BNSS की सबसे महत्वपूर्ण और मानवाधिकार–हितैषी धारा है Section 179

 महिलाओं के लिए

  • किसी भी उम्र की महिला को थाने पूछताछ के लिए नहीं बुलाया जा सकता
  • पुलिस को महिला के घर या उसकी सहमति से किसी अन्य स्थान पर जाना होगा
  • पूछताछ महिला पुलिस अधिकारी की उपस्थिति में होनी चाहिए

 बच्चों के लिए

  • 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों को थाने नहीं बुलाया जा सकता

 बुजुर्गों के लिए

  • 60 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति को थाने बुलाना प्रतिबंधित
    (पुराने कानून में यह सीमा 65 वर्ष थी)

 दिव्यांग व्यक्तियों के लिए

  • मानसिक या शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्ति से पूछताछ उसके निवास स्थान पर ही होगी

 यह प्रावधान पुलिस के दबाव, डर और उत्पीड़न को रोकने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।


भाग–3 : गिरफ्तारी की सूचना और पारदर्शिता – Section 36 BNSS

BNSS की धारा 36 ने गिरफ्तारी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बना दिया है।

 अनिवार्य व्यवस्थाएं

  • हर थाने और जिले में एक Designated Officer
  • यह अधिकारी तुरंत गिरफ्तार व्यक्ति के परिवार / मित्र को सूचना देगा
  • थाने के बाहर डिस्प्ले बोर्ड पर यह जानकारी होगी:
    • गिरफ्तार व्यक्ति का नाम
    • आरोपित अपराध
    • गिरफ्तारी की तारीख

यह व्यवस्था गुप्त हिरासत (Illegal Detention) को रोकने के लिए लाई गई है।


भाग–4 : हथकड़ी का प्रयोग – Section 43(3) BNSS

नए कानून में पहली बार हथकड़ी को लेकर स्पष्ट नियम बनाए गए हैं।

 हथकड़ी कब लग सकती है?

केवल गंभीर अपराधों में, जैसे —

  • हत्या
  • बलात्कार
  • आतंकवाद
  • संगठित अपराध

 हथकड़ी कब नहीं?

  • छोटे अपराध
  • सामान्य विवाद
  • 7 साल से कम सजा वाले मामले

 हथकड़ी लगाना अब अपवाद है, नियम नहीं।


भाग–5 : तलाशी, जब्ती और वीडियो रिकॉर्डिंग

BNSS ने तलाशी और जब्ती को डिजिटल साक्ष्य–आधारित बना दिया है।

 नया नियम

  • तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया Audio-Video रिकॉर्डिंग से होगी
  • नागरिक इसकी मांग कर सकता है
  • यह रिकॉर्डिंग अदालत में साक्ष्य बनेगी

यह प्रावधान फर्जी बरामदगी और पुलिस झूठे आरोपों पर रोक लगाता है।


भाग–6 : मजिस्ट्रेट से शिकायत – Section 175 BNSS

यदि पुलिस:

  • नोटिस नहीं दे रही
  • अवैध दबाव बना रही
  • गैरकानूनी हिरासत कर रही

तो नागरिक सीधे मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत कर सकता है।
मजिस्ट्रेट को जांच और आदेश देने का अधिकार है।


भाग–7 : Zero FIR – हर नागरिक का अधिकार

अब आप:

  • किसी भी थाने में FIR दर्ज करा सकते हैं
  • चाहे अपराध कहीं भी हुआ हो

पुलिस यह कहकर मना नहीं कर सकती कि —

“यह हमारे क्षेत्र का मामला नहीं है”


भाग–8 : पुराने कानून (CrPC) के तहत अधिकार – संक्षेप में

 बिना वारंट गिरफ्तारी – Section 41 CrPC

  • केवल ठोस कारण होने पर

 नोटिस – Section 41A CrPC

  • 7 साल तक की सजा वाले मामलों में अनिवार्य

 महिलाओं की सुरक्षा – Section 160 CrPC

  • थाने में पूछताछ निषिद्ध

 समय सीमा

  • सुबह 6 बजे से पहले
  • शाम 6 बजे के बाद
    पूछताछ नहीं

 वकील से मिलने का अधिकार

  • संविधान का अनुच्छेद 22

भाग–9 : अगर पुलिस बिना कारण बुलाए तो क्या करें?

✔ विनम्रता से पूछें:

  • FIR नंबर
  • धाराएं
  • कारण

✔ हमेशा लिखित नोटिस मांगें

✔ वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत करें

  • DSP / ACP / SP

✔ तुरंत वकील से संपर्क करें

✔ अवैध हिरासत पर
हाई कोर्ट में Habeas Corpus याचिका


निष्कर्ष (Conclusion)

नया BNSS कानून स्पष्ट संदेश देता है कि —

पुलिस कानून से ऊपर नहीं है, और नागरिक असहाय नहीं है।

अब:

  • मौखिक कॉल से डरने की जरूरत नहीं
  • लिखित नोटिस आपका अधिकार है
  • महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को विशेष संरक्षण है
  • गिरफ्तारी और पूछताछ में पारदर्शिता अनिवार्य है

कानून जानिए, अधिकार समझिए, और आत्मविश्वास के साथ पुलिस से बात कीजिए।