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दिल्ली हाईकोर्ट की मानवीय अपील: AIIMS में 3,000 बिस्तरों वाले नाइट शेल्टर के लिए वकीलों से सहयोग का आह्वान

दिल्ली हाईकोर्ट की मानवीय अपील: AIIMS में 3,000 बिस्तरों वाले नाइट शेल्टर के लिए वकीलों से सहयोग का आह्वान

        दिल्ली की ठंडी रातें केवल मौसम की चुनौती नहीं होतीं, बल्कि वे उन हजारों गरीब, बीमार और असहाय लोगों के लिए जीवन-मरण का प्रश्न बन जाती हैं, जो इलाज के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) जैसे बड़े अस्पतालों का रुख करते हैं। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने हाल ही में एक अत्यंत मानवीय और संवेदनशील पहल की है। न्यायालय ने वकीलों से आग्रह किया है कि वे AIIMS में प्रस्तावित 3,000 बिस्तरों वाले नाइट शेल्टर के निर्माण के लिए आगे आकर आर्थिक सहयोग करें, ताकि मरीजों और उनके तीमारदारों को ठंड से बचाया जा सके।

       यह पहल न केवल न्यायपालिका की सामाजिक संवेदनशीलता को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि कानून केवल अदालतों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के सबसे कमजोर वर्गों तक उसकी पहुंच और जिम्मेदारी होनी चाहिए।


AIIMS और मरीजों की हकीकत

       AIIMS देश का सबसे प्रतिष्ठित सरकारी चिकित्सा संस्थान है। यहां हर दिन देश के कोने-कोने से हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें से बड़ी संख्या ऐसे लोगों की होती है, जिनकी आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर होती है। इलाज तो किसी तरह मिल जाता है, लेकिन अस्पताल परिसर के बाहर उनके ठहरने की व्यवस्था लगभग न के बराबर होती है।

रात के समय:

  • मरीजों के परिजन फुटपाथ पर सोने को मजबूर होते हैं,
  • ठंड, बारिश और प्रदूषण का सीधा सामना करते हैं,
  • कई बार बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे असुरक्षित हालात में रहते हैं,
  • और अनेक बार बीमारी से अधिक खतरनाक परिस्थितियों से जूझते हैं।

यही वह सामाजिक सच्चाई है, जिसे दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने अवलोकन में गंभीरता से लिया।


दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणी

       दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है कि वह ऐसे मानवीय संकटों का समाधान करे, बल्कि समाज के सक्षम वर्गों, विशेषकर कानूनी समुदाय को भी इसमें भागीदारी निभानी चाहिए।

न्यायालय ने कहा कि:

“वकील समाज के उन वर्गों में आते हैं, जिनकी सामाजिक जिम्मेदारी केवल न्यायालय में बहस तक सीमित नहीं है। उन्हें समाज की पीड़ा को समझते हुए आगे आना चाहिए।”

इसी भावना के साथ अदालत ने AIIMS में 3,000 बिस्तरों वाले नाइट शेल्टर के निर्माण हेतु वकीलों से स्वैच्छिक सहयोग का आह्वान किया।


नाइट शेल्टर की आवश्यकता क्यों?

AIIMS में नाइट शेल्टर केवल एक इमारत नहीं होगी, बल्कि यह:

  • मरीजों के परिजनों के लिए सुरक्षित आश्रय,
  • महिलाओं और बच्चों के लिए सम्मानजनक ठहराव,
  • बुजुर्गों के लिए ठंड से सुरक्षा,
  • और गरीबों के लिए मानवीय सहारा बनेगा।

इस शेल्टर में:

  • स्वच्छ बिस्तर,
  • पीने का पानी,
  • शौचालय,
  • प्राथमिक चिकित्सा सुविधा,
  • और सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने की योजना है।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इलाज के लिए आए किसी भी व्यक्ति को रात सड़क पर न बितानी पड़े।


वकीलों की भूमिका: केवल न्याय नहीं, करुणा भी

         न्यायपालिका ने जिस वर्ग से सहयोग मांगा है, वह है – वकील समुदाय। इसका कारण स्पष्ट है। वकील न केवल कानून के जानकार होते हैं, बल्कि वे समाज के मार्गदर्शक भी माने जाते हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट का यह संदेश बेहद महत्वपूर्ण है कि:

  • कानून का पेशा केवल आजीविका नहीं,
  • बल्कि समाज सेवा का माध्यम भी है।

यदि वकील समुदाय इस पहल में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता है, तो यह पूरे देश के लिए एक उदाहरण बन सकता है।


संवैधानिक दृष्टिकोण से पहल का महत्व

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी देता है। इस अधिकार में गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार भी निहित है। जब कोई व्यक्ति इलाज के दौरान फुटपाथ पर ठंड में सोने को मजबूर होता है, तो उसका यह मौलिक अधिकार गंभीर रूप से प्रभावित होता है।

दिल्ली हाईकोर्ट की यह पहल सीधे तौर पर अनुच्छेद 21 की आत्मा से जुड़ी हुई है। यह न्यायिक सक्रियता का ऐसा रूप है, जो अदालतों को केवल विवाद निपटाने वाली संस्था से आगे बढ़ाकर सामाजिक संरक्षक बनाता है।


सरकारी योजनाओं की सीमाएं

सरकार द्वारा रैन बसेरों और शेल्टर होम की कई योजनाएं चलाई जाती हैं, लेकिन:

  • उनकी संख्या सीमित होती है,
  • अस्पतालों के पास उनकी उपलब्धता कम होती है,
  • और क्षमता अक्सर जरूरत से कम पड़ जाती है।

AIIMS जैसे संस्थान में प्रतिदिन हजारों लोग आते हैं। ऐसे में 3,000 बिस्तरों का नाइट शेल्टर भी न्यूनतम आवश्यकता के अनुरूप ही माना जा सकता है।

इसलिए दिल्ली हाईकोर्ट ने इस परियोजना को केवल सरकारी योजना न मानकर सामाजिक सहभागिता का विषय बनाया।


सामाजिक न्याय की दिशा में एक कदम

यह पहल सामाजिक न्याय की अवधारणा को मजबूत करती है। न्याय केवल अदालतों में फैसलों से नहीं, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों को सम्मान और सुरक्षा देने से भी होता है।

नाइट शेल्टर:

  • मरीजों को मानसिक सुकून देगा,
  • परिजनों को चिंता से मुक्त करेगा,
  • और अस्पताल के वातावरण को अधिक मानवीय बनाएगा।

यह पहल यह भी दिखाती है कि न्यायपालिका केवल कानून की भाषा नहीं बोलती, बल्कि इंसानियत की भाषा भी समझती है।


नागरिक समाज की जिम्मेदारी

दिल्ली हाईकोर्ट ने भले ही वकीलों से विशेष रूप से अपील की हो, लेकिन यह संदेश पूरे नागरिक समाज के लिए है। डॉक्टर, शिक्षक, व्यापारी, उद्योगपति और आम नागरिक — सभी इस तरह की पहल में सहयोग कर सकते हैं।

यदि समाज के हर सक्षम व्यक्ति का छोटा सा योगदान भी जुड़ जाए, तो:

  • नाइट शेल्टर का निर्माण शीघ्र हो सकता है,
  • इसकी सुविधाएं बेहतर बन सकती हैं,
  • और भविष्य में ऐसे और प्रकल्पों की नींव रखी जा सकती है।

मीडिया और जागरूकता की भूमिका

इस पहल को सफल बनाने में मीडिया की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब ऐसी खबरें समाज के सामने आती हैं, तो लोगों में संवेदनशीलता जागती है। मीडिया केवल खबर बताने का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का उत्प्रेरक भी बन सकता है।

दिल्ली हाईकोर्ट की यह अपील यदि व्यापक रूप से प्रचारित होती है, तो निश्चित रूप से समाज के अनेक वर्ग इससे जुड़ेंगे।


भविष्य के लिए संदेश

यह मामला केवल AIIMS तक सीमित नहीं है। यह पूरे देश के अस्पतालों, सार्वजनिक संस्थानों और सामाजिक ढांचे के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करता है। यदि हर बड़े अस्पताल के साथ एक सम्मानजनक नाइट शेल्टर हो, तो लाखों लोगों का जीवन बेहतर हो सकता है।

दिल्ली हाईकोर्ट का यह कदम बताता है कि:

  • न्यायालय केवल कानून का प्रहरी नहीं,
  • बल्कि समाज की संवेदनाओं का संरक्षक भी है।

निष्कर्ष

        दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा वकीलों से AIIMS के लिए 3,000 बिस्तरों वाले नाइट शेल्टर के निर्माण में सहयोग की अपील एक ऐतिहासिक, मानवीय और प्रेरणादायक पहल है। यह पहल न केवल मरीजों और उनके परिजनों को राहत देगी, बल्कि समाज को यह संदेश भी देगी कि न्याय और करुणा एक-दूसरे के पूरक हैं।

       जब न्यायपालिका समाज को संवेदनशील बनने का संदेश देती है, तब वह केवल आदेश नहीं देती, बल्कि एक दिशा दिखाती है। AIIMS नाइट शेल्टर की यह पहल उसी दिशा में एक मजबूत कदम है — एक ऐसा कदम, जो ठंड में कांपते हजारों लोगों को गर्माहट, सुरक्षा और सम्मान देने का माध्यम बनेगा।