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“क्लीन स्लेट” सिद्धांत की पुनः पुष्टि: आर्बिट्रेशन बनाम दिवाला कानून के संगम पर बॉम्बे हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

“क्लीन स्लेट” सिद्धांत की पुनः पुष्टि: आर्बिट्रेशन बनाम दिवाला कानून के संगम पर बॉम्बे हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

प्रस्तावना: जब दो विशेष कानून आमने-सामने हों

भारतीय विधिक व्यवस्था में कभी-कभी ऐसे क्षण आते हैं जब दो स्वतंत्र और सशक्त कानून—दोनों ही अपने-अपने क्षेत्र में निर्णायक—एक-दूसरे से टकराते प्रतीत होते हैं। ऐसा ही एक संवेदनशील और जटिल टकराव देखने को मिलता है मध्यस्थता कानून (Arbitration Law) और दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता, 2016 (IBC) के बीच।

बॉम्बे हाईकोर्ट का हालिया निर्णय इसी टकराव को स्पष्ट दिशा देता है और यह स्थापित करता है कि—

जब एक अनुमोदित Resolution Plan के माध्यम से कॉरपोरेट देनदार को “Clean Slate” मिल जाती है, तो उससे पूर्व के सभी दावे—चाहे वे कितने ही ठोस, निर्णीत या क्रिस्टलाइज़्ड क्यों न हों—समाप्त माने जाएंगे।


मामले की पृष्ठभूमि: विवाद की जड़ कहाँ है?

इस प्रकरण में:

  • एक पक्ष के पक्ष में Arbitral Award पारित हुआ
  • दूसरे पक्ष (Corporate Debtor) ने उस Award को चुनौती दी
  • चुनौती के दौरान, अदालत ने ₹12.76 करोड़ की राशि
    • कोर्ट में जमा कराई
    • और बाद में इंटरिम व्यवस्था के रूप में
    • Judgment Creditor को निकालने (withdraw) की अनुमति दी

इसी बीच:

  • Corporate Debtor के विरुद्ध
  • IBC के तहत CIRP (Corporate Insolvency Resolution Process) शुरू हुआ
  • एक Resolution Plan स्वीकृत हुआ
  • जिसमें उक्त Arbitral Claim को मान्यता नहीं दी गई

मुख्य कानूनी प्रश्न (Core Legal Issues)

बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष प्रमुख प्रश्न यह था:

क्या वह राशि, जो Arbitral Award के आधार पर इंटरिम रूप से कोर्ट से निकाली गई थी, उस स्थिति में Judgment Creditor अपने पास रख सकता है, जब बाद में IBC के तहत स्वीकृत Resolution Plan उस दावे को पूरी तरह समाप्त (wipe out) कर देता है?

साथ ही यह प्रश्न भी जुड़ा था:

क्या Judgment Creditor उस राशि पर ब्याज (Interest) का भी हकदार है?


Custodia Legis का सिद्धांत: अदालत के संरक्षण में राशि

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सबसे पहले यह स्पष्ट किया कि:

  • Arbitral Award के विरुद्ध
  • जब चुनौती लंबित होती है
  • और राशि कोर्ट में जमा होती है

तो वह राशि होती है:

Custodia Legis — अर्थात अदालत की अभिरक्षा में

इसका अर्थ:

  • वह राशि अंतिम अधिकार (final entitlement) नहीं दर्शाती
  • उसका निकाला जाना (withdrawal)
    • केवल इंटरिम और इक्विटेबल व्यवस्था होती है
    • ताकि किसी पक्ष को अपूरणीय क्षति न हो

IBC का “Clean Slate” सिद्धांत

कोर्ट ने अपने निर्णय में IBC के एक मूलभूत सिद्धांत पर विशेष बल दिया—

🔹 Clean Slate Doctrine

IBC का उद्देश्य है:

  • एक असफल या संकटग्रस्त कॉरपोरेट देनदार को
  • नई शुरुआत (fresh start) देना

सुप्रीम कोर्ट पहले ही कई मामलों में कह चुका है कि:

Resolution Plan के अनुमोदन के बाद, कॉरपोरेट देनदार को अतीत के सभी दावों से मुक्त माना जाएगा।

इसमें शामिल हैं:

  • Contractual Claims
  • Decretal Claims
  • Arbitral Awards
  • Even Pending Litigations

Arbitral Award भी क्यों नहीं बच पाया?

Judgment Creditor का तर्क था:

  • Award पहले ही पारित हो चुका था
  • राशि आंशिक रूप से मिल भी चुकी थी
  • इसलिए यह एक crystallised right है

लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट ने इसे अस्वीकार करते हुए कहा:

Resolution Plan के अनुमोदन के बाद, “crystallised” और “pending” दावों के बीच कोई अंतर नहीं किया जा सकता।

यदि:

  • कोई दावा Resolution Plan में शामिल नहीं है
  • या उसे अस्वीकार कर दिया गया है

तो:

वह दावा विधिक रूप से अस्तित्वहीन (non est) हो जाता है।


₹12.76 करोड़ वापस करने का आदेश

इन सिद्धांतों के आधार पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि:

  • Judgment Creditor द्वारा
  • जो ₹12.76 करोड़
  • Arbitral Award के आधार पर
  • इंटरिम रूप से निकाली गई थी

उसे:

कॉरपोरेट देनदार / Resolution Applicant को वापस किया जाए।

कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि:

  • वह राशि कभी भी अंतिम भुगतान नहीं थी
  • बल्कि केवल न्यायसंगत अंतरिम व्यवस्था थी

ब्याज (Interest) की मांग क्यों खारिज हुई?

हालाँकि कोर्ट ने राशि वापसी का आदेश दिया, लेकिन:

  • उस पर ब्याज (Interest) देने से
  • स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया

कारण:

  1. राशि Judgment Creditor के पास रही
  2. वह भी उसके अनुरोध पर
  3. और अदालत की अनुमति से
  4. कोई दुर्भावनापूर्ण आचरण सिद्ध नहीं हुआ

इसलिए:

Equity और Justice के सिद्धांतों के तहत ब्याज देना उचित नहीं समझा गया।


Arbitration बनाम IBC: कौन सर्वोपरि?

यह फैसला एक बार फिर स्थापित करता है कि:

IBC एक विशेष (Special) और बाद का कानून है, जो अन्य सभी कानूनों पर वरीयता रखता है।

धारा 238, IBC:

“IBC के प्रावधान किसी भी अन्य कानून के विपरीत होने पर भी प्रभावी होंगे।”

इसलिए:

  • Arbitration Act
  • Civil Procedure
  • Contract Law

सभी को IBC के सामने झुकना पड़ता है।


Judgment Creditors के लिए सबक

यह निर्णय Judgment Creditors के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी है:

  • केवल Arbitral Award मिल जाना पर्याप्त नहीं
  • यदि Corporate Debtor IBC में चला जाए
  • और आपका दावा Resolution Plan में शामिल न हो

तो:

आपका दावा पूरी तरह समाप्त हो सकता है।


Resolution Applicants के लिए राहत

वहीं दूसरी ओर, यह निर्णय:

  • Resolution Applicants
  • और नए प्रबंधन के लिए
  • एक मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करता है

उन्हें यह भरोसा देता है कि:

Resolution Plan के बाद पुराने विवाद पुनर्जीवित नहीं होंगे।


न्यायिक दृष्टिकोण: संतुलन और निश्चितता

बॉम्बे हाईकोर्ट का यह निर्णय:

  • Commercial Certainty
  • Speedy Resolution
  • Investor Confidence

को बढ़ावा देता है।

यदि पुराने दावे:

  • बार-बार उठते रहें
  • या आंशिक भुगतान के आधार पर
  • जीवित रखे जाएँ

तो IBC का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।


पूर्ववर्ती सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों से सामंजस्य

यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के अनेक निर्णयों की भावना के अनुरूप है, जिनमें कहा गया है कि:

  • Resolution Plan एक binding contract है
  • सभी stakeholders पर लागू होता है
  • और अतीत को समाप्त करता है

आलोचना और संभावित चिंताएँ

आलोचना:

  • Award Holder की मेहनत व्यर्थ
  • Arbitration की विश्वसनीयता पर प्रश्न

प्रत्युत्तर:

  • IBC का उद्देश्य व्यक्तिगत न्याय नहीं
  • बल्कि आर्थिक पुनरुद्धार और प्रणालीगत स्थिरता है

निष्कर्ष: दिवाला कानून की सर्वोच्चता की पुनः पुष्टि

बॉम्बे हाईकोर्ट का यह निर्णय स्पष्ट संदेश देता है कि:

जब IBC का Resolution Plan लागू हो जाता है, तो वह सभी पुराने दावों पर पूर्ण विराम लगा देता है—चाहे वे Arbitration Award से ही क्यों न उत्पन्न हुए हों।

₹12.76 करोड़ की वापसी का आदेश और ब्याज से इनकार:

  • कानून
  • न्याय
  • और व्यावहारिक विवेक

तीनों के संतुलन का उत्कृष्ट उदाहरण है।


संक्षेप में संदेश

Arbitration आपको अधिकार देता है,
लेकिन IBC उस अधिकार को भी समाप्त कर सकता है।
Resolution Plan के सामने कोई दावा अमर नहीं।