“एल्युमिनियम शेल्व्स पर कस्टम ड्यूटी लागू — सुप्रीम कोर्ट ने मशरूम खेती उपकरण को ‘कृषि मशीनरी के पुर्ज़ों’ के बजाय ‘एल्युमिनियम स्ट्रक्चर्स’ के रूप में वर्गीकृत किया”
परिचय
6 जनवरी 2026 को भारत के सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम निर्यात-आयात (Customs Duty) वर्गीकरण विवाद में फैसला सुनाया जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि मशरूम (Mushroom) खेती के लिए आयात किए गए एल्युमिनियम शेल्व्स (Aluminium Shelving) को “कृषि मशीनरी के हिस्सों (parts of agricultural machinery)” के रूप में नहीं देखा जाए, बल्कि उन्हें एल्युमिनियम संरचनाओं (Aluminium Structures) के रूप में वर्गीकृत किया जाना चाहिए। इसके परिणामस्वरूप उन पर कस्टम ड्यूटी, काउंटरवेलिंग ड्यूटी, सैस और अन्य शुल्क लागू होंगे, जो कि मशीनरी के हिस्सों के रूप में वर्गीकृत होने पर शून्य होती। यह निर्णय सिर्फ़ तलकटारिब्युटरी मुद्दा नहीं है, बल्कि निर्यात-आयात कानूनी सिद्धांतों, टैरिफ हेडिंग की व्याख्या, और कस्टम एक्ट के लागू सिद्धांतों पर निर्णय देने वाला एक महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय भी है।
1. मामला — M/s Welkin Foods बनाम आयात शुल्क विभाग
यह विवाद M/s Welkin Foods (एक कंपनी जो मशरूम खेती से जुड़ा उपकरण आयात करती है) और कस्टम विभाग (Commissioner of Customs) के बीच उत्पन्न हुआ। Welkin Foods ने एल्युमिनियम शेल्विंग सिस्टम, फ़्लोर ड्रेन और ऑटोमैटिक वॉटरिंग सिस्टम को भारत में आयात किया और इन्हें “कृषि मशीनरी के हिस्सों — CTI 84369900” के तहत दाखिल किया, जहाँ निर्यात पर शून्य कस्टम ड्यूटी लगता था।
हालाँकि, कस्टम विभाग ने पाया कि ये ऐसे हिस्से नहीं हैं जो मशीनरी के कार्य में सहायता करते हैं, बल्कि स्थिर धातु संरचनाएँ हैं, जिनका अपना कोई यांत्रिक कार्य नहीं है। इसलिए विभाग ने इन्हें CTI 76109010 — एल्युमिनियम संरचनाएँ के रूप में वर्गीकृत किया, जिस पर 10% बेसिक कस्टम ड्यूटी, 12.5% काउंटरवेलिंग ड्यूटी, 3% सैस तथा 4% अतिरिक्त शुल्क लागू होते हैं। इस अंतर से लगभग ₹21,01,983 की कम कस्टम राशि हुई जिसका वसूली नोटिस जारी किया गया।
Welkin Foods ने इस निर्णय को चुनौती दी और मामला Customs, Excise and Service Tax Appellate Tribunal (CESTAT) तक पहुंचा, जहाँ पहले उनके पक्ष में फैसला आया। परंतु कस्टम विभाग सुप्रीम कोर्ट तक गया और वहाँ यह विवाद सुलझा।
2. मुख्य सवाल — वर्गीकरण क्यों महत्वपूर्ण है?
यह मामला एक बुनियादी कस्टम टैरिफ वर्गीकरण विवाद है — यह निर्धारित करना कि किसी वस्तु को किस टैरिफ हेडिंग के तहत वर्गीकृत किया जाए और इससे तय होता है कि उस पर कितनी कस्टम ड्यूटी लगेगी।
- CTI 84369900 — कृषि मशीनरी के हिस्सों के लिए, जिस पर ड्यूटी शून्य है।
- CTI 76109010 — एल्युमिनियम संरचनाएँ, जिस पर ड्यूटी कई प्रकार की और उच्च है।
इस वर्गीकरण का असर सीधे कस्टम ड्यूटी की राशि, लागत और व्यापार के वित्तीय परिणाम पर पड़ता है। वस्तु को मशीनरी के हिस्सों के रूप में वर्गीकृत करना अधिक लाभदायक होता है क्योंकि ड्यूटी शून्य होती है, जबकि संरचनाओं के रूप में वर्गीकृत होने पर भारी ड्यूटी का बोझ आयातक को उठाना पड़ता है।
3. सुप्रीम कोर्ट का तर्क और निर्णय
सुप्रीम कोर्ट की दो-न्यायाधीश बेंच (Justice J.B. Pardiwala और Justice R. Mahadevan) ने विस्तृत विश्लेषण के बाद आदेश दिया कि:
(क) ‘मशरूम शेल्व्स’ मशीन नहीं हैं
अदालत ने यह स्पष्ट किया कि आयात किए गए एल्युमिनियम शेल्व्स किसी भी यांत्रिक गतिविधि में भाग नहीं लेते — उनमें कोई चलने वाली या यांत्रिक भाग नहीं होती है, और वे खुद किसी मशीन का कार्य नहीं करते। वे केवल परतों को उठाने और मशीनों को रखने के लिए एक स्थिर ढांचा प्रदान करते हैं, जिससे वे मशीनरी के “हिस्से” नहीं माने जा सकते।
(ख) ‘एल्युमीनियम संरचनाएँ’ के रूप में वर्गीकरण
अदालत ने देखा कि एल्युमिनियम शेल्व्स की भौतिक विशेषताएँ (structure की तरह होना), जैसे कि वे स्थिर आधार हैं, एक जगह पर स्थापित रहते हैं, और उन्हें किसी मशीन का हिस्सा नहीं कहा जा सकता, उन्हें Chapter Heading 7610 (एल्युमिनियम संरचनाएँ) के अंतर्गत लाना चाहिए। इस श्रेणी के लिए स्थापित HSN स्पष्टीकरण के अनुसार, ऐसे धातु संरचनाएँ उसी Heading के तहत आती हैं।
(ग) ‘End-Use’ या ‘व्यापार-भाषा’ परीक्षण की सीमाएँ
Import दुकानदारों ने तर्क दिया कि मशरूम खेती में इन शेल्व्स का उपयोग कृषि मशीनरी के साथ होता है और इसलिए उन्हें “पार्ट्स” का दर्जा मिलना चाहिए। लेकिन अदालत ने कहा कि केवल इसका उपयोग कृषि गतिविधियों में होना यह नहीं निर्धारित करता कि वे मशीनरी के हिस्से हैं। “End-use” और “common parlance” (व्यापार भाषा) परीक्षणों का उपयोग केवल तभी संभव है जब टैरिफ एंट्री खुद इसके लिए स्पष्ट रूप से जगह देती है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं था। अदालत ने जोर देकर कहा कि सभी वर्गीकरण ‘First Schedule’ के General Rules of Interpretation के अनुसार किए जाते हैं और यह टैरिफ हेडिंग के शब्दों, नोट्स और HSN explanatory notes पर आधारित होना चाहिए।
(घ) CESTAT के निर्णय को खारिज करना
CESTAT ने पहले यह फैसला दिया था कि शेल्व्स को ‘कृषि मशीनरी के पुर्जों’ के रूप में देखा जाना चाहिए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय रद्द कर दिया और कहा कि इसका आधार केवल व्यापार भाषा और उपयोग था, जो कि मुख्य नियमों के अनुरूप नहीं है।
4. कस्टम ड्यूटी के प्रभाव
अब यह तय किया गया कि इन शेल्व्स पर CTI 76109010 के तहत वे कस्टम ड्यूटी लागू होंगे, जिसका मतलब है:
- 10% बेसिक कस्टम ड्यूटी
- 12.5% काउंटरवेलिंग ड्यूटी
- 3% कस्टम सैस
- 4% अतिरिक्त शुल्क
इस प्रकार कुल ड्यूटी लगभग एक बड़ी राशि बनती है, जोकि पहले शून्य थी जब सामान को मशीनरी के पुर्जे के रूप में वर्गीकृत किया गया था। आदेश में यह भी कहा गया कि आयातक को ₹21,01,983 की कम वसूली गई ड्यूटी को वापस करना पड़ेगा साथ ही ब्याज़ के साथ भी भुगतान करना होगा।
5. कानूनी और व्यापारिक अर्थ
इस निर्णय के कई मायने हैं:
(क) न्यायिक स्पष्टता
सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि टैरिफ वर्गीकरण केवल उपयोग पर आधारित नहीं होता, बल्कि टैरिफ हेडिंग की शब्द-शक्ति, नियम और व्याख्या पर आधारित होता है।
(ख) कस्टम प्रशासन के लिए मार्गदर्शन
यह निर्णय कस्टम अधिकारियों को यह दिशा देगा कि किस प्रकार की वस्तुओं को मशीनरी हिस्से और किन्हें संरचनात्मक वस्तु माना जाए, विशेषकर जहाँ व्यावसायिक उपयोग और डिज़ाइन बीच में होते हैं।
(ग) व्यापारियों के लिए सावधानी
आयातक और निर्यातक अब से अपनी वस्तुओं को वर्गीकृत करते समय केवल उपयोग पर निर्भर नहीं रह सकते, बल्कि टैरिफ नियमों और प्राथमिक शब्द प्रयोग पर अधिक ध्यान देना होगा, अन्यथा उन्हें भारी ड्यूटी का भुगतान करना पड़ सकता है।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट का आदेश व्यापार और कस्टम कानून की दुनिया में एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। यह स्पष्ट करता है कि वस्तु के मूल, भौतिक स्वरूप और टैरिफ की स्पष्ट व्याख्या को ही प्रधान माना जाएगा न कि केवल उपयोग या कारोबारी भाषा को। इस निर्णय से न केवल Welkin Foods जैसे मामलों का निपटारा होगा, बल्कि यह भविष्य में कस्टम वर्गीकरण विवादों को हल करने के लिए अग्रणी दिशानिर्देश भी स्थापित करेगा।